Science and Technology: Various Plans of E-Governance and CSC-Common Service Centre

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इंटरनेट से संबंधित विभिन्न अवधारणाएँ तथा तकनीकें और उनके अनुप्रयोग (Various Concepts and Techniques of Internet and Its Applications)

ई-शासन से संबंधित विभिन्न योजनाएँ (Various Plans of E-Governance)

सामान्य सेवा केन्द्र (CSC- Common Service Centre)

राष्ट्रीय ई-शासन योजना के एक भाग के रूप में सार्वजनिक निजी सहभागिता के आधार पर ग्रामीण इलाके के लोगों को वर्ल्ड वाइड वेब से जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार दव्ारा सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना की गई है। सार्वजनिक तथा निजी सेवाओं को लोगों के घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से स्थापित सामान्य सेवा केन्द्र राष्ट्रीय ई-शासन योजना के आधारभूत स्तंभ के रूप में कार्यरत हैं।

राज्य आँकड़ा केंन्द्र (SDC- State Data Centre)

राष्ट्रीय ई-शासन योजना के दूसरे महत्वपूर्ण अवयव के रूप में राज्य स्तर पर राज्य आँकड़ा केन्द्रों की स्थापना का प्रावधान किया गया है ताकि सेवाओं की प्रभावपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति सुनिश्चित करने की दृष्टि से अवसरंचनाओं, सेवाओं तथा अनुप्रयोगों को सुदृढ़ता प्रदान की जा सके। सामान्य सेवा केन्द्रों तथा स्टे वाइड एरिया नेटवर्क दव्ारा समर्थित इन सेवाओं की आपूर्ति राज्य दव्ारा की जाती है। इन सभी का मूल उद्देश्य ग्रामीण इलाकों तक संयोजनता (Connectivity) को विस्तारित करना है।

स्टेड वाइड एरिया नेटवर्क (SWAN- State Wide Area Network)

वर्तमान बेतार तकनीक माध्यम से संयोजनता (Connectivity) को ग्रामीण इलाकों तक पहुँचानें के उद्देश्य से राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में प्रखंड स्तर पर 2 एमबीपीएस की डाटा संयोजनता विस्तारित करने के लिए इसका विकास किया गया है।

ई-जिला (Electronic District)

  • ऑनलाइन सेवाएँ उपलब्ध कराने की अपनी नीति के तहत सरकार ने जिला स्तर पर नागरिकों एवं प्रशासन के मध्य प्राथमिक अंतराफलक (Interface) के रूप में ऐसी योजनाओं को कार्यान्वित किया है। जिले के स्तर पर बिजनेस प्रोसेस रि-इंजीनियरिंग (BPR) के साथ-साथ कार्य प्रक्रिया को आखिरी छोर तक कम्प्यूरीकृत बनाने के उद्देश्य से इन ऑन लाइन सेवाओं की आपूर्ति की जाती है, जिसकी शुरूआत 1991 से की गई। इसके उपयोग से भूमि संबंधी मामला में होने वाली देरी में काफी कमी आने से राजस्व अधिकारियों दव्ारा जारी किये जाने वाले आदेशों के संबंध में जानकारी प्राप्त करना आसान हो जाएगा।
  • इनके अलावा विभिन्न राज्यों के स्तर पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण ई-शासन योजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं।

ई-चौपाल (E-Choupal)

सरकार, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, निजी कंपनियों और स्वयंसेवी संस्थाओं दव्ारा ग्रामीण इलाकों में ई-चौपाल केन्द्रों की स्थापना की जा रही है। ई-चौपाल वस्तुत: इंटरनेट की सहायता से ग्रामीण किसानों को कृषि बाजार की मांग और विपणन संबंधी जानकारी गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराने वाला राज्य सरकारों तथा निजी कंपनियों का एक नेटवर्क है। इसके माध्यम से किसानों को कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे कि नई कृषि तकनीकों को अपनाने की जानकारी, उन्नतशील किस्मों के नये बीजों, उर्वरकों, फसलों के रोग-बीमारियों हेतु दवाओं तथा फसलों के उत्पादन में वृद्धि करने से संबंधित जानकारी और बाजार मूल्य व मांग की भी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक व आंध्र प्रदेश में ई-चौपाल से संबंधित कई कार्यक्रम क्रियान्वित किये जा रहे हैं, जो ग्रामीण विकास में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

ई-कृषि (E-Agriculture)

निर्माण-स्वामित्व-परिचालन और हस्तांतरण (BOT) पद्धति के आधार पर परिचालित ई-कृषि मार्केटिंग की इस योजना के अंतर्गत जाँच पोस्टों (Check Posts) तथा मंडियों को कम्प्यूटर दव्ारा विभिन्न कार्यालयों और मंडी मुख्यालयों से संबंद्ध करके ग्राहकों को एकल खिड़की (Single Window) अर्थात एक ही स्थान पर विकल्प तथा अन्य सामान्य सेवाओं की उपलब्धता कराई जाती है। इसकी शुरूआत मध्य प्रदेश में की गई है।

भूमि (Earth)

  • नेशनल इनफॉर्मेटिक सेंटर दव्ारा निर्मित ‘भूमि’ नामक इस सॉफ्टवेयर का प्रयोग भूमि संबंधी रिकॉर्डों को अद्यतन बनाने के कार्य में किया जाता है ताकि भूमि सुधार एवं अन्य कार्यों से संबंधित कार्यक्रमों का समुचित कार्यान्वयन बेहतर निगरानी और शिकायतों का त्वरित निवारण किया जा सके।
  • उपरोक्त राष्ट्रीय ई-प्रशासन योजना में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र, बीपीएल (BPL) परिवारों के लिए पहचान पत्र, भारतीय भाषा तकनीकें, इंटरनेट प्रोत्साहन और राज्यों तथा सरकारी विभागों के ई-तैयारी सूचकांक जैसे अनेक घटक शामिल हैं।
  • देशभर में ई-शासन के लाभों को आम जनता तक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग दव्ारा सफल ई-शासन पहलों का क्षैतिज स्थानांतरण (Horizontal Transfer of Successful e-governance Initiatives) नामक राष्ट्रव्यापी पहल की शुरूआत की गई है। देश में कुछ राज्यों दव्ारा हासिल कुछ महत्वपूर्ण सफलताओं की पहचान करके उन्हें अन्य राज्यों में भी दोहराना इस पहल का मूल उद्देश्य है। पहल के प्रथम चरण में सरकार दव्ारा लोगों को दी जाने वाली सेवाओं में सुधार करने हेतु भू-अभिलेख, पंजीकरण तथा परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं को लागू किया गया।

भारत में ई-शासन से संबंधित कई योजनाएँ राज्य स्तर पर कार्यान्वित की जा रही हैं, जो संक्षेप में इस प्रकार हैं-

