मराठवाड़ा में सूखा आर चीनी मिलों का मुद्दा (Issue of Drought And Sugar Mills In Marathwada – Economy)

Glide to success with Doorsteptutor material for competitive exams : get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

Download PDF of This Page (Size: 145K)

सुर्ख़ियों में क्यों?

मराठवाड़ा जैसे क्षेत्र पानी की भीषण कमी का सामना कर रहे हैं। (करीब 40 प्रतिशत कमी)। इस क्षेत्र में लगातार दूसरे वर्ष वर्षा कम होने के परिणामस्वरूप सूखे की स्थिति विद्यमान है।

मुद्दा: क्या गन्ने की खेती मराठवाड़ा क्षेत्र में सुखे के लिए जिम्मेदार हैं?

समर्थन में तर्क

• गन्ने की खेती के लिए बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है (2000 से 25000 मिमी पानी)। उत्तरी क्षेत्रों में नदियों का विशाल नेटवर्क (जाल पर काम) है, लेकिन महाराष्ट्र में गन्ने की खेती पानी की कमी वाले क्षेत्रों में होती है।

• गन्ने की खेती के तहत यहाँ केवल 4 प्रतिशत भूमि है जो सिंचाई के लिए उपलब्ध जल के 71.5 प्रतिशत का उपयोग करती है।

• इस क्षेत्र में 20 से अधिक चीनी मिलें हैं और प्रत्येक मिल में प्रति टन गन्ने की पेराई के लिए लगभग 1500 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है।

• कुछ समय पूर्व महाराष्ट्र जल और सिंचाई आयोग ने भी गन्ने की खेती को इस क्षेत्र में बंद करने की सिफारिश की थी।

Developed by: