केन्द्रीय पत्तन प्राधिकरण विधेयक 2016 (Central Port Authority Bill 2016 – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

§ पोत परिवहन मंत्रालय दव्ारा 5 दशक पुराने महापत्तन न्यास अधिनियम 1963 (मेजोर पोर्ट ट्रस्ट एक्ट) की जगह एक नया केंद्रीय पत्तन प्राधिकरण विधेयक 2016 लाया गया हैं।

§ नए विधेयक के पारित हो जाने के बाद देश के 11 महापत्तन कॉर्पोरेट (पालिका) संस्थाओं की तरह कार्य कर सकेंगे, क्योंकि इसके कई प्रावधान कंपनी अधिनियम, 2013 के समान हैं।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं

§ विधेयक ने पत्तन बोर्ड (मंडल) के लिए एक सरल संरचना का प्रस्ताव किया है। इसके तहत बोर्ड में नौ सदस्य रहेंगे, जिसमें सरकार दव्ारा नामित एक सदस्य व एक नामित श्रमिक सदस्य के अतिरिक्त तीन प्रमुख बंदरगाहों के कार्यकारी प्रमुख भी शामिल होंगे।

§ कार्यात्मक स्वायत्ता बढ़ाने के लिए एवं पूंजीगत व्यय और कार्यशील पूंजी की आवश्यकता के लिए ऋण और प्रतिभूति की शक्तियों पत्तनों को ही सौंप दी जाएगी।

§ बंदरगाह अपनी भूमि को पत्तन संबंधी उपयोग के लिए 40 साल तक और अन्य उपयोग के लिए 20 साल तक पट्‌टे पर दे पाएगें।

§ बंदरगाहों को कंपनी अधिनियम 2013 में निर्धारित लेखापरीक्षा और लेखा मानकों का पालन करना होगा, अर्थात वे उनकी गतिविधियों और कार्यो की आंतरिक लेखापरीक्षा कर पाएंगे।

§ अपने कर्तव्यों के पालन न करने या किसी आपात स्थिति में ही केंद्र सरकार का पत्तन प्राधिकरण का नियंत्रण अपने हाथ में ले पायेगी।

§ ‘कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ एवं ‘पत्तन प्राधिकरण दव्ारा अवसरंचना के विकास’ के प्रावधानों को भी कंपनी अधिनियम 2013 के समान पेश किया गया है।

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