Science and Technology: New Defence Procurement Policy-2013

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प्रतिरक्षा प्रौद्योगिकी (Defense Technology)

नई रक्षा खरीद नीति-2013 (New Defence Procurement Policy-2013)

देश के दव्ारा रक्षा मंत्रालय ने नई रक्षा खरीद नीति-2013 लागू किया है। इस नीति का उद्देश्य बढ़ती पूंजी अधिप्राप्तियों (Procurement) की प्रतिस्पर्द्धी आवश्यकताओं को संतुलित करना, एक सुदृढ़ स्वदेशी रक्षा प्रक्षेत्र विकसित करना और पारदर्शिता, जाँच तथा लोक जवाबदेही के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करना है। साथ ही इसमें स्वदेशीकरण पर बल दिया गया है।

डीपीपी; क्च्च्द्ध-2013 की विशेषताएँ (DPP 2013 Features)

  • प्रथम प्रमुख परिवर्तन वरीयतायुक्त श्रेणीकरण (Preferred Categorize) के रूप में किया गया है। यह श्रेणीकरण निम्नलिखित क्रम में किया जाना है-खरीद (भारतीय) , बनाना (भारतीय) , खरीदना और बनाना, खरीदना (वैश्विक) । किसी खास श्रेणी में ‘आवश्यकता के समझौते’ (Accord of Necessity Aon) की स्वीकृति के मद्देनजर दूसरे उच्च प्राथमिकता वाले श्रेणियों पर विचार न करने का कारण सिद्ध करना आवश्यक हो जाएगा। इस शर्त के कारण स्वदेशीकरण के मत को मजबूती मिलेगी।
  • इसके अतिरिक्त निर्धारित किए गए स्वदेशी सामग्रियों की आवश्यकता को समग्र कीमत आधार (Overall Price Base) पर प्राप्त किया जाना है। साथ ही मूलभूत उपकरण, निर्माता दव्ारा परामर्शित कल- पुर्जे, विशेष औजार सामग्री और जाँच उपकरण जैसे महत्वपूर्ण सामग्रियों की पूर्ति भी समग्र कीमत आधार पर होगी।
  • पुन: सभी चरणों में मूलभूत उपकरण में स्वदेशी सामग्री की मात्रा न्यूनतम 30 प्रतिशत होगी। इसे भी रेखांकित किया गया है कि स्वदेशीकरण योजना विक्रेता दव्ारा प्रदान की जाएगी।
  • ऐसी अपेक्षाएँ स्वदेशीकरण की ओर अधिक अर्थपूर्ण प्रयास सुनिश्चित करेंगी। जहाँ एक ओर यह प्रावधान किया गया है कि किसी चरण में अपेक्षित स्वदेशी सामग्री उपलब्ध न कराएं जाने पर दंड दिया जाएगा वहीं बाद के चरणों में कमियों को पूरा करने के लिए उचित उपाय का भी प्रावधान किया गया है।
  • सेवा पूंजी अधिग्रहण योजना श्रेणीकरण उच्चतर समिति (Services Capital Acquisition Plan Categorization Higher Committee: SCAPCHC) के प्रत्यायोजन शक्ति के स्तर पर खरीद मामलों को और तेज करने की अपेक्षा की गयी है। यह 50 करोड़ से बढ़कर 150 करोड़ रुपये होगा तथा DPB की क्षमता 150 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 करोड़ रूपये किया जाएगा। स्वदेशीकरण के संदर्भ में ‘खरीद और बनाना’ (भारतीय) तथा निर्माण प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता होगी। नवीन नीति में यह प्रावधान भी किया गया है कि सैन्य सामग्री व्यापार के समय अग्रिम स्तर पर ही तकनीकी अपेक्षाएँ निर्धारित कर दी जाएगी। इन्हें परिवर्तित नहीं किया जाएगा। अब आवश्यकता की स्वीकृत (Acceptance of Necessity Stage) चरण से पहले ही सेवा गुणवत्तायुक्त आवश्यकताएँ स्थिर कर दी जाएगी। इससे भविष्य में रक्षा व्यापार में संभावित घोटालों को रोकने में मदद मिलेगी।
  • निर्देश (NIRDESH) -इसका पूर्ण नाम ‘नेशनल इंस्टीट्‌यूट फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इन शीप बिल्डिंग’ है। इस इंस्टीट्‌यूट की स्थापना कोझीकोड़ के चालियाम में की गई है। इस संस्थान ने जून 2013 से कार्य करना आरंभ कर दिया है। यह संस्थान केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त सोसाइटी दव्ारा अभिशासित होता है। इस संस्थान में शोध विकास, युद्धपोत (Warship) एवं पनडुब्बी निर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण कार्य संचालित किए जाएंगे। ‘निर्देश’ के क्रियाकलापों से सर्वाधिक लाभ भारतीय नौ सेना को होगा।

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