Science and Technology: Serving Satellite and Satellite under Development

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स्चाांर, नौवहन/नौसंचालन तथा मौसमविज्ञानीय उपग्रह प्रणाली (Communication and Meteorological Satellite System)

सेवारत उपग्रह (Serving Satellite)

जीसैट-12 (GSAT – 12)

जीसैट-12 उपग्रह को 12 विस्तारित सी बैंड एसएसपीए आधारित प्रेषानुकारों के साथ आई-1 के. बस के चारों ओर संरूपित किया गया। 15 जुलाई 2011 को पीएसएलवी सी-17 दव्ारा 1410 कि. ग्रा. के उत्थान भार के साथ उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया। उपग्रह को 8 साल की मिशन कलावधि के लिए अभिकल्पिक किया गया है और 830 पूर्व देशांतर में स्थापित किया गया है। नीतभार का कक्षीय परीक्षण पूर्ण कर उपग्रह को प्रचालित घोषित किया गया है।

विकासाधीन उपग्रह (Satellite under Development)

इन्सैट-3 डी (Inset - 3D)

6 चैनल प्रतिबिंबित्र और 19 चैनल ध्वनित्र नीतभार के साथ इन्सैट-3 डी एक अत्याधुनिक मौसमविज्ञानीय उपग्रह है। उपग्रह को 965 कि. ग्रा. के शुष्क द्रव्यमान और 2100 कि. ग्रा. के उत्थान भार के साथ आई-2 के प्लेटफार्म के चारों ओर स्थापित किया गया है, जिसकी मिशन कलावधि लगभग सात साल है। उपग्रह को भू-स्थिर कक्षा में 820 पू. देशांतर पर स्ाापित किया जाएगा। उपग्रह में कई नए तत्व हैं जैसे कि भू-स्थिर पृथ्वी कक्षा (जीईओ) में प्रथम बार प्रवाहित तारक संवेदक, उपग्रह के दूरसंदेश/दूरमिति कार्य को कम करने के लिए सूक्ष्म सोपान सौर व्यूह चालन कोडांतरण (एसएडीए) । मौसमविज्ञानीय नीतभारों के निष्पादन में सुधार लाने हेतु इसमें दव्वार्षिक घूर्णन और प्रतिबिंब एवं दर्पण गति पूर्ति के नए लक्षणों को भी शामिल किया गया है। सभी उप प्रणाली पैकेजों, दोनो मौसमविज्ञानीय और संचार नीतभारों को कार्यान्वित किया गया है। उपग्रह का समुच्चयन, समेकन तथा जाँच प्रगति पर है। उपग्रह को 2013 की दूसरी तिमाही के दौरान प्रमोचन हेतु प्रेषण के लिए तैयार किया जाएगा।

जीसैट-7 (GSAT – 7)

जीसैट-7 का परिचिंतन एक बहुबैंड उपग्रह के रूप में किया गया है जो कि यूएचएफ, एस-बैंड, सी-बैंड और के. यू. बैंड नीतभारों को वहन करेगा। उपग्रह लगभग 2600 वाट की शक्ति क्षमता और 2550 कि. ग्रा. के उत्थान द्रव्यमान के साथ 2.5 टन बस प्लेटफार्म मानक के नियोजन का प्रयोग करता है। सभी मुख्य ढाँचा अवयवों और नीतभार अवयवों को सुपुर्द किया गया है। 2012 की दूसरी तिमाही के दौरान प्रमोचन प्रेषण के लिए उपग्रह तैयार हो जाएगा।

जीसैट-10 (GSAT – 10)

जीसैट-10 इसरों के 3 टन संरचना आधारित है जो कि एक 3 कक्षीय निकाय स्थायी भूस्थिर उपग्रह आधारित संचार सेवाएं/ विद्यमान सेवाओं में संवर्धन को उपलब्ध कराते है। यह गगन नीतभार के साथ 12 सामान्य सी बैंड, 6 विस्तारित सी बैंड, 12 के. यू. बैंड प्रेषानुकारों का वहन करता हैं। उपग्रह का उत्थान द्रव्यमान 3400 कि. ग्रा. है और यह 6.0 कि. वा. की शक्ति जनित करता है। उपग्रह को 830 पू. पर स्थापित किया जाएगा और इसकी प्रचालनात्मक अवधि 15 साल होगी। सभी समेकित जाँच पूरा होने के बाद, उपग्रह तापीय निवात जाँच के अधीन है। यह उपग्रह 2012 की दूसरी तिमाही के दौरान प्रमोचन हेतु तैयार होगा।

जीसैट-6 (GSAT – 6)

