Science and Technology: Technical Terms Related to Internet

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इंटरनेट (Internet)

इंटरनेट स्े स्बंंध्ज्ञित त्कनीक शब्द (Technical Terms Related to Internet)

  • बैंडविड्‌थ: बैंडविड्‌थ का अर्थ है किसी निश्चित अवधि के दौरान संचारित की गई सूचना अथवा डाटा की मात्रा अर्थात यह किसी संचार माध्यम की सूचना वहन करने की क्षमता दर्शाता है। वस्तुत: बैंडविड्‌थ वह गति है जो इंटरनेट कनेक्शन देने वाली लोकल कंपनी से उपभोक्ता के कम्प्यूटर को मिलती है। ब्राडबैंड उपभोक्ता के लिए यह गति 128 केबीपीएस से लेकर 100 एमबीपीएस तक हो सकती है।
  • मोडेम: मोड्‌यूलटर-डी-मोड्‌यूलेटर अर्थात मोडेम कम्प्यूटर को बाहरी सूचना एवं दूरसंचार उपकरण से जोड़ने का कार्य करता है। इसका मुख्य कार्य बाहरी एनलॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदलना व आंतरिक डिजिटल सिग्नल को एनलॉग में बदलना है। यह सिग्नल मोड्‌यूलेशन पद्धति पर आधारित है।
  • डोमेन नेम सिस्टम: इंटरनेट दव्ारा प्रयोग होने वाले डोमेन नेम सिस्टम से कम्प्यूटर एक दूसरे की पहचान करते हैं। इंटरनेट से जुड़ने के लिए प्रत्येक कम्प्यूटर को एक अदव्तीय सांख्यिकीय लेबल या एक आईपी एड्रेस की आवश्यकता होती है। आईपी एड्रेस वैश्विक डाटाबेस में संचित स्मरणीय लेबलों अर्थात डोमेन नेम से मेल खाता है। डोमेन नेम सामान्यत: www.xxxxx.yyyy प्रारूप का अनुसरण करते है। yyy शीर्षस्तर के डोमेन से संबंधित होता है, जो या Com या Org एक देश का कोड हो सकता है। xxxx का संबंध दव्तीय स्तर के डोमेन जैसे Gov या Co या google से होता है। अतिरिक्त उप डोमनों को बायी ओर www के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
  • वेब ब्राउजर: इंटरनेट का उपयोग करने के लिए किया जाने वाला सॉफ्टवेयर वेब ब्राउजर कहलाता है। प्रत्येक वेब ब्राउजर सर्वमान्य लैंग्वेज ‘एटीएमएल’ (हाइपर टेवस्ट मार्क अप लैंग्वेज) को समझता है। ब्राउजर तकनीक में पेज को यूनीफार्म रिसोर्स लोकेटर के रूप में लोकेट किया जाता है, जिसको एड्रेस के तौर पर जाना जाता है। इसकी शुरूआत एचटीटीपी से होती है। वर्ष 1991 से शुरू हुए पहले वेब ब्राउजर ‘वर्ल्ड वाइड वेब’ के बाद मोजेक इंटरनेट एक्सप्लोरर, नेस्टकेप नेवी गेटर, ओपेरा, सफारी और क्रोम आदि प्रमुख है इसके अतिरिक्त मोबाइल ब्राउजर में अबेको, नेट, टेमर, क्यूरल, वेट मुख्य है। जबकि विशेष कार्यों के तोर पर फ्लोक, इमेज, एक्सप्लोरर, स्पेस टाइम, जैंक ब्राउजर, सिंड्रोम और सागबर्ड हैं। जहाँ फ्लोक सोशल नेटवर्किंग साइट, ब्लॉग, फोटो शेयर तकनीक को मजबूत करते हैं, वहीं स्पेस टाइम के सहयोग से इंटरनेट पर थ्री डाइमेंशनल वेब सर्च किया जा सकता है।
  • सरवर: यह एक कम्प्यूटर रनिंग सॉफ्टवेयर है, जो कई कम्प्यूटरों के बीच संसाधनों को साझा करने में मदद करता है।
  • एचटीटीपी सरवर: इंटरनेट को कनेक्ट करना।
  • मेल सरवर: नेटवर्क पर ई-मेल स्टोर और ट्रांसफर।
  • प्रॉक्सी सरवर: क्लाइट और मेन सरवर के बीच स्थापित सरवर, जो की फिल्टर करने और कनेक्शन शेयरिंग में मदद करता है।
  • ब्लॉग: किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के निजी वेब पेज को ब्लॉग कहा जाता है। इसका निर्माण आमतौर पर निजी विचार व्यक्त करने या अपनी रूचि के विषयों पर टिप्पणी करने के लिए किया जाता है।
  • वाई-फाई: वाई-फाई अर्थात वायरलैस फिडलिटी एक प्रचलित वायरलेस आधारित तकनीक है, जिसका उपयोग होम नेटवर्क, मोबाइल और वीडियोगेम्स में होता है। इस तकनीक दव्ारा तार रहित इंटरनेट से जुड़कर पूरी दुनिया में नेट सर्फिंग की जा सकती है। यह तकनीक सामान्यत: सभी ऑपरेटिंग प्रणालियों को सपोर्ट करती है। वाई-फाई एरिया ओपन और क्लोज दो तरीकों का होता हैं। ओपन वाई-फाई का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है। वही क्लोज्ड का इस्तेमाल करने के लिए पासवर्ड की दरकार होती है। वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से नेटवर्क कार्ड वाले कम्प्यूटर, वायरलेस रूटर से जुड़े होते हैं। रूटर, इंटरनेट से मोडम दव्ारा जुड़े होते हैं। वाई-फाई में इन्फॉरमेंशन के आदान प्रदान के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। जब रेडियो फ्रीक्वेंसी धारा की सप्लाई एंटीना में की जाती है तो इससे विद्युत चुंबकीय क्षेत्र बनता है। जिस इलाके में आप वाई-फाई एक्सेस करते हैं, उसे हॉट स्पाट कहते हैं।
  • वाई-फाई तकनीक ने तारों के जंजाल, स्विच, एडाप्टर, प्लग, पिन और कनेक्टर से मुक्ति दिलाई है। वाई-फाई को सपोर्ट करने वाले उपकरण जैसे पर्सनल कम्प्यूटर, गेम कोनसोल, सेल फोन, एम पी 3 प्लेयर अथवा पीडीए वायरलेस नेटवर्क की रेंज मेंं तुरंत ही इंटरनेट से कनेक्ट हो सकते हैं। वाई-फाई तकनीक पीयर-टू-पीयर कनेक्टिविटी की अनुमति भी देती है और वह भी बिना किसी राउटर की मदद लिए। वाई-फाई हॉटस्पॉट से मोबाइल कम्प्यूटर को इंटरनेट से जोड़ा जा सकता है तथा डिजिटल कैमरे से बिना किसी तार के तस्वीरें ट्रांसफर की जा सकती हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी कमी यह है कि वाई-फाई हॉटस्पॉट में कोई भी व्यक्ति इंटरनेट से कनेक्ट हो सकता है। वह इसके इनक्रिप्टेड स्टैंडर्ड डब्ल्यूईपी (वायरलेस इक्विवेलेंट प्राइवेसी) को हैक कर तोड़ भी सकता है।
  • वीडियों कॉन्फ्रेंसिग: संचार के क्षेत्र में वीडियों कॉन्फ्रेंसिग एक आधुनिकतम तकनीक है। इस नवीनतम तकनीक के तहत देश में रहने वाले और देश से बाहर रहने वाले विभिन्न स्थानों के दो या अधिक व्यक्ति किसी भी स्थान या कम्प्यूटर स्क्रीन पर देखते हुए आपस में संवाद स्थापित कर सकते हैं। साथ ही इस बातचीत के दौरान किसी भी प्रकार के दस्तोवज अथवा अन्य कागजी सूचनाओं का आदान-प्रदान भी कम्प्यूटर की मदद से कर सकते हैं। वास्तव में वीडियों में वीडियों कॉन्फ्रेंसिग से तात्पर्य है दो दूरस्थ व्यक्तियों दव्ारा संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया में दृश्य एवं श्रव्य (दिखाई देना एवं सुनाई देना) दोनों अनुभवों को प्राप्त करना। भारत में विदेश संचार निगम लि. दव्ारा 1993 में ही वीडियों कॉन्फ्रेंसिग सेवा की शुरूआत कर दी गई थी। विदेश संचार निगम लि. ने अपने दिल्ली चेन्नई, कोलकाता एवं मुंबई के कार्यालयों में चार सार्वजनिक वीडियों कॉन्फ्रेंसिग केन्द्र स्थापित किए हैं, जो सुविधानुसार क्षेत्रों का चयन कर वहाँ उच्च स्तर की सेवाएं प्रदान करते हैं। वर्तमान में इस सुविधा का प्रयोग चिकित्सा अनुसंधान, उच्च स्तरीय वार्ताओं, दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों आदि में किया जा रहा है। भारत में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग दव्ारा वीडियों कॉन्फ्रेंसिग सुविधा को विशेष प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है।
