पोस्ट-हार्वेस्ट हानि कम करने हेतु किये गए पहल (Initiatives taken to reduce post-harvest loss) for MCSCC

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कृषि विकिरण केन्द्र

सुर्ख़ियों में क्यों?

  • भारत और रूस ने भारत में एकीकृत विकिरण केन्द्रों की स्थापना में सहयोग करने के लिए सहमति जताई है।

  • पहले चरण में, महाराष्ट्र में सात केन्द्र स्थापित किए जाएंगे, जिनका अहमदनगर जिलें में राहुरी पर वर्तमान केन्द्र के अपग्रेडेशन (उन्नयन) के साथ शुभारंभ होगा।

  • कृषि विकिरण केन्द्र वह केन्द्र है जहां खाद्य उत्पादों को कीटाणुओं और कीड़ों से मुक्त करने के लिए कम मात्रा में विकिरण से गुजारा जाता है जिससे उनकी दीर्घायुता और शेल्फ (स्वयं) जीवन में वृद्धि होती है।

कोल्ड (शरद) चेन (श्रृंखला) योजना

  • खाद्य प्रसंकरण उद्योग मंत्रालय कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन और परिरक्षण अवसंरचना हेतु एक केन्द्रीय योजना का 2008 से ही क्रियान्वयन कर रहा है।

  • यह योजना मुख्यत: निजी क्षेत्र दव्ारा संचालित है।

  • सामान्यत क्षेत्रों में यंत्र और मशीनों (यंत्र) तथा तकनीकी सिविल (नागरिक) कार्यो की कुल लागत का 50 प्रतिशत तथा उत्तर पूर्वी प्रदेशों एवं दुर्गम क्षेत्रों (उत्तर-पूर्वी राज्यो, सिक्किम, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए 75 प्रतिशत वित्तीय सहयोग दिया जाता है।

  • प्रत्येक परियोजना के लिए अधिकतम अनुदान राशि 10 करोड़ है।

  • एकीकृत कोल्ड चेन और परिरक्षण अवसंरचनाएं व्यक्तिगत रूप से, उद्यमियों के समूहों, सहकारी समितियों, स्वयं सेवी समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), NGOs, केन्द्रीय/राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों इत्यादि दव्ारा स्थापित की जा सकती हैं।

दलहन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य

सुर्ख़ियों में क्यों?

केन्द्र सरकार ने आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी के बाद दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 425 रुपये प्रति क्विंटल (200 रुपये प्रति क्विंटल के बोनस सहित) तक की वृद्धि की घोषणा की।

न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है?

यह वह दर है जिस पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) जैसी सरकारी एंजेसियाँ (शाखा) और राज्य सरकारों के स्वामित्व वाली अन्य एंजेसियाँ किसानों से अनाज खरीदती हैं। इसके अलावा इसे बाजार में बेंचमार्क (मानदंड) कीमतों के रूप में भी माना जाता है।

लाभ

  • किसान दलहन की खेती की तरफ आकर्षित होंगे। दलहन फसलें उर्वरक और कीटनाशकों के नगण्य उपयोग और उत्पादन की उच्च क्षमता के साथ, उत्पादन की सबसे कम लागत वाली फसलें होती हैं। वे देश के कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुरूप हैं।

  • दालों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए यह उसके क्षेत्रफल और निवेश को बढ़ायेगा।

  • बढ़ती श्रम और कच्चे माल की लागत के संदर्भ में कीमत वसूल होगी।

  • भारत में दालों का आयात 45-50 लाख टन के उच्चतम स्तर पर है; इसमें भी कमी आएगी।

  • धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सिर्फ 50 रुपये की वृद्धि हुई है। फलस्वरूप धान और गेहूँ की तुलना में दलहन किसानों को अधिक आकर्षित करेगी।

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