पारे पर मिनिमाता कर्न्वेंशन (रूप परिवर्तन) (Minamata Convention on Mercury – Science and Technology)

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यह कर्न्वेशन सरकारी पक्षों को विस्तृत कार्रवाइयाँ करने हेतु बाध्य करती है, जिसमें वायु में पारे के उत्सर्जन को नियंत्रित करना और पारायुक्त कुछ निश्चित उत्पादों का उपयोग चरणबद्ध रूप से समाप्त करना सम्मिलित है।

पारा प्रदूषण

स्रोत

§ ऊर्जा और ताप के लिए कोयले का दहन पारे का प्रमुख स्त्रोत है।

§ पारा अनेक उत्पादों में पाया जाता है जिनमें बैटरियाँ, मापने के उपकरण जैसे कि थर्मोमीटर (तापमानी) , बैरोमीटर (दाबमापी) , बिजली उपकरण जैसे स्विच और रिले, लैम्प (जिनमें कुछ प्रकार के बिजली के बल्ब शामिल हैं) , दाँतो में भरी जाने वाली मिश्र धातु, त्वचा को चमकदार बनाने वाले उत्पाद और अन्य प्रसाधन सामग्रियाँ और औषधियाँ सम्मिलित हैं।

प्रभाव

§ पारे का थोड़ा-बहुत संपर्क भी गंभीर स्वास्थ्य समस्यायें उत्पन्न कर सकता है। यह गर्भावस्था और जीवन के आरंभिक वर्षों में शिशु के विकास के लिए एक खतरा है।

§ पारा तंत्रिका तंत्र, पाचन तंत्र और प्रतिरक्षा तंत्रों तथा फेफड़ों, गुर्दो, त्वचा और आँखों को हानि पहुँचा सकता है।

§ इसके प्रभाव से त्वचा पर चकत्ते और त्वचाशोथ (डर्मेटाइटिस) : मनोदशा का अचानक परिवर्तन (मूड स्विंग) , स्मृति नाश: मानसिक व्यवधान: और मांसपेशियों की कमजोरी आदि जैसी स्वास्थ्य समस्यायें उत्पन्न हो सकती हैं।

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