भाग-1 राष्ट्रपति (Part-1: President) for Maharashtra PSC Exam

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70वां स. स. अ. -दो संघ राज्य- दिल्ली व पुडुचेरी शामिल है।

  • राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद व राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते।
  • 1961 में 11वां स. स. अ. के तहत यह व्यवस्था दी गयी है कि निर्वाचक मंडल में रिक्त स्थान रिक्त होते हुए भी राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।

राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति-अनु. 55 के दव्ारा राष्ट्रपति के निर्वाचन में दो सिद्धांतों को अपनाया गया है।

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ समरूपता तथा समतुल्यता या आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली:- इस सिद्धांत का तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों की विधान सभाओं का प्रतिनिधित्व का मान निकालने के लिए एक ही प्रक्रिया अपनायी जाएगी तथा सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्य का योग संसद के सभी सदस्यों के मत मूल्य के योग के बराबर होगा।

विधानसभा के सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण-

State Lesgislature One Vote

संसद सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण-

Vote of One Person

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ एकल संक्रमणीय सिद्धांत (एक मत) -इस सिद्धांत का तात्पर्य यह है कि यदि निर्वाचन में एक से अधिक उम्मीदवार है तो मतदाताओं दव्ारा मतदान वरीयता क्रम से दिया जाए।

राष्ट्रपति का पद निम्न रीति से रिक्त होगा-

  • कार्यकाल पूरा होने पर
  • पद त्याग से
  • मृत्यु होने पर
  • महाभियोग दव्ारा
  • निर्वाचन रद्द हो जाने पर

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