रेलवे के पुनर्गठन पर विवके देवरॉय समिति की रिपोर्ट (Report of The Vivek Debroy Committee On The Railway Connection – Report And Commitee)

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• भारतीय रेल के पुनर्गठन पर विवके देबरॉय समिति की रिपोर्ट पांच साल का रोडमैप (सड़क मानचित्र) निर्धारित करती है जिसमें एक सर्वाधिक रेल नियामक विकसित करने, रेल बजट समाप्त करने और ’खुली पहुँच’ व्यवस्था के अंतर्गत अन्य लोगों को भी स्थान देने की बात की गयी है जो रेलवे के क्षेत्र में निवेश करना चाह रहे हैं। यह व्यवस्था रेलवे को मात्र एक अन्य ट्रेन-सेवा प्रदाता में बदल देगी।

• समिति की सिफारिशों तीन स्तंभों पर आधारित हैं-

• वणिज्यिक लेखा।

• मानव संसाधन में परिवर्तन।

• एक स्वतंत्र नियामक।

• रिपोर्ट (विवरण) में कम से कम तीन सचिव स्तर के अधिकारियों (”रेलवे बोर्ड (मंडल) के साथ संलग्न नहीं”) के साथ एक रेल मंत्रालय के सृजन की परिकल्पना की गयी है जो रेल सेक्टर (वृत्त खंड) के लिए, न कि केवल रेलवे के लिए, नीति निर्धारित करेगा जिसमें ”प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो....निजी प्रवेश और निजी निवेश को बढ़ावा मिले।

• रिपोर्ट ऐ स्वतंत्र, अर्ध न्यायिक रेलवे रेगुलेटरी अथॉरिटी (अधिकार) ऑफ इंडिया (के भारत) की स्थापना की बात करता है जो रेलवे की पुरानी संरचना को परिवर्तित करने और पुनर्गठन के लिए पूर्व शर्त है। तकनीकी मानक और माल ढुलाई दरें निर्धारित करना तथा विवादों को हल करना नियामक पर निर्भर करेगा। नियामक किराया संशोधन की सिफारिश कर सकते हैं, लेकिन यह रेल मंत्रालय के लिए बाध्यकारी नहीं होगा।

• रेल बजट का अस्तित्व 5 साल के बाद समाप्त हो जाना चाहिए और सरकार को सब्सिडी के माध्यम से रेलवे दव्ारा वहन सामाजिक लागत का पूरा बोझ उठाना चाहिए।

• खुली पहुंच सुनिश्चित करने के लिए यह रिपोर्ट रेलवे ट्रैक (पदचिन्ह) निर्माण, ट्रेन (रेल) संचालन, और रोलिंग स्टॉक (यंत्र, कमरे आदि चक्र से सज्जित सामग्री) उत्पादन इकाइयों को अलग-अलग संस्थाओं के अंतर्गत पृथक करने की सिफारिश करती है।

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