सागरमाला (Sagar Mala Project – Economy)

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• “सागरमाला” पत्तन आधारित विकास मॉडल (आदर्श) विकसित करने की भारत सरकार की एक सामरिक, एवं ग्राहक केंद्रित पहल है जिससे भारत की लंबी तटरेखा, भारत की समृद्धि का प्रवेश दव्ार बन जाएगी।

• यह एक ओर जहां वर्तमान पत्तनों के आधुनिक विश्व स्तरीय पत्तनों में रूपांतरण की परिकल्पना करता है, वहीं दूसरी ओर आवश्यकता के आधार पर नए विश्व स्तरीय पत्तनों के विकास की भी परिकल्पना करता है।

• सागरमाला का उद्देश्य सड़क, रेल, अंतर्देशीय और तटीय जलमार्गो के माध्यम से पत्तनों, अंतर्क्षेत्र और कुशल निकासी प्रणाली का विकास करना है जिससे पत्तन, तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि के चालक बन जाएँ।

• परिणाम के रूप में, सागरमाला परियोजना आयात-निर्यात और घरेलू, दोनों क्षेत्रों के लिए कुशल और निर्बाध परिवहन का विकास करेगी। इसके लिए यह समुद्री विकास के साथ अंतर्क्षेत्र की औद्योगिक और फ्रेट (सारिका) कॉरीडोर (गलियारा) की परियोजनाओं का एकीकरण करेगी जिससे ग्राहक के लिए लॉजिस्टिक (सेना को टिकाने या हटाने की विद्या) की लागत कम होगी। इससे आयात-निर्यात और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।

भारत में सामुद्रिक क्षेत्रक की वर्तमान चुनौतियां

भारत के सामुद्रिक क्षेत्र का विकास कई विकासात्मक, प्रक्रियात्मक और नीतिगत चुनौतियों से घिरा हुआ है। उनमें से कुछ नीचे सूचीबद्ध हैं-

• देश भर में औद्योगीकरण, व्यापार, पर्यटन और परिवहन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत ढांचे के विकास में कई एजेंसियों (संघों) की भागीदारी।

• प्रमुख और गौण पत्तनों पर निकासी संबंधी अवसंरचनात्मक सुविधाओं का अभाव।

• सीमित अंतर्क्षेत्रीय संपर्क जिससे परिवहन और माल के आवागमन की लागत बढ़ जाती है।

• पत्तनों पर चयनात्मक मशीनीकरण (यंत्र) और प्रक्रियात्मक बाधाओं की उपस्थिति।

• भारत में विभिन्न बंदरगाहों पर पैमाने, गहरे प्रारूप और अन्य सुविधाओं का अभाव।

सागरमाला के प्रमुख घटक

सागरमाला परियोजना की अवधारणा में तीन प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त किये जाने का उद्देश्य निहित है:

• पत्तन का आधुनिकीकरण: पत्तन की आधारभूत सुविधाओं और वर्तमान प्रणालियों के आधुनिकीकरण दव्ार वर्तमान पत्तनों का विश्व स्तरीय पत्तनों में रूपांतरण। इसके अतिरिक्त प्रमुख और गौण, दोनों प्रकार के पत्तनों के सहक्रियाशील विकास के लिए अंतर-अभिकरण समन्वय सुनिश्चित करना।

• कुशल निकासी प्रणाली, अंतर्क्षेत्रों के लिए कुशल रेल, सड़क और तटीय/आई. डब्ल्यू. टी संजाल विकसित करना तथा परिवहन के सबसे पसंदीदा प्रकार के रूप में अंर्तदेशीय/तटीय नौवहन को बढ़ावा देना।

• तटीय आर्थिक विकास: निम्नलिखित के दव्ारा तटीय क्षेत्रों में तटीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।

o तटीय आर्थिक क्षेत्रों (सी. ई. जेड) , पत्तन आधारित सेज/एफ. टी. डब्लू. जेड, कैप्टिव (कैदी) सहायक उद्योगों का विकास, और

o तटीय पर्यटन का संवर्धन।

सागरमाला के अंतर्गत पहले

इन तीन प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु दो व्यापक पहलें सागरमाला को आगे बढ़ाएंगी:

• तटीय आर्थिक क्षेत्रों (सी. ई. आर) का विकास

• बंदरगाहों में तटीय नौवहन और निर्बाध संचालन को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहल।

सागरमाला के लाभ

• रोजगार सृजन

• औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि

• संधारणीय विकास

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