Science & Technology: Cloud Computing and Prospect of 4G Services in India

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अद्यतन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Latest Development in Science & Technology)

क्लाउड कम्प्यूटिंग (Cloud Computing)

क्लाउड कम्प्यूटिंग के प्रमुख अभिलक्षण (Key Features of Cloud Computing)

  • चपलता/तीव्रता (एजीलिटी) : ऐसे गुण के कारण उपभोक्ताओं को प्रौद्योगिकीय अवसरंचना और उसके अध्ययन से संसाधनों की उपलब्धता अत्यंत तीव्र गति से होती है।
  • कीमत: कम कीमत होने के साथ-साथ पूंजीगत का प्रचालनीय व्यय में रूपांतरण।
  • उपकरण तथा अवस्थिति की स्वतंत्रता: उपभोक्ता दव्ारा किसी भी उपकरण अथवा अवस्थिति पर क्लाउड कम्प्यूटिंग का प्रयोग किया जा सकता है।
  • बहुल उपयोग: एक समय में एक से अधिक उपभोक्ताओं दव्ारा संसाधनों की साझेदारी की सुविधा उपलब्ध होती है।
  • विश्वसनीयता: एक से अधिक संसाधनों का समेकित उपयोग करने के कारण सूचनाओं की विश्वसनीयता बनी रहती है।
  • सुरक्षा: सूचनाओं के केन्द्रीकरण के कारण उन्हें पूर्णरूप से सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • रख-रखाव: चूँकि क्लाउड कम्प्यूटिंग के अवयवों को प्रत्येक उपभोक्ता के कम्प्यूटर में रखने के बदले उन्हें केन्द्रीकृत किया जाता है। अत: उनका रख-रखाव अपेक्षाकृत सरल होता है।

उपयोगिताएंँ (Utilities)

  • वाणिज्यक रूप से उपलब्ध साफ्टवेयर का प्रबंधन और नेटवर्क आधारित सेवाओं तक पहुंच।
  • दूरस्थ अवस्थित कम्प्यूटर अथवा उपभोक्ताओं तक सुविधाओं की उपलब्धता। क्योंकि ऐसी सारी सुविधाएं किसी एक केन्द्रीकृत स्थान से उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • अधिक मात्रा में सूचनाओं का संग्रहण एवं उपयोग।

एक नवीन स्मार्ट पैड-एडम (A Navin Smart Pad-Adam (ADAM) )

  • एक नवीन स्मार्ट पैड-एडम (ADAM) हैदराबाद एवं बैंगलौर में संकल्पित तथा डिजाइन किया गया है। यह इतना छोटा है कि कहीं भी ले जाया जा सकता है तथा इतना बड़ा है कि कुछ भी किया जा सकता है। यह हैदराबाद के सात भारतीयों दव्ारा स्थापित नोशन इंक नामक संस्था की संकल्पना है। इस उपकरण में 770 ग्राम भार 0.6 इंच मोटाई, 10.1 इंच खरोचरोधी स्पर्शी स्क्रीन (Touch Screen) वाले भागों को शामिल किया गया है।
  • यह पहला उपकरण होगा जिसमें पिक्सल क्यूआई डिस्प्ले (Dixel QI Display) तथा कम खर्चीली एवं ऊर्जा बचत वाली स्क्रीन प्रयुक्त होगी जो तीन मोड़ जैसे एल. सी. डी. मोड़, कम ऊर्जा वाले आधारित रंग पारपरावर्ती मोड़ एवं अत्यंत कम ऊर्जा वाले सौर्य प्रकाश में पढ़े जाने वाले ई-पेपर मोड़ जिसमें आँखों पर कम दबाव पड़ता है में संचालित किया जा सकता है।
  • यह स्क्रीन फिंगर प्रिंट रोधी तथा तैलीय विकर्षण और चमकरोधी लेप से युक्त होगा। इस उपकरण का लगभग पूरा निर्माण ताइवान में किया जाएगा। छोटे आकार वाले एडम में जल, आवश्यक प्रकाश, संवेदक, एक्सेलेरोमीटर, समर्थित जी. पी. एस. , डिजिटल कम्पास तथा माइक्रोफोन शामिल होंगे। इसमें 16 अथवा 32 जी. बी. की फ्लैश मैमोरी रखी जा सकेगी जिसे सुरक्षित डिजिटल कार्ड का समर्थन मिलेगा।
  • इसके तीन अंत: फलक होंगे स्पर्शी स्क्रीन, आनस्क्रीन आभासी की बोर्ड तथा स्क्रीन के पीछे स्थित ट्रैक पैंड जो 1800 के कोण पर फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी कर सकेगा।

