3डी प्रिटिंग (छापाखाना) के बायो-इंक (स्याही) (3d Printing For – ink)

Get unlimited access to the best preparation resource for competitive exams : get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

Download PDF of This Page (Size: 150K)

• वैज्ञानिकों ने बायो-इंक युक्त एक स्टेम (तना) सेल (कोशिका) का विकास किया है। जो जटिल जीवित उत्तकों की प्रिटिंग (छापाखाना) करेगा जिसका उपयोग सर्जिकल (शल्य-क्रिया संबंधी) प्रत्यारोपण में किया जा सकता है।

• बायो-इंक में दो अलग-अलग पॉलीमर घटक सम्मिलित हैं: समुद्री घास से निष्कासित एक प्राकृतिक पॉलीमर और चिकित्सा उद्योग में उपयोग होने वाला सेक्रिफिरियल सिंथेटिक (अप्राकृतिक) पॉलीमार।

• विशेष बायो-इंक फार्मूलेशन (प्रतिपादन) रेट्रोफिटेड में बेंचटॉप 3डी प्रिंटर से एक द्रव के रूप में गया था, 37 डिग्री सेल्सियस तापमान पर यह जेल में बदल गया जिससे जटिल जीवित 3डी आर्किटेक्चर (वास्तुकला) का निर्माण किया गया।

बायो-इंक का संभावित अनुप्रयोग

इसका उपयोग मरीज की अपनी स्टेम सेल का इस्तेमाल जटिल उत्तकों की प्रिंटिग कर हड्‌डी और उपस्थियों से सर्जिकल प्रत्यारोपण में किया जा सकता है, जिसका घुटने और कुल्हे की सर्जरी में इस्तेमाल किया जा सकता हैं।

यह किस प्रकार काम करता है?

• जब तापमान को बढ़ाया जाता है तब सिंथेटिक (अप्राकृतिक) पॉलीमार के कारण बायो-इंक द्रव से ठोस में बदल जाता है और जब कोशिका पोषक तत्व प्रदान किया जाता है तो सीवीड पॉलीमार संरचनात्मक सहयोग प्रदान करता है।

• पंच समूह में 3डी प्रिंटेड उत्तक संरचना के अभियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों की टीम (समूह) स्टेम सेल (तना, कोशिका) को ओस्टिपोब्लास्ट (एक कोशिका जो हड्‌डी के पदार्थ का स्राव करती है।) और ऐसी कोशिकाएं जो उपास्थियों की मैटिक्स स्रावित करती हैं और उसी में सन्निहित हो जाती है) में विभेदित करने में सक्षम थी।

Developed by: