Science and Technology: Communication Technology and Forth Generation Language

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सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुए नवीन विकास (New Developments in Information and Communication Technology)

चतुर्थ पीढ़ी लैंग्वेज (Forth Generation Language)

  • पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (PSTN) : PSTN वाणिज्यिक और सरकारी स्तर पर ध्वनि केन्द्रित सार्वजनिक टेलीफोन नेटवर्कों का व्यापक संजाल है। इसे प्लेन ओल्ड टेलीफोन सर्विस (Plain Old Telephone Service: POTS) भी कहा जाता है। यह सर्किट स्वीचिंग टेलीफोन नेटवर्कों का समुच्चय है। PSTN के अंतर्गत टेलीफोन लाईन, ऑप्टिक फाइबर केबल, माइक्रोवेव पारेषण लिंक, सेलुलर नेटवर्क, संचार उपग्रह, समुद्र से गुजरने वाले टेलीफोन केबल को शामिल किया जाता है।
    • PSTN मूलत: डिजिटल व्यवस्था पर कार्य करता है और इसमें फिक्स्ड टेलीफोन तथा मोबाइल दोनों के जरिए संपर्क साधा जा सकता है।
  • फैबलेट (Phablets) : फैबलेट से अभिप्राय फोन और टैबलेट के मिश्रित रूप से है। फैबलेट स्मार्टफोन श्रेणी का ही उपकरण है। इसके स्क्रीन का आकार 5 से 6.9 इंच तक होता है। इसमें स्मार्टफोन और टैबलेट दोनों का कार्य एक साथ किया जा सकता है। फैबलेट का स्क्रीन बड़ा होने के कारण यह मोबाइल वेब और मल्टीमीडिया दोनों स्तर के क्रियाकलाप सरलता से कर सकता है।
    • फैबलेट में टैबलेट जैसी सुविधाएँ जैसे-टच स्क्रीन, एक आभासी की -बोर्ड, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर, इंटरनेट कैमरा/वेब कैमरा एवं अन्य एप्लीकेशन होती हैं।
    • वर्तमान में सैमसंग के गैलेक्सी नोट II, HTC का टाइटन II, तोशिबो का न्यूज, LG का ऑप्टीमस, LTE ‘फैब्लेट्‌स का’ उपयोग किया जा रहा है।
    • ये ऐसे उपकरण हैं जो सबसे बड़े एंड्रायड स्मार्टफोन (4.8 ईंच) से बड़ा और 7 इंच वाले टैबलेट से छोटे आकार के होते हैं।
  • स्मार्टफोन: यह मोबाइल फोन का ही उन्नत रूप है। स्मार्टफोन में सामान्य मोबाइल फोन की तुलना में उन्नत तकनीक का उपयोग होता है। अत: ये फोन विभिन्न स्तरों पर उपयोगी होते हैं। इन फोनों में कम्प्यूटर जैसी प्रणाली इमेल, इंटरनेट, ई-बुक रीडर जैसी सुविधाएँ मिलती है।
    • इन फोनों में ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे विंडोज या किसी दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है। स्मार्टफोन में ब्लूटूथ और इंफ्रारेड तकनीक भी इंस्टॉल होती है जिसकी मदद से कोई भी डाटा फ्री ट्रांसफर किया जा सकता है। इनमें पोर्टेबल मीडिया प्लेयर, लो इंड कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा, पॉकेट वीडियो कैमरा और जीपीएस नेवीगेशन व्यवस्था का भी उपयोग किया जा रहा है।
  • तिआन्हे-2 (Tianhe-2) : यह अब तक का विश्व का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर है। चीन के ग्वांगजाऊ में स्थित यह 33.86 पेटाफ्लॉप गति वाला सुपर कम्प्यूटर है। अत: यह अमेरिका के सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर टाइटन से दो गुना तेज है। ऐसा माना जा रहा है कि तिआन्हे-2 का पूर्ण विकसित रूप विश्व के किसी भी सुपर कम्प्यूटर से 4 गुना तेज गति से कार्य कर सकता है।
  • प्रिज्म (PRISM) : यह अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी दव्ारा व्यापक स्तर पर डाटा की छानबीन करने वाला कार्यक्रम है। अमेरिकी सरकार ने इस कार्यक्रम को प्रिज्म नाम से कूटबद्ध किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, याहू, फेसबुक, स्काईप जैसे इंटरनेट कंपनियों से भंडारित किए गए इंटरनेट संचार (कम्प्यूनिकेशन) मांगे जाते हैं और इन संग्रहित किए गए संचारों का उपयोग कूटबद्ध किए गए लक्षित संचारों की पड़ताल में कर सकते हैं। अत: प्रिज्म को लेकर सबसे विचारणीय पहलू यह नहीं है कि ये आँकड़े संग्रहित करता है बल्कि यह है कि यह आँकड़ों के प्रकार संग्रहित करता है। उदाहरण के लिए गूगल दव्ारा जीमेल, वॉयस और वीडियो चैट, गूगल ड्राइव फाइल्स, फोटो लाइब्रेरी जैसे आँकडें को प्रदान किए जाते हैं।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) : सॉफ्टवेयर का समूह जोकि कम्प्यूटर हार्डवयेर का प्रबंधन करता है। कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग को समान सेवाएँ उपलब्ध कराता है ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम से जाना जाता है। एक अर्थ में कहा जाए तो यह ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होता है जिसके जरिए कम्प्यूटर हार्डवेयर संपर्क साधने की क्षमता विकसित करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना एक कम्प्यूटर और सॉफ्टवेयर प्रोग्राम की उपयोगिता नगण्य होती है।
    • ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर रिसोर्स जैसे-मेमोरी, प्रोसेसर तथा इनपुट-आउटपुट डिवाइसेस को व्यवस्थित करता है। यह आँकड़ों एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रत्येक रिसोर्स की स्थिति का लेखा-जोखा रखता है तथा यह निर्णय भी लेता है कि किसका, कब और कितनी देर के लिए कम्प्यूटर रिसोर्स पर नियंत्रण होगा। विदित हो कि कम्प्यूटर की सार्थकता हार्डवयेर और सॉफ्टवेयर की उपस्थिति मेंं ही मानी जाती है। इनके बिना कम्प्यूटर का कोई अस्तित्व नहीं। ऑपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर और सॉफ्टेयर के बीच संपर्क का कार्य करता है। यह समस्त हार्डवयेर के बीच संपर्क स्थापित करता है।

कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण:

  • माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 7-प्रचलित और उपयोगी
  • एप्पल मैकोस-एकमात्र एप्पल कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम
  • यूबुन्ट लाइनक्स (Ubuntu Linux) -लाइनक्स का एक प्रचलित प्रकार
  • गूगल एन्ड्रॉयड-एन्ड्रॉयड फोन में उपयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम
  • आईओएस (IOS) -एप्पल आईफोन में उपयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम

मोबाइल फोन में ऑपरेटिंग सिस्टम के उपयोग का अर्थ है इसके जरिए स्मार्टफोन, टैबलेट, पीडीए एवं अन्य डिजिटल मोबाइल फोन का संचालन किया जाना।

मोबाइल फोन के विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रमुख हैं-

  • एप्पल का IOS, गूगल का एन्ड्रॉयड, रिसर्च इन मोशन का ब्लैकबेरी OS और माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज फोन OS.
  • एन्ड्रॉयड: यह लाइनक्स आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसका उपयोग स्मार्टफेन और टैबलेट कम्प्यूटर में किया जा रहा है। एन्ड्रॉयड ओपन सोर्स (Open Source) के अंतर्गत आता है। इस ओपन सोर्स कोड और स्वीकार्य लाइसेसिंग के कारण उपकरण निर्माता उन्नत सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं। गत वर्ष अक्टूबर तक एन्ड्रॉयड के तहत लगभग 700000 एप्लीकेशनस उपलब्ध (app.) थे। एन्ड्रॉयड के प्राथमिक एप्लीकेशन स्टोर गूगल प्ले से डाउनलोड किए गए संभावित एप्लीकेशनों की संख्या अक्टूबर 2012 तक 25 अरब थी।
    • एन्ड्रॉयड वर्तमान में विश्व प्रचलित स्मार्टफोन प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है। एन्ड्रॉयड में इस्तेमाल किए जाने जाने हार्डवेयर एआरएम प्लेटफॉर्म पर आधारित होते हैं।

नोट:-: एआरएम का पूरा नाम एडवान्स रिसक मशीन है। इस प्रोफेसर के माध्यम से ही एन्ड्रॉयड बेहतर एवं तीव्र निष्पादन कर पाता है। एआरएम मशीन में 32 बिट के रिड्‌यूस्ड इंसट्रक्शन सेट कम्प्यूटर (RISC) की संरचना होती है।

  • बायोमैट्रिक आधार: भारत में सभी नागरिकों का विशिष्ट पहचान संख्या निर्धारित करने के लिए आधार प्रोजेक्ट प्रारंभ किया गया। इस प्रोजेक्ट में बायोमेट्रिक तकनीक का इस्मोल किया गया है जिनमें व्यक्ति को किन्ही शारीरिक अंगों से संबद्ध जानकारी एकत्रित कर उसकी विशिष्ट पहचान निर्धारित होती है।
    • उल्लेखनीय है कि बोयोमैट्रिक दो शब्दों से मिलकर बना है, बायोस और मैट्रोन। बायोस का अर्थ होता है जीवन संबंधित और मैट्रोन का अर्थ होता है माप करना। इस तकनीक की मदद से व्यक्ति के अंगूठे के निशान, अंगुलियों, आवाज़ और आँखों की पुतलियों के आधाार पर उसकी पहचान की जाती है।
    • बायोमैट्रिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक गतिविधियों के आधार पर कार्य करता है। विदित हो कि मनोविज्ञान में व्यक्ति के शरीर के अंगों की बनावट को ध्यान में रखा जाता है। व्यावहारिक स्तर पर उस व्यक्ति के व्यवहार को आधार माना जाता है। हर व्यक्ति में पायी जाने वाली बायोमैट्रिक पहचान अलग होती है। इसमें हेर फेर या कोई बदलाव करना बहुत जटिल है। इस तकनीक में पहले डांटा को एनक्रिप्ट (कूटित) किया जाता है ताकि कोई उसका क्लोन न बना सके।
  • भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल दूरसंचार (Rural Mobile Telecommunication in India) : भारत में लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या गावों में रहती है। देश में लगभग 6 लाख गाँव है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में टेली डेन्सिटी शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम है। भारत में दूरसंचार उद्यम क्षेत्र ने भी ग्रामीण क्षेत्रों तक अपना बाजार फैलाने में निरसता दर्शायी है। चूँकि ग्रामीण क्षेत्र में प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (Average Revenue Per User) भी कम है अत: दूरसंचार ऑपरेटर भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश नहीं करना चाहते हैं।
    • हालाँकि विगत दिनों किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय मोबाइल उद्योग ने ग्रामीण क्षेत्रों के 40 प्रतिशत हिस्से तक अपनी पहुँच बनायी है। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल सेवा विस्तार के लिए यह आवश्यक होगा कि लागत प्रभावी, ग्राहक उन्मुख और सुलभ पहुँच जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाए।
    • मोबाइल फोन पहुँच के अतिरिक्त इंटरनेट और ब्रॉडबैंड की भी ग्रामीण क्षेत्रों तक संतोषजनक पहुँच नहीं है।
    • इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि ग्रामीण क्षेत्रों तक दूरसंचार की पहुँच सहज होने से ग्रामीणों को न केवल कृषि कार्य बल्कि अन्य पारंपरिक उद्योगों में कार्य संचालन में असानी हो सकती है। इस बीच ग्रामीण क्षेत्रों में ई-चौपाल कार्यक्रम प्रारंभ किसानों को इंटरनेट सुविधा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
    • कार्यक्रम के जरिए ग्रामीणों को जानें-कैसे (Know-How) , समयबद्ध और प्रासंगिक मौसम पूर्वसूचना, पारदर्शी मूल्य की जानकारी जैसी सुविधाएँ मुहैया कराई जा रही है।
    • विगत दिनों भारत सरकार ने अपनी 3जी नीति घोषित की है। इसके जरिए 3G, HSPA (High Speed Packet Access) और वाईमैक्स तकनीक उपलब्ध होंगे और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल ब्रॉडबैंड सुविधा का उपयोग किया जा सकेगा। पुन: ट्राई (TRAI) ने भी इंटरनेट टेलीफोनी संबंद्ध लिए गए निर्णय में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (Internet Service Provides) को अनुमति दी कि वे कम्प्यूटर, मोबाइल फोन और लैंडलाईन फोन से लोकल, एसटीडी और आईएसडी कॉल दर को समाप्त करें। यह दर्शाता है कि इससे लोकल और लंबी दूरी दोनों स्तरों पर कॉल दरें कम होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के साथ संपर्क में वृद्धि होगी।
  • सूचना प्रौद्योगिकी का संस्कृति पर प्रभाव: सूचना प्रौद्योगिकी में हुए निरंतर विकास ने सूचना क्रांति का रूप ले लिया है। अर्थात दैनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी की पहुँच हो जाने से न्यूनतम समय में अधिकतम परिणाम मिलने की संभावना बढ़ी है। चाहे पारस्परिक संपर्क हो या शिक्षा, चाहे उद्योग क्षेत्र हों या कृषि क्षेत्र, सभी में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका स्वयंसिद्ध हुई है। मोबाइल फोन इंटरनेट की सुगम उपलब्धता ने इस अर्थ में प्रासंगिक भूमिका निभायी है।
    • लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी के इस क्रांतिकारी प्रभाव ने जीवन संस्कृति को भी प्रभावित किया है। सूचना प्रौद्योगिकी सुविधा से संपन्न लोगों का तीव्र गति से विकास हुआ है जबकि इस तक पहुँच न बना सकने वाले विकास की धारा में पीछे छूटते गए हैं।
    • अमीर और अमीर होता गया और गरीब की हालत दिनोदिन खराब होती चली गयी। इसे ‘डिजिटल डिवाइड’ की संज्ञा दी गयी है। जब कभी विकास एक सीमित वर्ग तक ही सिमट जाता है और उससे दूसरे वर्ग को लाभ नहीं पहुँचता तब विकास का समाज पर गलत प्रभाव पड़ता है। सूचना प्रौद्योगिकी स्तर पर भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखी गयी है। सूचना क्रांति के बाद अन्तर्देशीय और डाक तार गायब हो गए। इनके स्थान पर टेलीफोन और मोबाइल ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।
    • सर्वेक्षणों से पता चला है कि भारत में भी सूचना क्रांति ने यहाँ की संस्कृति को प्रभावित किया है। एक ओर सूचना क्रांति से प्रभावित एक वर्ग दिन-प्रतिदिन तकनीकी स्तर पर विशेषज्ञ बनता गया और दूसरा वर्ग पारंपरिक ज्ञात के आधार पर धीरे-धीरे अपना विकास करता रहा। मुख्यत: शहरी परिवेश ही सूचना क्रांति से प्रभावित हुआ। इंटरनेट पर ही तरह-तरह के खेल उपलब्ध होने लगे हैं जिससे बाहरी खेल के प्रति रुचि में कमी आई है।
    • पश्चिमी संस्कृति के सकारात्मक अवयवों के साथ-साथ नकारात्मक अवयव भी भारीतय संस्कृति में प्रवेश करने लगे हैं। आतंकवाद को बढ़ावा, अश्लीलता जैसे नकारात्मक तत्व सहज ही देखने को मिल सकते हैं।
    • अत: सूचना क्रांति का सदुपयोग करने के लिए आवश्यक है कि इससे हो सकने वाले नकारात्मक प्रभावों पर नियंत्रण किया जाए ताकि समाज में अव्यवस्था जैसी स्थिति उत्पन्न न हो सके।

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