भारत में 4 जी सेवाओं की संभावना (Prospect of 4G Services in India)

  • हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने चौथी पीढ़ी के चलित बेतार ब्रॉडबैंड सेवाओं को आरंभ करने से संबंधित एक वार्ता पूर्व पत्र जारी किया है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि पिछले एक वर्ष में 3 जी एवं 2 जी स्पैक्ट्रम के आवंटन एवं लाइसेंस के विषयों पर विभिन्न संस्थाओं के मध्य हिताेें के टकराव के कारण विवाद बना हुआ है। 4 जी तकनीकों का डिज़ाइन कई सेवाओं की उपलब्धता हेतु किया है जैसे- उच्च गतिवाला इंटरनेट संपर्क, मल्टीमीडिया सेवाओं जैसे टी. वी. प्रसारण, वीडियों कान्फ्रेसिंग, मोबाइल फोन आधारित वाणिज्यिक आदि। इन सेवाओं के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल का प्रयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह सभी प्रकार के 2 जी एवं 3 जी नेटवर्काेे में भी कार्य कर सकता हैं 2 जी से 4 जी तकनीकों की ओर उन्मुख होने का कारण यह है कि मोबाइल उपभोक्ताओं का आधार 525 मिलियन से अधिक का है तथा स्थिर फोन सेवा (Land Line) के लिए 12 - 14 प्रचालकों के बीच, औसतन 6 - 7 मेगाहर्ट्‌ज स्पेक्ट्रम के लिए प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। इसी कारण भारत में ब्रांडबैंड सेवाओं के विस्तार में व्यवधान है। ऐसी स्थिति में 4 जी तकनीकें 2 जी की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक कार्यकुशल होंगी। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या प्रचालकों को आवश्यक रेडियों आवृत्ति मिल पाएगी। जिससे 4 जी सेवाएं दी जा सकें क्यों 3 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन पर ही विवाद बना हुआ है।
  • सरकार ने प्रत्येक सेवा क्षेत्र में प्रत्येक प्रचालन के लिए 20 मेगाहर्ट्‌ज तक आवंटन का निर्णय किया है तथा इसके लिए ब्रॉडबैंड बेतार सेवाओं की कुल आवृत्ति बैंड 2.5 गीगाहर्ट्‌ज निर्धारित है। यद्यपि यह निर्देश प्रौद्योगिकी को ध्यान में रखकर दिया गया है लेकिन इस आवृत्ति बैंड में सबसे लोकप्रिय तकनीक वाईमैक्स (Wimax) है। सरकार 2.5 गीगाहर्ट्‌ज और 2.1 गीगाहर्ट्‌ज के आवंटनों को एक दूसरे से अलग करने का प्रयास कर रही है ताकि 3 जी सेवाओं के माध्यम से देश भर में ब्रॉडबैंड की बेतार सेवाओं तक पहुँच बढ़ाई जा सके, दूसरी ओर 4 जी तकनीक के तहत एक अन्य सेवा वाणिज्यिक क्षेत्र में परिपक्व हो रही है जिसे टर्म एवल्यूशन (L. T. E) कहते हैं। 4 दिसंबर, 2009 को सबसे पहले स्वीडन के प्रचालक टेलिया-सोनेश ने लांग टर्म एवल्यूशन नेटवर्क का प्रयोग किया था। जिसके बाद जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के कई प्रचालकों ने भी इसका परीक्षण किया। विशेषकर अमेरिका एवं यूरोप में 2 जी स्पेक्ट्रम बैंड को 4 जी तकनीक से प्रतिस्थापित करने हेतु आंदोलनात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। 4 जी में स्पेक्ट्रम की कार्यकुशलता 2 जी से 40 गुना अधिक होती है। स्पेक्ट्रम कार्यकुशलता का अर्थ प्रति कोष स्पेक्ट्रम की प्रति हर्ट्‌ज क्षमता है। दूसरी ओर 3 जी जिसमें संवहन (Carrier) के लिए न्यूनतम 2x5 मेगाहर्ट्‌ज आवश्यक होता है वही 4जी तकनीकों में 2x1 - 25 मेगाहर्ट्‌ज पर संवहन किया जा सकता है। इस कारण कार्यरत जी. एस. एम. प्रचालकों के लिए 4जी लांंग टर्म एवल्यूशन तकनीक की उपलब्धता से प्रचालकों की कीमत संबंधी संरचनात्मक लाभ प्राप्त होंगे। इस प्रकार 4जी तकनीकें न केवल उच्च गति वाली सूचना एवं वीडियों सेवाएं दे सकती हैं, वरन प्रति मेगाहर्ट्‌ज ध्वनि सूचनाओं को भी उच्च गुणवत्ता के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है।

