Science and Technology: Intellectual Property Rights and World Trade Organization

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बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights)

किसी व्यक्ति या व्यक्तियों दव्ारा किए गए किसी सृजन के मद्देनजर उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों को प्रदान किए गए अधिकार बौद्धिक संपदा अधिकार कहलाते हैं। इस अधिकार से यह आशय है कि वह व्यक्ति या वे व्यक्ति स्वयं दव्ारा किए गए सृजन का एक निश्चित समय एक विशिष्ट उपयोग करने के अधिकारी होते हैं।

बौद्धिक संपदा अधिकार को सामान्यत: दो भागों में विभाजित किया जाता है-

  • कॉपीराइट एवं संबंद्ध अधिकार
  • औद्योगिक संपदा

कॉपीराइट-किसी साहित्यिक कृति अथवा कलाकृति (जैसे पुस्तकें एवं लेखन कार्य, संगीतमय कृति, पेंटिंग, मूर्तिकला, कम्प्यूटर प्रोग्राम एवं फिल्म) को लेखक/निर्माता की मृत्यु के न्यूनतम 50 वर्ष बाद एक कॉपीराइट दव्ारा संरक्षित किया जाता है। कॉपीराइट एवं संबंद्ध अधिकारों के जरिए कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ताओं (जैसे अभिनेता, गायक एवं संगीतकार) , साउंड रिकॉर्डिंगकर्ता और ब्रॉडकांस्टिंग संगठनों के अधिकारों को भी संरक्षित किया जाता है। कॉपीराइट और संबंद्ध अधिकारों दव्ारा संरक्षण का सामाजिक उद्देश्य सृजनात्मक कार्यों को प्रोत्साहित करना और पुरस्कृत करना है।

औद्योगिक संपदा को मुख्यत: दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-

  • विशिष्ट चिन्ह जैसे ट्रेडमार्क जोकि किसी एक व्यवसाय की वस्तुओं और सेवाओं को दूसरे व्यवसाय की वस्तुओं और सेवाओं से अलग करते हैं और भौगोलिक सूंचकांक जो किसी वस्तु के मूल उत्पादन स्थान को दर्शाता है और उस स्थान की विशिष्ट भौगोलिक दशाओं का संबंध उस वस्तु के साथ स्थापित करता है। ऐसे विशिष्ट चिन्हों के संरक्षण का उद्देश्य न्यायपूर्ण प्रतिपर्द्धा को प्रोत्साहित करना और इसे बनाए रखना तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षा प्रदान करना होता है जिससे उनके पास विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के बीच विकल्प चुनने का अवसर होता है। यह संरक्षण अनिश्चित काल के लिए दिया जा सकता है।
  • औद्योगिक संपदा के इस प्रकार में आविष्कार (जिन्हें पेटेंट दव्ारा संरक्षण दिया जाता है) , औद्योगिक डिजाइन और ट्रेड सेक्रेट रखे जाते हैं।
    • इस संरक्षण का सामाजिक उद्देश्य नवीन तकनीक के विकास में निवेश को प्रोत्साहित करना है। इसके जरिए निश्चित अवधि तक संरक्षण प्रदान किया जाता है (पेटेंट 20 वर्षों के लिए दिए जाते हैं)
    • उल्लेखनीय है कि देशज और स्थानीय स्तर पर किए गए नवाचार और सृजनात्मक कार्य भी बौद्धिक संपदा के अंतर्गत माने जाते हैं लेकिन चूँकि ये पारंपरिक प्रकृति के समझे जाते हैं इसलिए इन्हें पूरी तरह बौद्धिक संपदा प्रणाली दव्ारा संरक्षण नहीं मिल पाता है।
    • बौद्धिक संपदा के अंतर्गत सूचनाओं और जानकारियों से संबंद्ध वैसे विषय सम्मिलित किए जाते हैं जो पूरे विश्व में किसी भी स्थान पर एक ही समय में असीमित प्रतियों में रूपांतरित किए जा सकते हों। संपंदा संरक्षण उन प्रतियों से संबंद्ध नहीं होता है बल्कि उनमें निहित सूचना या जानकारी से संबंद्ध होता है।

वाइपो (WIPO) ने बौद्धिक संपदा को निम्नलिखित रूप में श्रेणीबद्ध किया गया है-

  • साहित्यिक, कलात्मक और वैज्ञानिक कृत्य।
  • कलाकारों, फोनोग्राम और प्रसारण का प्रदर्शन/उपलब्धियाँ।
  • मानव उद्यम के सभी क्षेत्रों के आविष्कार।
  • वैज्ञानिक खोज
  • औद्योगिक डिज़ाइन
  • ट्रेडमार्क, सर्विस मार्क और वाणिज्यिक नाम और डिजाइनीकरण।
  • अन्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा के विरुद्ध संरक्षण

