प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का वर्गीकरण (Classification of Polluting Industries – Environment And Ecology)

Get unlimited access to the best preparation resource for competitive exams : get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

Download PDF of This Page (Size: 150K)

• भारत के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने औद्योगिक इकाइयों को उनकी प्रदूषण क्षमता के आधार पर रंगों की विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करने का निर्णय लिया है।

• यह वर्गीकरण पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के दव्ारा विकसित एक प्रदूषण सूचकांक पर आधारित है। इस सूचकांक का निर्धारण उत्सर्जन, अपशिष्ट, उत्पन्न खतरनाक अपशिष्ट और संसाधनों की खपत के आधार पर किया गया है।

• विभिन्न उद्योगों को उनके दव्ारा 15 से लेकर 60 तक के पैमाने पर प्राप्त स्कोर (हिसाब) के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा

श्रंग

स्कोर (हिसाब)

उदाहरण

लाल (अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले)

60 और इससे अधिक

पेट्रोरसायन, फार्मास्यूटिकल्स (औषध-संग्रह), चीनी, कागज, और लुगदी, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, ताप विद्युत संयंत्र, चमड़ा कारखाना, कार्बनिक रसायन, उर्वरक, पटाखे

नरंगी

30-59 के बीच

कोयला शोधन, कांच निर्माण, पेंट (चित्रकारी करना), स्टोन (पत्थर) क्रशर, एल्युमीनियम (एक प्रकार की हल्की धातु) और स्क्रैप (टुकडा) से तांबा निकालना

ळरा

15-29 के बीच

एल्यूमिनियम के बर्तन, स्टील (इस्पात) फर्नीचर, साबुन निर्माण, चाय प्रसंस्करण

सफेद (गैर-प्रदूषणकारी)

15 से कम

एयर (वायु) कूलर (शीतक), एयर (वायु) कंडीनशनर (किसी वस्तु को अच्छी दशा में रखने वाला पदार्थ) इकाईयाँ, चाक कारखाने, बिस्किट (टिकिया) ट्रे (तश्तरी) इकाईयाँ

• वर्गीकरण संपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र के लिए है न कि अलग-अलग ईकाईयों के लिए।

• प्रमाणन के वार्षिक आधार पर नवीकरण को भी इसके साथ समाप्त कर दिया जाएगा। पर्यावरण मंत्रालय ने लाल श्रेणी के लिए पांच साल के नवीकरण, नारंगी के लिए दस साल और हरे रंग के लिए एक बार प्रमाणन का सुझाव दिया है। सफेद उद्योगों को किसी ग्रीन (हरा) क्लीयरेंस (साफ करने का कार्य) की आवश्यकता नहीं होगी।

Developed by: