आदित्य-सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का वैज्ञानिक मिशन (India՚S Mission to Study the Sun Aditya Scientist-Science and Technology)

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• आदित्य-सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला समर्पित वैज्ञानिक मिशन है।

• यह इसरों तथा देश के अन्य अग्रणी संस्थाओं के भौतिकशास्त्रियों दव्ारा एक संयुक्त पहल है।

• इस मिशन का उद्देश्य सूर्य और पृथ्वी के बीच आभामंडल कक्षा के चारों ओर एक बिंदु पर भारी उपग्रह स्थापित करना है। यह बिंदु पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है।

मिशन का महत्व

• यह सौर झंझावत की उत्पत्ति तथा यह कैसे झंझावत विकसित होते है और कौन से पथ को ग्रहण करते हैं, को समझाने में मदद करेगा।

• यह कोरोना तथा पर्यावरण पर सौर्यिक पवनों के प्रभावों को समझने में सहायता करेगा।

• इसरो आदित्य मिशन के अंतर्गत एक और अंतरिक्ष यान जोड़ेगा जो एल 5 नामक एक अलग स्थिर कक्षीय स्थिति से सूर्य का निरीक्षण करेगा।

• दो और कक्षाएँ अर्थात एल1 और एल5 को जोड़कर और अधिक स्पष्टता से अध्ययन किया जा सकेगा। पहले अमेरिका और जापान एल 1 में भेजे गए मिशन से संतोषजनक परिणाम नहीं हासिल हो पाए हैं।

एल 1, एल 5 क्या हैं?

• लैग्रान्जे बिंदु अंतरिक्ष में एक स्थान है जहाँ दो विशाल पिंडों, जैसे पृथ्वी और सूर्य या पृथ्वी और चंद्रमा का संयुक्त गुरुत्वाकर्षण बल, किसी छोटे तीसरे पिंड पर लग रहे केन्द्र प्रसारक बल के बराबर है।

• बलो का पारस्परिक प्रभाव एक संतुलन बिंदु उत्पन्न करता है जहां कोई अंतरिक्ष यान “रख” कर अवलोकन किया जा सकता है।

• इन बिन्दुओं का नाम जोसेफ लुई लैग्रान्जे, जो 18वीं सदी के गणितज्ञ थे, के नाम पर रखा गया है।

• पृथ्वी और सूर्य के बीच ऐसे 5 बिंदु हैं- एल 1, एल 2, एल 3, एल 4 और एल 5।

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