लैंगिक समता सूचकांक (जीपीआई) (Sexual Equality Index – Government Plans)

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• लैंगिक समानता सूचकांक आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं की शिक्षा तक सापेक्ष पहुँच मापने के लिए बनाया गया है। यह सूचकांक यूनेस्को दव्ारा जारी किया जाता है।

शिक्षा के मानदंड के आधार पर जीपीआई की गणना: किसी शैक्षणिक स्तर (प्राथमिक, माध्यमिक, आदि) पर नामांकित महिलाओं की संख्या में पुरुषों की संख्या का भाग देकर इसकी गणना की जाती है। यह विधि किसी भी मान को ज्ञात करने के लिए उपयोग में लायी जा सकती है।

• मैर्किजी ग्लोबल इंस्टीटयूट की रिपोर्ट (विश्व-संबंधी, संस्थान का विवरण) ‘समता की शक्ति: भारत में बढ़ती महिला समता’ में भारत का वैश्विक लैंगिक समता स्कोर (सफलता पाना) या जीपीएस 0.48 है, जहां आदर्श स्कोर 1 है।

• भारत का स्कोर “अत्यंत उच्च” लैंगिक असमानता को दर्शाता है जो पश्चिमी यूरोप के स्कोर 0.71 और उत्तरी अमेरिका एवं ओशेनिया के स्कोर 0.74 की तुलना में बहुत कम है।

• लैंगिक समानता को बढ़ावा देकर और महिलाओं की सक्रिय कार्यबल में अधिक भागीदारी सुनिश्चित कर के भारत अपने जीडीपी में 7 ट्रिलियन (डॉलर (अमेरिका आदि की प्रचलित मुद्रा) की वृद्धि कर सकता है जिससे जीडीपी क्रमबद्ध रूप से 1.4 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है

• लैंगिक समानता के मामले में भारत में सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे पांच राज्यों-मिजोरम, केरल, मेघालय, गोवा और सिक्किम के औसत फेमडेक्स स्कोर (सफलता पाना) 0.67 की तुलना केवल चीन एवं इंडोनेशिया के जीपीएस से ही जा सकती है।

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