ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार विधेयक 2015 (Rights Bill of Transgender Persons, 2015)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

समाजिक न्याय मंत्रालय ने हाल ही में ’ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार विधेयक, 2015’ के मसौदे को, कैबिनेट (मंत्रालय) की मंजूरी के लिए भेजे जाने से पहले, इसे अंतिम रूप देने के लिए कानून मंत्रालय के पास भेजा

पृष्ठभूमि

• यह विधेयक उच्च सदन के सांसद तिरूचि शिवा निजी विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया गया था। विधेयक को 24 अप्रैल 2015 को राज्यसभा दव्ारा पारित कर दिया गया था।

• लेकिन तब सरकार दव्ारा आश्वासन दिया गया था कि सांसद तिरूचि शिवा के विधेयक में व्याप्त कमियों को दूर करके सरकार स्वयं इस विधेयक को सरकारी विधेयक के रूप में प्रस्तुत करेगी।

निजी सदस्य विधेयक

• किसी विधेयक को निजी विधेयक माना जाये अथवा सरकारी विधेयक, यह इस तथ्य पर निर्भर करता है कि उसे किसी सांसद के दव्ारा निजी रूप से प्रस्तुत किया गया है अथवा सरकार के किसी मंत्री के दव्ारा।

• संसद का कोई भी सदस्य जो मंत्री नहीं निजी सदस्य कहलाता है।

• लोकसभा में प्रत्येक शुक्रवार के अंतिम ढाई घंटे सामान्यत: निजी सदस्यों के मामलों यथा निजी सदस्यों के विधेयक संकल्प आदि के निपटारे के लिए आवंटित किये जाते हैं।

• इससे पहले उच्चतम न्यायालय (आपराधिक अपील क्षेत्राधिकार संवर्धन) विधेयक, 1968 अंतिम निजी सदस्य विधेयक था, जो संसद दव्ारा पारित किया गया था। 9 अगस्त 1970 को यह कानून बना।

मुख्य प्रावधान

• यह राज्य दव्ारा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने और उनके कल्याण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए आधार प्रदान करता है।

• उक्त विधेयक में कानून के समक्ष ट्रांसजेंडर लोगों को मान्यता प्रदान करने और उन्हें ओबीसी कोटे (सिवाय एसटीसी/एसटी के ) तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण सहित विभिन्न अधिकार और अन्य सुविधाएं प्रदान करने संबंधी प्रावधान हैं।

• ट्रांसजेंडर की पहचान:

• ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में घोषित किया जाना चाहिए, और एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ’पुरुष’, स्त्री या ट्रांसजेंडर’ के रूप में किसी भी लिंग को चुनने का विकल्प होना चाहिये। साथ ही उन्हें सर्जरी (शल्य चिकित्सा)/हार्मोनल (हॉरमोन संबंधी) से स्वतंत्र इनमें से कोई भी विकल्प चुनने का अधिकार होगा।

• केवल ’ट्रांसजेंडर’ नामकरण का उपयोग किया जाना चाहिए और ’अन्य’ या ’दूसरे’ जैसे शब्दों का प्रयोग नामावली में नहीं किया जाना चाहिए।

• राज्य स्तरीय किसी प्राधिकरण के दव्ारा किसी व्यक्ति को एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति होने का प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।

• अधिकार और सुविधाएं:

• ट्रांसजेंडर व्यक्ति भारत के संविधान दव्ारा दिए गए सभी अधिकारों को समान रूप से उपभोग कर सकें यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

• किसी भी बच्चे को इस आधार पर उसके माता-पिता से अलग नहीं किया जाएगा कि वह ट्रांसजेंडर है, ऐसा तभी किया जा सकता है जब किसी सक्षम न्यायालय के दव्ारा ऐसा आदेश बच्चे के सर्वोत्तम हित में दिया गया हो।

• सरकार ट्रांसजेंडर लोगों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार, हिंसा और शोषण को रोकने के लिए सभी उचित कदम उठाएगी।

• ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के यौन उत्पीड़न के मामलों को रोकने के लिए विधेयक में भारतीय दंड संहिता में आवश्यक संशोधन किये जाने संबंधी सम्मिलित हैं।

भेदभाव का विषेध

• विधेयक में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए सभी उचित कदम और उनके साथ कोई भेदभाव न हो यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।

• किसी भी सार्वजनिक संस्था के दव्ारा भर्ती, पदोन्नति सहित रोजगार से संबंधित अन्य किसी भी मुद्दे के संबंध में किसी भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

• विधेयक में सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास और मनोरंजन, शिक्षा, कौशल विकास और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के रोजगार के बारे में भी प्रावधान समाहित हैं।

आवश्यकताएं

• लगभग 6 लाख आबादी (जनगणना 2011) वाला ट्रांसजेंडर समुदाय, लंबे समय से उपेक्षित है, अंतत: अब इस समुदाय को हमारे देश के नागरिकों के रूप में अपना न्यायपूर्ण अधिकार प्राप्त होगा।

• विधेयक किसी भी प्रकार की अस्पष्टता से बचने के लिए ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ किये जाने वाले सभी प्रकार के भेदभाव को समाहित करता है। विधेयक में स्पष्ट रूप से उन्हें सूचीबद्ध किया गया है। विधेयक के छात्रवृत्ति और आरक्षण आदि के प्रावधान उन्हें वास्तविक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेंगे।

• विधेयक लोगों के बीच जागरुकता पैदा करने तथा उन्हें ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति संवदेनशील बनाने तथा इस समुदाय के लोगों के साथ सम्मानजनक और दयालुतापूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रेरित करेगा।

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