  • स्टार (STAR- Simplified Transparent Administration of Registration) -यह तमिलनाडु राज्य सरकार की एक बहुस्तरीय कम्प्यूटरीकृत सेवा है, जिसके माध्यम से भूमि रिकॉर्ड से संबंधित कार्यो के संपादन के साथ-साथ संपत्ति मूल्यांकन, संपत्ति अधिकार प्रमाण-पत्र, कम्प्यूटरीकृत पंजीकरण प्रक्रिया, प्रतियों को प्रमाणित करने, शिशुओं, विवाहों तथा धर्म के पंजीकरण का भी कार्य किया जाता है। इस रजिस्ट्रेशन प्रणाली में रिकॉर्डों की स्कैनिंग, संग्रहण तथ पुनर्प्राप्ति के लिए अभिलेख सुविधा भी उपलब्ध है।
  • ज्ञानदूत- यह वस्तुत: अनुसूचित जनजाति के लोगों के घर-घर सूचना प्रौद्योगिकी के लाभों को पहुँचाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया, एक समुदाय आधारित बहुत ही सस्ता और वित्तीय दृष्टि से आत्मनिर्भर इंटरनेट सेवा उपागम है।
  • फ्रेंड्‌स (FRIENDS- Fast Reliable Instant Efficient Network for Disbursement of Services) -तिरूवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के सहयोग से सूचना तकनीकी विभाग दव्ारा स्थापित फ्रेंड्‌स जनसेवा केन्द्र वस्तुत: केरल की एकीकृत सेवा परियोजना है। इस परियोजना के अंतर्गत संबंधित विभागों के सर्वर से फ्रेंड्‌स केन्द्र को जोड़कर विभागों को उपर्युक्त समय पर अद्यतन आँकड़े उपलब्ध कराये जाएंगे। इस परियोजना के माध्यम से संपत्ति कर व्यावसायिक कर, बिल भुगतान के एस. ई. बी. व्यापारी लाइसेंस शुल्क, राजस्व प्राप्ति, बिल्डिंग टैक्स, बेसिक टैक्स तथा गाड़ियों संबंधी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती है।
  • एम सी ए-21:- 1956 के कंपनी अधिनियम से संबंधित प्रपत्रों की इलेक्ट्रॉिनिक फाइलिंग सुविधा उपलब्ध कराने के प्रमुख उद्देश्य से प्रारंभ की गई एम सी ए-21 संभवत: देश की सबसे बड़ी ई-गवर्नेंस परियोजना है, जिसे मार्च 2006 में नई दिल्ली से आरंभ किया गया। एम सी ए-21 के तहत एर्नाकुलम, पुदुचेरी, कोयम्बटूर तथा नई दिल्ली के रजिस्ट्रार ऑफिसों को भी रखा गया है।
  • बेंगलौर वन:- अप्रैल, 2005 से प्रारंभ की गई बंगलौर वन वस्तुत: एक नागरिक सेवा है। इसमें एकल खिड़की के माध्यम से बी. एस. एन. एल. बंगलौर पुलिस, पासपोर्ट तथा स्टॉम्प कार्यालय और बी. ई. एस-कॉम कार्यालयों की सेवाएँ बंगलौर वन के 14 उच्च तकनीकी सेवा केन्द्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा गवर्नमेंट टू बिजनेस (जी-2बी) तथा गवर्नमेंट टू सिटिजन (जी-2सी) जैसी कुछ सेवाएँ नेशनल इंस्टीट्‌यूट ऑफ स्मार्ट गवर्नमेंट, (NISG) हैदराबाद की सहायता से कर्नाटक राज्य सरकार दव्ारा उपलब्ध कराई जा रही हैं।
  • पंचमहल:- ग्रामीण व्यक्तियों के लिए कार्यान्वित इस नागरिक सेवा के माध्यम से गुजरात में ग्रामीण लोगों को वृद्धावस्था पेंशन के अनुमोदन तथा राशन कार्डों की प्राप्ति हेतु अपने निकटतम आई. एस. डी. , एस. टी. डी बूथ से इसकी सुविधा प्राप्त हो जाती है। इस योजना के लिए गुजरात राज्य में नेटवर्किंग का कार्य गुजरात ऑनलाइन लिमिटेड दव्ारा किया गया है।
  • ई-सेवा:- नागरिक एवं प्रशासन के मध्य विद्यमान दूरी को समाप्त करने तथा केन्द्र और राज्य सरकारों के विभागों को एकीकृत करने के मूल उद्देश्य से संचालित इलेक्ट्रॉिनिक सेवा (ई-सेवा) योजना वस्तुत: 1999 में हैदराबाद तथा सिकंदराबाद (आंध्र प्रदेश) में संयुक्त रूप से प्रारंभ की गई। अगस्त, 2001 से शुरू की गई ई-सेवा वस्तुत: ट्‌िवंस प्रोजेक्ट (Twins Project) का ही संशोधित रूप है।
  • सेतु: प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कार्यकुशल, पारदर्शी तथा सुगम बनाने के मुख्य उद्देश्य से प्रारंभ किया गया सेतु वस्तुत: एकीकृत नागरिक सरलीकरण केन्द्र है, जिसकी शुरूआत अक्टूबर, 2001 में महाराष्ट्र सरकार दव्ारा की गई। सेतु जहाँ एक ओर जन शिकायत निवारण प्रणाली और प्रार्थना -पत्रों के नियत समय पर समाधान और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित समस्त सूचनाएँ तथा अन्य विवरणों को उपलब्ध कराता है, वहीं दूसरी ओर सभी अनुमति-पत्रों तथा प्रमाण-पत्रों हेतु ‘वन स्टॉप काउन्टर’ सेवाएँ भी प्रदान करता है।

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