Important of Modern Indian History (Adunik Bharat) for Hindi Notes Exam Part 2

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बारदोली सत्याग्रह-

  • 1908 में लगान न देने-बारदोली (सूरत) सत्याग्रह असहयोग आंदोलन की देन था।
  • 1922 में असहयोग आंदोलन यहीं से शुरू होने वाला था।
  • कल्याणजी जी और कुंवरजी मेहता (दोनो भाई) और दयालजी देसाई ने ही गाँधी जी को खेड़ा की बजाय बारदोली से असहयोग आंदोलन शुरू करने को मनाया था।
  • इन्होंने बारदोली में बहिष्कार का प्रभावी आंदोलन छेड़ रखा था।
  • इस क्षेत्र की दोनों बिरादरियाँ (अनाविल ब्राह्यण व पट्‌टीदार) इन नेताओं की बहुत इज्जत करती थी।
  • इन्होंने आदिवासियों (कलिपराज) के बीच काम किया।
  • कुंवरजी मेहता और केशवजी गणेशजी ने ‘कपिलराज साहित्य’ का सृजन किया।
  • 1927 के कपिलराज (गाँधी जी ने कपिलराज का नाम बदलकर रानीपराज रखा) सम्मेलन की अध्यक्षता गांधी जी ने की।
  • समिति का गठन गाँधी जी ने किया- नरहरि पारीख व जगतराम दवे ने इनके आर्थिक-सामाजिक पहलुओं का अध्ययन कर हाली पद्धति (बँधुआ मजूरी) को अमानवीय बताया।
  • 1926 में लगान पुनरीक्षण अधिकारी ने लगान में 30 फीसदी बढ़ोतरी की सिफारिश की।
  • कांग्रेस ने बारदोली जाँच समिति का गठन किया, जिसने इसे अनुचित बताया।
  • इसके बारे में सबसे पहले ‘यंग इंडिया’ ने लिखा और ‘नवजीवन’ नें
  • खेदुत मंडल के माध्यम से किसान बैठके आयोजित हुई और उन्हें जिला कलेक्टर को याचिका भेजने की सलाह दी गई।
  • कांग्रेस नेताओ ने वल्लभभाई पटेल को आंदोलन की रहनुमाई के लिए कहा।
  • फादोद संभाग के बामनो गांव में प्रतिनिधियों (60 गांवों के) की बैठक में पटेल को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया।
  • नियंत्रण देने जनवरी, 1928 के आखिरी हफ्ते किसान समिति के सदस्य व स्थानीय नेता अहमदाबाद गए।
  • 4 फरवरी को पटेल बारदोली पहुँचे-5 फरवरी से लगान देय था।
  • पटेल किसानों को आंदोलन के नतीजे पर विचार करने का समय (1 हफ्ता) है अहमदाबाद लौट गए।
  • बंबई के गवर्नर को खत लिख उसकी जाँच कराने का अनुरोध किया।
  • 12 फरवरी को बारदोली लौट, कर ना अदा (जब तक निष्पक्ष ट्रिब्यूनल का गठन नहीं करती या पहले के लगान को पूरा लगान न मानती) करने का निर्णय लिया।
  • ‘सरदार’ की उपाधि बारदोली की औरतों ने दी।
  • तालुके को 13 कार्यकर्ता शिविरों (छावनियों) में बाँट एक-एक अनुभवी नेता तैनात किए गए।
  • इस आंदोलन की सेना थे 1500 स्वयंसेवी (ज्यातर छात्र)
  • एक प्रकाशन विभाग बनाया गया-बारदोली सत्याग्रह पत्रिका का प्रकाशन।
  • खुफियार विभाग- कोई कर न दे रहा तो, सरकार क्या करने वाली है।
  • महिलाओं को विशेषरूप से जागरूक किया गया।
  • मीलूबेन पेटिट (बंबई की) , भक्तिषा (दरबार गोपाल दास की पत्नी) , मनीबेन पटेल (पटेल की बेटी) , शारदाबेन शाह और शारदा मेहता को लगाया गया।
  • लगान देने वालों को सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी गई।
  • सरकारी अधिकारियों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।
  • बंबई विधान परिषद् के कई सदस्यों ने इस्तीफा दिया।
  • ‘सर्वेंट ऑफ इंडिया सोसाइटी’ से कांग्रेस ने किसान की शिकायतों की जाँच करने का अनुरोध किया इसके बाद नरमपंथी भी समर्थक हो गए।
  • रेल हड़ताल का डर था जुलाई 1928 को वाइसराय लार्ड इरविन ने गवर्नर विलसन को मामला रफा-दफा करने को कहा-ब्रिटेन की संसद में मामला उठ चुका था।
  • 2 जुलाई, 1928 को गाँधी जी बारदोली पहुँचे-पटेल की गिरफ्तारी होने पर आंदोलन संभालने
  • सूरत के विधान परिषद् सदस्यों ने गवर्नर को लिखा जाँच के लिए आपने जो शर्ते रखी है, वे मान ली जाएगी-शर्ते क्या थी जिक्र नहीं था।
  • ब्रूमफ़ील्ड (न्यायिक अधिकारी) और मैक्सवेल (राजस्व अधिकारी) के जाँच कर लगान बढ़ोतरी घटाकर 6.03 प्रतिशत कर दिया।
  • 5 मई, 1929-न्यू स्टेट्‌समैन (लंदन) - “जाँच समिति की रिपोर्ट सरकार के मुँह पर तमाचा है-इसके परिणाम दूरगामी होंगे।”
  • गाँधी जी- “बारदोली संघर्ष चाहे कुछ भी हो, यह स्वराज की प्राप्ति के लिए संघर्ष नहीं है। लेकिन इस तरह का हर संघर्ष, हर कोशिश हमें स्वराज के करीब पहुँचा रही है और हमें स्वराज की मंजिल तक पहुँचाने में शायद ये संघर्ष सीधे स्वराज के लिए संघर्ष से कहीं ज्यादा सहायक सिद्ध हो सकते है।”

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