उपरोक्त में से (i) श्रेणी और श्रेणी (ii) को कॉपीराइट तथा संबंद्ध अधिकारों के अंतर्गत रखा गया है जबकि श्रेणी (iii) से श्रेणी (vii) को औद्योगिक संपदा के अंतर्गत रखा गया है।

विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization)

  • विश्व व्यापार संगठन विभिन्न राष्ट्रों के बीच व्यापार के वैश्विक नियमों की व्याख्या करता है। इस संगठन के अंतर्गत व्यापार से संबंद्ध बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण के लिए ट्रिप्स (TRIPS) व्यवस्था बनाई गई। ट्रिप्स का तात्पर्य हैं- ट्रेड रिलेटेड ऐस्पेक्ट्‌स ऑफ इन्टलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट्‌स। इससे संदर्भित समझौता 1986 - 94 के उरूग्वे दौर में किया गया। ट्रिप्स के जरिए पहली बार बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में बौद्धिक संपदा नियमों को सम्मिलित किया गया। व्यापार के अंतर्गत केवल वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार नहीं आता है बल्कि विचारों और ज्ञान को भी व्यापार का महत्वपूर्ण अंग माना जाने लगा है। नई औषधियों और अन्य उन्नत तकनीकों से निर्मित उत्पाद आविष्कार, नवाचार, शोध, डिजाइन और परीक्षण से संबंद्ध होते हैं। फिल्म, म्यूजिक रिकॉर्डिंग, पुस्तकों, कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर एवं ऑन-लाइन सेवाओं का क्रय-विक्रय इनमें निहित सूचनाओं और सृजनात्मकता के कारण ही होता है। कई ऐसे उत्पाद जिनका व्यापार निम्न तकनीक युक्त वस्तुओं और उपभोग सामग्रियों के रूप में किया जाता था अब उनमें आविष्कार और डिजाइन का बेहतर अनुपात होने से विशिष्ट होने लगे हैं। ब्रांडेड कपड़े और पौधों के नवीन किस्म ऐसे ही उत्पाद हैं।
  • बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण और इन्हें लागू करने से संबंधित प्रावधान पूरे विश्व में भिन्नता रखते थे। ‘बौद्धिक संपदा’ व्यापार का एक महत्वपूर्ण अंग होने के कारण यह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक जगत में तनाव का एक कारण बन गया। अत: बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंद्ध एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्वीकृत व्यापारिक नियमों की आवश्यकता महसूस की गई। इसका उद्देश्य था कि बौद्धिक अधिकारों से संबंद्ध प्रावधानों को नियमित किए जाए तथा किसी प्रकार के विवाद को निपटाने का उपाय हो।
  • इन्हीं परिप्रेक्ष्यों में ट्रिप्स समझौतों लाया गया ताकि पूरे विश्व में बौद्धिक संपदा अधिकारों को न्यायपूर्ण संरक्षण मिल सके। साथ ही इन अधिकारों को एक समान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लाया जाए। समझौते के तहत प्रत्येक सरकार दव्ारा सहयोगी डब्ल्यूटीओ सदस्यों के बौद्धिक संपदा को न्यूनतम संरक्षण दिया जाना होता है।
  • समाज दीर्घावधिक स्तर पर तभी लाभान्वित होता है जब बौद्धिक संपदा संरक्षण से सृजन और आविष्कार को प्रोत्साहन मिलता है विशेषकर तब जबकि संरक्षण की अवधि समाप्त हो जाती है और आविष्कार सार्वजनिक परिदृश्य में सामने आता है।

बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंद्ध व्यापार विवादों को दूर करने के लिए अब विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत विवाद निपटान प्रणाली की व्यवस्था की गई है। ट्रिप्स समझौते में पाँच मुख्य बिन्दुओं को समाहित किया गया है-

  • व्यापार व्यवस्था के मौलिक सिद्धांतों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा समझौतों को किस प्रकार लागू किया जाना चाहिए।
  • बौद्धिक संपदा अधिकारों को पर्याप्त संरक्षण किस प्रकार दिया जाए।
  • विभिन्न देश अपने भौगोलिक क्षेत्र में उन अधिकारों को किस प्रकार लागू करें।
  • डब्ल्यूटीओं के सदस्य देशों के बीच बौद्धिक संपदा विवादों का निपटारा कैसे किया जाए।
  • नई व्यवस्था प्रारंभ होने की अवधि के दौरान विशेष संक्रमणकालीन व्यवस्था किया जाना।

