भारतीय संस्थानों के लिए रैंकिंग फ्रेमवर्क (Ranking Framework for Indian Institutions – Social Issues)

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय संस्थागम रैंकिंग रूपरेखा जारी किया है।

राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (ढाँचा) क्या है?

• इस फ्रेमवर्क ने देश भर के शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग हेतु अपनायी जाने वाली पद्धति की रूपरेखा प्रस्तुत की है।

• हालांकि रैंकिंग फ्रेमवर्क सभी के लिए समान हैं लेकिन इसके अंतर्गत प्रत्येक क्षेत्र के लिए विशिष्ट कार्य पद्धति अपनाई जाएगी। इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों के लिए रैंकिंग पद्धति घोषित की जा चुकी है जबकि अन्य क्षेत्रों के लिए शीघ्र ही घोषणा की जाएगी।

• यह फ्रेमवर्क भारतीय दृष्टिकोण का पालन करती है। यह अध्यापन, अध्ययन और अनुसंधान में उत्कृष्टता के अलावा भारत केंद्रित मानको को सम्मिलित करती है, जैसे-विविधता एवं समावेशन।

ये सभी मापदंड इन पांच शीर्षकों के अंतर्गत आते है

शिक्षण अधिगम और संसाधन-ये मापदंड सीखने की किसी भी स्थिति की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों से संबंधित हैं। ये युवा व्यक्तियों के विकास हेतु प्राध्यापकों की संख्या और गुणवत्ता, पुस्तकालय, प्रयोगशाला संसाधन और सामान्य सुविधाओं को मापने पर बल देता है।

अनुसंधान, परामर्श और सहयोगात्मक प्रदर्शन-ये मानक अंतराष्ट्रीय डेटाबेस (कंप्युटर में संग्रहीत विशाल तथ्य सामग्री) , आईपीआर सृजन और उद्योग तथा साथी पेशेवरों के साथ इंटरफ़ेंस (हस्तक्षेप) के माध्यम से अनुसंधान की मात्रा और गुणवत्ता मापने का प्रयास करता है।

स्नातक उपब्धियां-यह मानदंड कोर अध्यापन/सीखने की अभिक्रिया की प्रभावशीलता का आधारभूत मापन करता है और स्नातक उत्तीर्ण छात्रों की दर और उनके दव्ारा उद्योग या प्रशासन में उपयुक्त नौकरी प्राप्त करने या उच्च शिक्षा के लिए आगे अध्ययन करने की गतिविधियों का मापन करता है।

पहुँच और समावेशिता-रैंकिंग फ्रेमवर्क (सामाजिक व्यवस्था) महिलाओं और सामाजिक रूप से पिछड़े व्यक्तियों का छात्र और अध्यापक दोनों समूहों में समावेशन करने पर विशेष बल देता है, साथ ही संस्थान की समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँच को भी महत्व देता है।

धारणा- रैंकिंग कार्यप्रणाली अपने हितधारकों दव्ारा संस्थान के विषय में धारणा को भी काफी महत्व देता है। यह हितधारक सर्वेक्षण के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

एनआईआरएफ की उपयोगिता

• यह माता पिता, छात्रों, शिक्षकों, शैक्षिक संस्थानों और अन्य हितधारकों के वस्तुनिष्ठ मानकों के एक सेट दव्ारा और एक पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर संस्थानों को रैंकिंग प्रदान करने में सक्षम होगा।

• यह संस्थानों की रैंकिंग के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण उत्पन्न करेगा

• वैसे संस्थान जो अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में काम कर रहे और जिन्होंने हाल के दिनों में अपेक्षाकृत उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, वे काफी लाभान्वित होंगे।

• यह फ्रेमवर्क भारतीय संस्थानों को, किसी भी अंतर्राष्ट्रीय पूर्वाग्रह से मुक्त एक प्रतियोगी मंच प्रदान करती है।

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