Science and Technology: New Developments in Information and Communication Technology

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सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुए नवीन विकास (New Developments in Information and Communication Technology)

  • इन्टरैक्टिव हाइटबोर्ड (Interactive Whiteboard) - छात्रों की पाठ्‌य सामग्री के साथ बेहतर संपर्क बनाने का एक उपयोगी साधन इन्टरैक्टिव हाइटबोर्ड है। इसकी सहायता से छात्र पाठ्‌य सामग्री सरलता से समझ सकते हैं। यह बोर्ड डिस्प्ले के रूप में कार्य करता है और कम्प्यूटर से जुड़ा होता है। प्रोजेक्टर के जरिए बोर्ड पर प्रोजेक्शन कराया जाता है।
    • हाइटबोर्ड का उपयोग कक्षा कार्यक्रम, कॉरपोरेट बोर्ड रूम और ब्रॉडकास्टिंग स्टूडियों में किया जाता है। इन्टरैक्टिव हाइटबोर्ड मुख्यत: 4 प्रकार के होते हैं-इंफ्रारेड स्कैन हाइटबोर्ड, रेजिस्टिव टच आधारित हाइटबोर्ड, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पेन आधारित हाइटबोर्ड और पोर्टेबल अल्ट्रासोनिक इंफ्रारेड पेन आधारित हाइटबोर्ड।
  • मोबाइल लर्निंग (Mobile Learning) -हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तकनीकों में नित्य हो रहे परिवर्तन ने मोबाइल स्मार्टफोन की आवश्यकता बढ़ायी है। ऐसा जान पड़ता है कि मोबाइल फोन में उपयोग किए जाने वाले इंटरनेट उपकरण और कम्प्यूटिंग क्षमता के प्रभावस्वरूप पर्सनल कम्प्यूटर की उपयोगिता धीरे-धीरे समाप्त होती चली जाएगी। अब कक्षा कार्यक्रम में मोबाइल फोन का उपयोग सूचनाओं के संग्रहण के लिए किया जाने लगा है। इसी प्रक्रिया को मोबाइल लर्निंग के नाम से संबोधित किया गया है।
  • फोटोनिक्स (Photonics) -प्रकाश के सृजन, उत्सर्जन, पारेषण, मॉड्‌यूलेशन, सिग्नल, प्रोसेसिंग, स्वीचिंग, आवर्द्धन (Amplification) और डिटेक्शन का अध्ययन फोटोनिक्स के तहत किया जाता है। फोटोनिक्स से तात्पर्य है कि फोटॉन न तो कण हैं और न ही तरंग। इनकी प्रकृति कण और तरंग दोनो की होती है। फोटोनिक्स का सर्वव्यापक उपयोग होता है।
    • दैनिक जीवन एवं उन्नत वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्यों में लाईट डिटेक्शन, दूरसंचार, सूचना प्रसंस्करण, लाईटिंग, मौसम विज्ञान, स्पेक्ट्रोस्कॉपी, चिकित्सा (सर्जरी, इन्डोस्कॉपी, स्वास्थ्य निरीक्षण) , सैन्य तकनीक आदि में इसका उपयोग किया जाता है।
  • साइबर बुलिंग (Cyber Bullying) - इंटरनेट और संबंद्ध तकनीकों का उपयोग लोगों को नुकसान पहुँचाने के लिए किया जाना साइबर बुलिंग कहलाता है। समाज के युवा वर्ग में इस प्रवृत्ति की बढ़ोत्तरी की रोकथाम के लिए नए कानून बनाए जा रहे हैं और जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

साइबर बुलिंग को निम्नलिखित आधार पर परिभाषित किया जाता है-

  • किसी व्यक्ति या समूह दव्ारा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों को हानि पहुँचाने के लिए करना।
  • इंटरनेट सेवा और वेब पेज जैसे मोबाईल तकनीक का उपयोग और एसएमएस टेवस्ट मेसेजिंग का उपयोग दूसरे व्यक्ति को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से करना।