  • इंटीग्रेटेड सर्विसेज डिजिटल नेटवर्क के कारण वीडियों कॉन्फ्रेंसिग का दायरा व्यापक करने में विशेष मदद मिली हैं। मुंबई की ‘वीसी सेकेंड ओपीनियन’ कंपनी चिकित्सा क्षेत्र में वीडियों कॉन्फ्रेंसिग की सुविधा उपलब्ध करा रही है, इसको व्यापक रूप देने के लिए उसने सेकेंड ओपीनियन वर्ल्ड वाइड, टेली क्वेस्ट और सान फ्रांसिस्कों के कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय से गठबंधन किया हुआ है। ज्ञातव्य है कि उपग्रह आधारित वीडियों कॉन्फ्रेंसिग की सुविधा लगभग एक दशक से उपलब्ध थी, परन्तु आधुनिकतम तकनीक दव्ारा इस सुविधा को पर्सनल कम्प्यूटर के माध्यम से उपलब्ध कराना एक क्रांतिकारी कदम है। वीडियों कॉन्फ्रेंसिग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए ‘इटरनेशनल मल्टी मीडिया टेलीे कॉन्फ्रेंसिंग कंसोर्टियम’ दव्ारा विशेष प्रयास किए जा रहे है।
  • डिजिटल लाइब्रेरी: यह सूचना प्रौद्योगिकी का एक रूप है जिसमें सामाजिक प्रभाव का भी उतना ही महत्व है जितना प्रौद्योगिकी के विकास का। भविष्य में ज्ञान नेटवर्क इस प्रकार कार्य करेंगे कि समुदायों की जानकारी स्वत: ही सूचनाबद्ध हो जाएगी ताकि उपभोक्ता करोड़ों की तादात के विभिन्न गठजोड़ों का प्रभावी रूप से विश्लेषण कर सकें। इस दिशा में उठाई गई मुख्य पहला यूनीवर्सल डिजीटल लाइब्रेरी की स्थापना है, जिसका उद्देश्य इंटरनेट पर 10 लाख पुस्तकों को सभी के पढ़ने के लिए उपलब्ध कराना है। भारत इस परियोजना में भाग ले रहा है और भारतीय भाषाओं में अधिक से अधिक सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। इस परियोजना में अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया आदि जैसे देश भी भाग ले रहे हैं। भारत की डिजिटल लाइब्रेरी पोर्टल का उद्घाटन राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने 8 सितंबर, 2003 को किया।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) : कृत्रिम बुद्धि का तात्पर्य है कम्प्यूटर के माध्यम से मनुष्य की बुद्धि और उसकी विचार प्रक्रिया का मॉडल बनाना ताकि कम्प्यूटर भी मनुष्य के समान सोच विचार कर सके। यह अत्यधिक कठिन कार्य है तथा अनेक वैज्ञानिकों का मानना हैं कि यह मॉडल पूर्णत: सफल नहीं हो सकता, फिर भी अनुसंधान कार्य प्रगति पर हैं इस अनुसांधन का आधार यह मानकर चलना है कि मनुष्य की बुद्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। समस्याओं को हल करने की क्षमता (Problem Solving Behaviour) कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संबंध में पहली बार विचार विमर्श 1950 के दशक में किया गया, जब एलम टयूरिंग के विचार के आधार पर हरबर्ट साइमन ने तर्क दिया कि कम्प्यूटर भी सोच सकते हैं। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता विज्ञान की एक शाखा के रूप में स्थापित हो गया। इस शाखा का उद्देश्य है तर्क, विवेचन, नई परिस्थितियों के प्रति अनुकूलन तथा नवीन कौशल शिक्षण जैसे बुद्धिमत्तापूर्ण कार्यो को निष्पादित करने के लिए कम्प्यूटर प्रणालियों को डिज़ाइन करना। विगत कुछ वर्षो में कृत्रिम बुद्धि के लिए शोध की दो प्रमुख दिशाएं ग्रहण की गई है। मानवीय चिंतन की प्रकृति के संबंध में शारीरिक एवं मानसिक शोध तथा बढ़ती हुई परिष्कृत कम्प्यूटर प्रणालियों का तकनीकी विकास। वास्तविक कृत्रिम बुद्धि के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विभिन्न उपागमों के तहत एक समांतर प्रसंस्करण की अवधारणा को अंतरबद्ध और समसामयिक कम्प्यूटर कार्यचालन के साथ लागू करने की अंगीकृत किया जा रहा हैं एक अन्य उपागम के तहत प्रयोगात्मक कम्प्यूटर चिपों (सिलिकॉन तंत्र कोशिका) के एक नेटवर्क का निर्माण शामिल है, जो मस्तिष्क कोशिकाओं के आंकड़ा प्रसंस्करण कार्यों की नकल कर सकें।

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