मोबाइल टेलीफोनी का विकास (Development of Mobile Telephony)

  • 1 जी: इसका प्रारंभ 1980 के आरंभ में उन्नत फोन सेवा के सेल्युलर नेटवर्कों के वाणिज्यिक उपयोग हेतु किया गया था। इस प्रणाली में एक समय में किसी एक उपभोक्ता दव्ारा एक चैनल का प्रयोग किया जा सकता है।
  • 2 जी: इसका विकास 1990 के दशक में हुआ था जब मोबाइल प्रचालकों ने जी. जी. एस. एम. एवं सी. डी. एम. ए. नामक दो प्रतिस्पर्धी डिजिटल स्वर मानकों का प्रयोग आरंभ किया। 2 जी तकनीक में ध्वनि एवं एस. एम. एस. को तीव्र गति से भेजा जा सकता है जिसके लिए संपीड़न (Compression) एवं मोड्‌यूलेशन (Modulation) नामक तकनीकें प्रयुक्त होती हैं
  • 3जी: इस तकनीक में 5 मेगाहर्ट्‌ज पर बहुसंवहन प्रणाली प्रयुक्त होती है जिससे एक ही चैनल से ध्वनि तथा सूचनाएं भेजी जा सकती है। जिनकी दर कई mbps होती है।

पराक्साइड बम विस्फोटक उपकरण का पता लगाने हेतु नवीन युक्ति (उपकरण) (New Device for Detection of Peroxide Berm Explosive Device)

  • TATP (ट्राई एसीटोन ट्राईपराक्साइड) एक पराक्साइड बम विस्फोटक उपकरण है और यह एयरपोर्ट पर बम गिराने वालों के लिए एक विकल्प है।
  • TATP एक अत्यंत ही घातक विस्फोटक है एवं पिछले तीन दशकों में हुए आतंकवादी हमलों में इसने महत्पूर्ण भूमिका निभाई है। इसे आसानी से सस्ते कच्चे पदार्थों से बनाया जा सकता है और इसे खोजना काफी कठिन है।
  • यह आंतकवादियों में अत्यंत लोकप्रिय विस्फोटक है। परन्तु को TATP खोजना अब मुश्किल नहीं होगा। एक साधारण और कम खर्चीला उपकरण, जो TATP के पांच माइक्रोग्राम तक को खोजने में सहायक है, विकसित किया गया हैं उपकरण पेन जैसा दिखता है जो TATP आधारित विस्फोटकों को लिए हुए आतंकवादियों की योजना को विफल करने में नई दिशा दे सकता है। इस नवीन उपकरण को स्पर्श करने वाली विधि से संचालित किया जाता है, इस उपकरण की संवदेनशीलता अत्यंत उच्चस्तरीय है। यह पांच माइक्रोग्राम TATP तक की मात्रा को भी पहचान सकता है जिसे मानवीय आँख से नहीं देखा जा सकता। उपकरण को संचालित करने वालाउपकरण के निचले सिरे (Tip) को संदेहास्पद पदार्थ की सतह पर स्पर्श करता है। तदुपरांत टिप को हटा लिया जाता है और पेन के ऊपर इसे प्रतिस्थापित किया जाता है तथा तीनों लीवर को दबाया जाता है, प्रत्येक लीवर 300 माइक्रोगाम लीटर विलयन को छोड़ता है। रंग में परिवर्तन की उपस्थिति का संकेत देता है।
  • यह युक्ति सभी उड़ानों को उपलब्ध कराई जाएगी जो एयर लाइन होस्टेज को तीव्रता एवं सटीकता के साथ संदेहास्पद पदार्थों की खोज में सहायक होगी। यह स्थलीय प्राधिकारियों को उस स्थिति में बेहतर एवं तीव्र अनुक्रिया करने में मदद करेगा जब संदिग्ध आतंकवादी किसी प्रकार विमान के अंदर पहुंच गया हो।

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