साइबर बुलिंग से निपटने के लिए कानून बनाए जा रहे है। विद्यालयी में बच्चों को इससे सुरक्षित करने के लिए ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ‘बैंक ऑफ बुली’ नामक एप्लीकेशन का उपयोग किया जा रहा है। इस एप्लीकेशन का उपयोग करने वाले यदि बुलिंग का शिकार होते हैं तो ऐसे में वे त्वरित स्तर पर इस घटना की सूचना दे सकते हैं।

  • क्वाडकॉप्टर (Quad copter) -क्वाडकॉप्टर ऐसे उपकरण हैं जिनके संचालन के लिए किसी बाह्य कम्प्यूटर की आवश्यकता नहीं होती और न ही मानवीय हस्तक्षेप की। इनमें सभी आवश्यक कम्प्यूटिंग कार्य स्मार्टफोन के जरिए किए जाते हैं। क्वाडकॉप्टर छोटे आकार के वायुयान होते हैं। इनमें चार इलेक्ट्रिकल इंजन लगे होते हैं। नियंत्रण प्रणालियों का निरीक्षण करने के लिए इनका उपयोग किया जाता है। क्वाडकॉप्टर का उपयोग यह जाँचने में भी किया जाता है कि मशीन स्वत: किस प्रकार कार्य कर सकती हैं। क्वाडकॉप्टर का सबसे प्रमुख भाग स्मार्टफोन होता है। इसमें निहित कैमरे से दृश्य आँकड़ें प्राप्त होते हैं और इसका प्रोसेसर नियंत्रण केन्द्र की तरह कार्य करता है। क्वाडकॉप्टर जीपीस डाटा के स्थान पर दृश्य आँकड़ों (Visual Data) का ही उपयोग करते हैं।
    • क्वाडकॉप्टर के निम्नलिखित महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है-अग्निशमन दल किसी भवन में आग लगने पर वहाँ क्वाडकॉप्टर भेज सकते हैं और उस स्थान पर स्वयं प्रवेश करने से पूर्व वहाँ का त्रिविमीय तस्वीर प्राप्त कर सकते हैं। क्वाडकॉप्टर का उपयोग सेना दव्ारा सर्विलास कार्य में किया जाता है। बचाव एवं राहत कार्यो में भी इसकी उपयोगिता सिद्ध हुई है।

चतुर्थ पीढ़ी लैंग्वेज (Forth Generation Language)

  • यह लैंग्वेज इस उद्देश्य से डिजाइन किया जा रहा है कि सीमित या कोई भी प्रोग्रामिंग की जानकारी न रखने वाला व्यक्ति भी इन लैंग्वेजज का उपयोग कर सके। अब जावा जैसे हाई लेवल लैंग्वेज में भी यह व्यवस्था अपनायी जा रही है।
  • चतुर्थ पीढ़ी लैंग्वेज मानवीय भाषा के निकटस्थ होते हैं और बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के इनकी व्यक्ति तक सुगम पहुँच होती है। इनके जरिए बहुगुणित साझा ऑपरेशन (Multiple Common operation) संपन्न किए जाते हैं। मशीन लैंग्वेज (प्रथम पीढ़ी के लैंग्वेज) , एसेम्बली लैंग्वेज (दव्तीय पीढ़ी के लैंग्वेज) और हाई लेवल लैंग्वेज (तृतीय पीढ़ी के लैंग्वेज) की अपेक्षा चतुर्थ पीढ़ी के लैंग्वेज अधिक सुबोध हैं।

चतुर्थ पीढ़ी के लैंग्वेज चार प्रकार के होते हैं-

  • टेबल ड्राइवेन एल्गोरिदम प्रोग्रामिंग (Table Driven Algorithm Programming)
  • रिपोर्ट जेनरेटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Report Generator Programming Language)
  • डाटा मैनेजमेंट (Data Management)
  • फोर्थ जेनरेशन इनवायरमेंट (Fourth Generator Environment)

चतुर्थ पीढ़ी के लैंग्वेज में (CASE- computer Aided Software Engineering) उपकरणों और विभिन्न अतिरिक्त उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