सी x एक्स और एक्स x सी प्रेषानुकारों के साथ 2200 कि. ग्रा. के उत्थापन भार सहित उपग्रह को प्राथमिक रूप से संरूपित किया गया है। एस- बैंड में अपलिंक और डाउनलिंक में उच्च जी/टी तथा प्रभावी समस्थानिक विकीर्णित ऊर्जा है। जो मोबाइल उपकरण के साथ संपर्क करने में सक्षम है। इसे पाँच उच्च ऊर्जा वाले 235 वा. के प्रगामी तरंग टयूब प्रवर्धक और स्वदेश में विकसित 6 मी. के उच्च लब्धि वाले सिमटने वाले ऐन्टेना का उपयोग कर, प्राप्त किया गया है। मुख्य ढाँचा संरचना तैयार है। नीतभार और मुख्यढाँचा उप प्रणालियाँ समुच्चयन समाकलन और परीक्षण गतिविधियों हेतु तैयार हैं। नोदन तंत्र का समाकलन पूर्ण किया गया। विसमाहारित मोड आईएसटी को शुरू किया गया। यूएफए के उड़ान मॉडल को तैयार किया गया है। अंतिम जाँच जारी है। उप प्रणाली स्तर की व्यापक अभिकल्पना की समीक्षा पूर्ण कर ली गई है। उपग्रह 2012 के अंत तक जीएसएलवी दव्ारा प्रमोचन हेतु भेजे जाने के लिए तैयार कर लिया जाएगा।

जीसैट-11 (GSAT – 11)

जीसैट-11 एक उन्नत संचार उपग्रह है, जिसमें 32 के. ए. के. यू. बैंड-अग्र लिंक प्रेषानुकर और 8 केयू. के ए. बैंड वापसी लिंक प्रेषानुकर सहित एक नई बस का नियोजन है। उपग्रह का उत्थापन द्रव्यमान 5000 कि. ग्रा. है और लगभग 14कि. वा की ऊर्जा संचालन क्षमता है। उपप्रणाली स्तर प्रारंभिक अभिकल्पना समीक्षा पूर्ण कर ली गई है। उपग्रह स्तर के पीडीआर को शीघ्र शुरू किए जाने की योजना है। जीसैट-11 में समाविष्ट सभी नए अवयवों के लिए अर्हता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। 2013 की अंतिम तिमाही के दौरान जीसैट-11 उपग्रह को प्रक्षेपण के लिए भेजा जाएगा।

जीसैट-9 (GSAT – 9)

  • प्रयोक्ता समुदाय की केयू. -बैंड प्रेषानुकर की बढ़ती मांग के कारण जीसैट-9 उपग्रह को विशिष्ट रूप से उच्च शक्ति के. के. यू. बैंड नीतभार से संरूपित किया गया है। उपग्रह में 12केयू बैंड प्रेषानुकर उपलब्ध है, जिसमें 12 विकिरणी रूप से शीतलित 140 वा. प्रगामी तरंग नलिका प्रवर्धक है जो भारतीय मुख्यभूमि और के. यू बैंड बीकन प्रेषत्र को आवरित करते हैं। उपग्रह का उत्थापन द्रव्यमान 2113 कि. ग्रा. है और यह 2787 वाट की शक्ति उत्पन्न करता है। उपग्रह को जीएसओ में 480 पूर्व देशांतर पर स्ाापित किया जाएगा।
  • उपग्रह के अभिन्यास का अध्ययन किया जा रहा है। जीएसएलवी मार्क- 2के उपग्रह की तैयारी हेतु प्रमोचन का 2013 की तीसरी तिमाही के लिए निर्धारित है।

जीसैट-14 (GSAT – 14)

  • जीसैट-14 उपग्रह एक संचार उपग्रह है (आई-2 के. बस पर आधारित) जो जीएलएलवी की दूसरी विकासात्मक उड़ान के युगपत नीतभार के रूप में अभिकल्पित हैं यह उपग्रह 2012 के मध्य में प्रमोचन हेतु निर्धारित है। इस उपग्रह को 740 पूर्व देशांतर में स्थापित किया जाएगा और इसका मिशल काल 11 साल का होगा। जीसैट-14 में 6राष्ट्रीय आवरण वाले के यू बैंड चैनल और भारत का आवृत्त करने वाले 6 विस्तारित सी बैंड चैनल होंगे। इसके अतिरिक्त उपग्रह में दो के. ए. बैंड बीकन होंगे जो 20 और 30 गी. ह. संकेतों का प्रसारण करेंगे जिनका प्रयोग के ए. बैंड के लिया किया जाएगा। साथ ही परीक्षण के तौर पर फाइबर ऑप्टिक जाइरों, सक्रिय पिक्सल सूर्य संवेदक, गोल प्रकार वोलोमीटर और क्षेत्र प्रोग्रामयोग्य गेट व्यूह (एफपीजीए) आधारित भू-संवेदक और तापीय नियंत्रण विलेपन परीक्षण आदि नई प्रौद्योगिकी हैं जिसे प्रयोग के रूप में भेजा जाना हैं।
  • उपग्रह का उत्थापन द्रव्यमान 2020 कि. ग्रा. के लगभग है और लगभग 2.6 कि. वा. की शक्ति को पैदा करता है। यह आयोजन किया गया है कि वर्तमान संरचना तथा पूर्व की परियोजनाओं के लिए प्राप्त किए गए कई यांत्रिक तथा वैद्युत उपकरणों का प्रयोग किया जाए। विभिन्न उप प्रणालियों से संबंधित अभिकल्पना समीक्षा पूर्ण की गई है। सभी उपप्रणालियों को तैयार करने का कार्य संतोषजनकपूर्ण रूप से चल रहा है।