ट्रिप्स समझौते में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह भी निहित है कि बौद्धिक संपदा संरक्षण तकनीकी नवाचार और तकनीकी स्थानांतरण दोनों स्तरों पर प्रदान किए जाएंगे। समझौते के अनुसार, उत्पादकों और उपयोगकर्ताओं दोनों को लाभान्वित होना चाहिए और आर्थिक-सामाजिक कल्याण को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

  • ट्रिप्स समझौते के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि बर्न अधिवेशन के मद्देनजर कम्प्यूटर कार्यक्रमों को साहित्यिक कृत्य के रूप में समझा जाएगा। इसमें यह भी निहित है कि डाटाबेस को किस प्रकार संरक्षित किया जाए।
  • समझौते के अनुसार आविष्कारों के लिए पेटेंट संरक्षण न्यूनतम 20 वर्षों का होना चाहिए। यह भी कहा गया है कि लगभग तकनीक के सभी क्षेत्रों में उत्पादों और प्रक्रियाओं को पेटेंट संरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। यदि लोक व्यवस्था या नैतिकता के मद्देनजर किसी पेटेंट के वाणिज्यिक दोहन को निषेधित किया जाता है तो सरकार पेटेंट जारी करने को अस्वीकृत कर सकती है।
  • समझौते के तहत पेटेंट धारक दव्ारा उपयोग किए जाने वाले न्यूनतम अधिकारों का उल्लेख किया गया है। लेकिन इसके भी कुछ अपवाद हैं। जैसे यदि वह अपने उत्पाद को बाजार में आपूर्ति करने में विफल रहता है तो उसके पेटेंट अधिकार वापस लिए जा सकते हैं। समझौते में कहा गया है कि सरकार ‘अनिवार्य लाइसेंस’ जारी कर दूसरे प्रतिस्पर्धी को उस उत्पाद के उत्पादन की अनुमति दे सकती हैं। परन्तु इसके लिए कुछ शर्ते लगाई जाती हैं ताकि पेटेंट धारक के वैधानिक हित सुरक्षित रहें।
  • उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व यह मुद्दा चर्चा में रहा कि निर्धन देशों में लोगों को पेटेंट संरक्षण प्राप्त दवाओं का वितरण किस प्रकार किया जाए। साथ ही पेटेंट धारकों के शोध एवं दवा विकास को भी प्रोत्साहित किया जाए। अत: नवंबर, 2001 में दोहा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में एक विशेष घोषणा की गई कि ट्रिप्स समझौते के जरिए सदस्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों में अवरोध उत्पन्न नहीं किया जाए। इसके अतिरिक्त अल्प विकसित देशों के लिए दवाआंे पर पेटेंट संरक्षण से वर्ष 2016 तक छूट दे दी गईं
  • पुन: गत 11 जून को विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों ने इस बात की अनुमति दी कि ट्रिप्स समझौते के मद्देनजर अल्प विकसित देशों को बौद्धिक संपदा संरक्षण 2021 तक प्रदान किया जाए।
  • इस दो दिवसीय सम्मेलन में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई जैसे-बौद्धिक संपदा और हरित तकनीक के बीच संबंध, लागत प्रभावी नवाचार।
  • बौद्धिक संपदा और हरित तकनीक पर इक्वेडोर ने एक दस्तावेज भी प्रस्तुत किया जिसमें यह उल्लेख था कि क्या बौद्धिक संपदा संरक्षण पर्यावरण हितैषी तकनीकों के विकास और उनके उपयोग के हित में है या इनके विकास में अवरोध उत्पन्न करता है। इस दस्तावेज के माध्यम से सदस्य देशों से यह समीक्षा करने की अपील की गई है कि क्या बौद्धिक संपदा संरक्षण तकनीक हस्तांतरण में रूकावट उत्पन्न करता है और हरित तकनीकों को और अधिक व्ययसाध्य बनाता है। इसमें यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि ट्रिप्स समझौते में संशोधन कर हरित तकनीकों पर लागू होने वाले पेटेंट की समय सीमा को कम किया जाए।
  • इन प्रस्तावों को क्यूबा, इंडोनेशिया, चीन, बोलीविया, भारत, बांग्लादेश, नेपाल, रवांडा और ब्राजील ने अपना समर्थन दिया है। हालाँकि कुछेक विकसित देशों जैसे अमेरिका, जापान, यूरोपीय यूनियन, स्विट्‌जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने विरोध जताते हुए कहा है कि बौद्धिक संपदा संरक्षण पर्यावरण हितैषी तकनीकों के विकास और तकनीकी हस्तांतरण को प्रोत्साहित करता है।
  • दूसरी ओर सऊद अरब ने अभिमत दिया कि जलवायु परिवर्तन पर चर्चा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और विश्व व्यापार संगठन के व्यापार एवं पर्यावरण समिति जैसे मंचों पर होनी चाहिए न कि ट्रिप्स परिषद में।

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