कम्प्यूटर लैंग्वेज विकास क्रम (Computer Language Development Sequence)

Computer Language Development Sequence
फॉरट्रान (1957)कोबोल (COBOL) (1959)
बेसिक (BASIC) (1964)सी (C) (1969)
पास्कल (PASCAL) (1970)C ++ (1983)
पर्ल (PERL) (1987)पाइथन (PYTHON) (1991)
रूबी (RUBY) (1993)पीएचपी (PHP) (1995)
जावा (JAVA) (1995)जवास्क्रिप्ट (JAVASCRIPT) (1995)
रूबी ऑन रेल्स (RUBY ON RAILS) (2005)
  • इन्टिग्रेटेड सर्विसेज डिजीटल नेटवर्क (ISDN) -यह ध्वनि, वीडियो, डाटा और अन्य नेटवर्क सेवाओं के डिजिटल पारेषण के लिए उपयोग में लाया जाने वाला संचार समुच्चय है। इसके उपयोग से साफ आवाज और उच्च गुणवत्ता वाली सुविधा प्राप्त होती है। आईएसडीएन में टेलीफोनी पारेषण लाइन के अंतर्गत ही ध्वनि और आँकड़े एकीकृत किए जाते हैं।
    • आईएसडीएन प्रसारण लज्ञइनें सर्किट स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क प्रणाली के माध्यम से कार्य करती है। यह पैकेट स्विच्ड नेटवर्क की सुविधा भी देता है।
    • जिन उपभोक्ताओं के पास आईएसडीएन एडैप्टर होता है वे टेलीफोन मोडेम दव्ारा प्राप्त किए जाने वाले अधिकतम 556 केबीपीए वेब पेज की तुलना में इसके दव्ारा 128 केबीपीएस वेब पेज की सुविधा ले सकते हैं।
    • उल्लेखनीय है कि आईएसडीएन में एनालॉग डाटा या वॉयस डाटा (Voice Data) को एक ही नेटवर्क में डिजिटल डाटा के साथ जोड़ा जाता है। पारेषण के दोनों किनारों पर आईएसडीएन एडैप्टर लगाया जाता है।
    • आईएसडीएन सेवा मुख्यत: दो स्तरों पर संचालित की जाती है- बेसिक रेट इन्टरफेस (Base Rate Interface: BRI) और प्राथमिक रेट इन्टरफेस (Primary Rate Interface: PRI) का उपयोग प्राय: घरेलू और छोटे उद्यम स्तर पर किया जाता है जबकि PRI का उपयोग व्यापक संदर्भ में होता है। इन दोनों में बीचैनल और डीचैनल का उपयोग किया जाता है।
    • बी-चैनल: बी-चैनल या बीयरर चैनल के जरिए प्रमुख आँकड़ों का वहन किया जाता है। BRI में 64 केबीपीएस के दो बी-चैनल होते हैं। अत: BRI उपभोक्ता 128 केबीपीएस गति की सेवा प्राप्त कर सकता है। पुन: PRI में 23 बी-चैनल होते हैं।
    • डी-चैनल: इसे डेल्टा चैनल कहते हैं। इसके तहत सूचनाओं पर नियंत्रण किया जाता है और सूचनाओं से संबंद्ध सिग्नल भेजा जाता है। BRI में 16 केबीपीएस का एक डी-चैनल होता है। PRI में 64 केबीपीएस का एक डी-चैनल होता है।

आईएसडीएन में जहाँ एनालॉग पारेषण के लिए डिजाइन किए गए माध्यम से आँकड़े एकीकृत किए जाते हैं वहीं ब्रॉडबैंड में फाइबर ऑप्टिक और रेडियो मीडिया का उपयोग कर ये आँकड़े एकत्रित किए जाते हैं। ब्रॉडबैंड आईएसडीएन में हाई स्पीड डाटा के लिए ‘फ्रेम रिले’ सेवा का उपयोग किया जाता है। ब्रॉडबैंड आईएसडीएन के जरिए 2 एमबीपीएस से लेकर कहीं अधिक दर तक पारेषण किया जा सकता है।

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