चीन का भूगोल (Geography of China) Part 3 for Odisha PSC Exam

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उच्चवाचीय विषमता के आधार पर चीन को चार स्वाकृतिक प्रदेशों में विभक्त कर भौतिक लक्षणों को जान सकते हैं

‘अल्टाई’

मध्यवर्ती पर्वतमाला पामीर गाँठ के पूर्व में कुनलुन श्रेणी से प्रारंभ होती है। पूर्व में यह शिंगलिंगशान पर्वत श्रेणी यह क्रम कुनलुनशान, अल्टाइनटांग, नानशान, सिनलिंगशान पर्वत श्रेणियों के रूप में फैला हुआ ताइवान श्रेणी तक समाप्त हो जाता है। कुनलुन पर्वत को स्पेन ऑफ (का) एशिया कहा जाता है। शिनलिंगशान पर्वत श्रेणी यांग्जी घाटी से खांगहो घाटी को पृथक करती है। शिनलिंगशान पर्वत चीन का विशालम पर्वत है जिसे ‘ग्रेट (महान) डिवाइड (विभाजन) लाइन (रेखा) ऑफ (का) चाइना’ कहा जाता है। इसके दक्षिण में आर्द्र, मानसूनी तथा चावल कृषि का क्षेत्र है। इसके उत्तर में शुष्क, चीन तुल्य जलवायु, गेहूँ कृषि तथा कृषि सिंचाई पर आधारित है। शिनलिंग का सर्वोच्च शिखर माउंट टोबाइ (3767 मी) है।

दक्षिणी पर्वतमाला तिब्बत के पठार के दक्षिण में चापाकार में विस्तृत है। यह क्रम पामीर से निकलने वाली हिमालय पर्वत श्रेणियों से नानलिंगशान पर्वत श्रेणी के रूप में फैला हुआ है। यह पर्वत पश्चिम में चियांग पाई-पर्वत से पूर्व में जेयवान बेसिन तक विस्तृत है। नानलिंगशान यांगजी तथा सीक्यांग घाटियों के बीच विभाजक का काम करती है। चीन के पर्वतीय चापों के संगम स्थल निर्बल क्षेत्र हैं, जहाँ प्राय: भूकंप आता रहता है।

  • कैलाश श्रेणी तिब्बत के पठार के मध्य फैला है।
  • नानसान पर्वत श्रेणी कान्सू प्रदेश की दक्षिणी सीमा पर विस्तृत है। इस पर्वत श्रेणी का पूर्वी भाग आर्डिस मरुस्थल को परिवेष्टित करता है।

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