उपग्रह नौसंचालन कार्यक्रम (Satellite Operation Program)

उपग्रह नौसंचालन (सैटनव) को विभाग की एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में निर्धारत किया गया है। इसरो और भारत विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से जीपीएस आधारित भू-संवर्धित नौसंचालन (गगन) प्रौद्योगिकी प्रदर्शन प्रणाली को भारतीय वांतरिक्ष में प्रचालनात्मक उपग्रह आधारित संवर्धन प्रणाली के अग्रगामी प्रचालनात्मक के रूप में शुरू किया है। देश में वर्तमान में हमारे वाणिज्य तथा अन्य संस्थाओं दव्ारा प्रयोग में लाये जा रही वर्तमान वैश्विक सैटनव प्रणाली के लिए पूरक व्यवस्था के अतिरिक्त गगन के प्रचालनात्मक चरण में क्रांतिक राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्वदेशी तौर पर विकसित उपग्रह नौसंचालन प्रणाली हैं उपर्युक्त गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने और क्रियान्वित करने के लिए उपग्रह नौसंचालन कार्यक्रम गठित किया गया था। सैटनव कार्यक्रम को विभिन्न इसरो केन्द्रों में क्रियान्वित करने के लिए संगठनात्मक संरचना का निर्माण किया गया है और गगन टीडीएस तथा एफओपी एवं भारतीय प्रादेशिक नौवहन उपग्रह प्रणाली जैसे क्रियाकलाप इस कार्यक्रम के भाग होंगे। सैटनव कार्यक्रम की गतिविधियों के लिए आईजेक को अग्रणी केन्द्र के रूप में निर्दिष्ट किया गया है।

गगन (Gagan)

  • जीसैट-8 उपग्रह के सफलतापूर्वक प्रमोचन के साथ, भू-खंड का वैधीकरण (मिशन नियंत्रण केन्द्र, संदर्भ स्टेशनों, अपलिंक स्टेशनों और भू-नेटवर्क) प्रगति पर है। शीघ्र ही प्रणाली की फाइन टयूनिंग पूर्ण कर ली जाएगी और प्रणाली की फाइन टयूनिंग के पश्चात्‌ तुरंत ही प्रयोक्ता इस सेवा को उपयोग कर सकेंगे। भारतीय प्रादेशिक नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) भारतीय प्रादेशिक नौवहन उपग्रह प्रणाली एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह प्रणाली है। इसकी अभिकल्पना भारत के ऊपर तथा भारत के आसपास के 1500 कि. मी. तक के क्षेत्र में दस मीटर से भी बेहतर स्थान निर्धारण परिशुद्धता उपलब्ध कराना है। इसकी अभिकल्पना गगन प्रणाली का वास्तु दृश्य 30 सभी मौसम की परिस्थितियों के अंतर्गत प्रयोक्ताओं को विविध प्लेटफार्मो से सेवा परिशुद्ध वास्तविक समय स्थिति, नौसंचालन और समय (पीएनटी) की सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए की गई है। आईआरएनएसएस प्रणाली के मुख्य रूप से तीन घटक हैं-जैसे अंतरिक्ष खंड (अंतरिक्ष में उपग्रह समूह और सिग्नल) , भू खंड और प्रयोक्ता खंड। आईआरएनएसएस समूह में 7 उपग्रह हैं। 340 र्पू. 830 पू और 131.50 पू के भू-स्थिर कक्षा (जीईओ) में तीन उपग्रहों को स्थापित किया जाएगा और दो उपग्रहों में से प्रत्येक को भू-तुल्यकालिक कक्षा (जीएसओ) में भूमध्यरेखा पर 550 पू और 111.50 पू. 290 झुकाव पर स्थापित किया जाएगा। आईआरएनएसएस में एल 5 और एस बैंड दो प्रकार के सिग्नल होंगे और केन्द्र आवृत्ति 1176.45 में ह. तथा एस बैंड केन्द्र आवृत्ति 2492.028 में ह. हैं।
  • आईआरएनएसएस दो मूलभूत सेवाएं प्रदान करता है जैसे जो सामान्य नागरिक प्रयोक्ताओं को मानक स्थान निर्धारण सेवा (एसपीएस) और विशिष्ट अधिकृत प्रयोक्ताओं हेतु प्रतिबंधित सेवा (आर. एस.)

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