मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) (Missile Technology Control System – International Relations India and the World)

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भारत एमटीसीआर का 35वां सदस्य बन गया। द हेग आचार संहिता में शामिल होने के बाद, भारत के बैलिस्टक मिसाइल परमाणु अप्रसार व्यवस्था में शामिल होने के प्रयासों को बढ़ावा मिला है।

सदस्यता का महत्व

• भारत सरकार के मेक इन इंडिया (भारत में बनाना) पहल के अलावा एमटीसीआर सदस्यता भारत की अंतरिक्ष और मिसाइल प्रौद्योगिकी को भी बढ़ावा देगी।

• भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को स्पष्ट रूप से फायदा होगा हालांकि देर से ही सही-क्योंकि 1990 के दशक में, नई दिल्ली के रूसी क्रायोजेनिक इंजन प्रौद्योगिकी पाने के प्रयासों पर एमटीसीआर के कारण ही विराम लगा था।

• यह भारत को उच्च स्तरीय मिसाइल प्रौद्योगिकी खरीदने के लिए सक्षम बनाएगा और रूस के साथ संयुक्त उपक्रम में भी मजबूती आएगी।

• यह रूस के साथ सह-विकसित सुपरसोनिक (ध्वनि के वगे से अधिक वेगशाली) ब्रह्योस क्रूज मिसाइल (युद्ध प्रक्षेपास्त्र) के निर्यात का रास्ता आसान कर देगा।

• भारत अमेरिका से प्रिडेटर (परजीवभक्षी) ड्रोन (भिनभिनाना) का आयात करने में सक्षम हो जाएगा।

एमटीसीआर के बारे में

मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था है। यह 35 देशों के बीच एक अनौपचारिक और स्वैच्छिक भागीदारी व्यवस्था है जो 500 किलो से ज्यादा पेलोड 300 किमी से अधिक दूरी तक ले जाने में सक्षम मिसाइल और मानवरहित हवाई वाहन प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकती है।

• चीन, इज़राइल और पाकिस्तान एमटीसीआर के सदस्य नहीं हैं।

• अमरीका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जापान, इटली, जर्मनी, ब्राजील, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया समूह के प्रमुख सदस्य हैं।

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