आइंस्टीन रिंग (Einstein ring – Science And Technology)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• आइंस्टीन रिंग का अन्वेषण चिली में इंस्टोटीयटो डी ंएस्ट्रोसेफिसीका डी सेनेराइस में किसा गया है। इस अन्वेषण को सुनिश्चित करने के लिए टीम (दल) ने ग्रैन टेनिस्कोपियो सेनेराइस में एक स्पेक्ट्रोग्राफ का उपयोग किया। इस खोज को अब ”कैनेरिअस आइंस्टीन रिंग” के नाम से जाना जाता है।

• एक दुर्लभ ’ आइंस्टीन रिंग’ निर्मित करने के बाद 10,000 और 6,000 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित आकाशगंगाओं के एक युग्म को पृथ्वी के सापेक्ष बिल्कुल सटीक स्थिति में होना चाहिए।

• दोनों आकशगंगाएँ इतने सटीक रूप से एक दूसरे के प्रति संरेखित होती हैं कि सबसे दूर स्थित या स्रोत आकाशगंगा से आने वाला प्रकाश निकटवर्ती आकाशगंगा के गुरुतत्व दव्ारा विक्षेपित कर दिया जाता है। इसके कारण सर्वाधिक दूर स्थित आकाशगंगा से आने वाला प्रकाश पृथ्वी से देखने पर लगभग पूर्ण वृत्त सदृश प्रतीत होता है।

आइंस्टीन रिंग (छल्ला) क्या है?

• ”आइंस्टीन रिंग” को सर्वप्रथम आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत दव्ारा अनुमानित किया गया था। यह एक दुर्लभ खगोलीय परिघटना है जो एक-दूसरे से कई मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित आकाशगंगाओं के सटीक रूप से संरेखित होने पर घटित होती है।

• आइंस्टीन रिंग अत्यधिक दूर स्थित आकाशगंगा की एक विरूपित छवि है, जिसे ’स्रोत’ कहा जाता है। यह विरूपण स्रोत और प्रेक्षक के बीच अवस्थित वृहद आकशगंगा (जिसे ’लेंस’ (भौतिकी ताल) कहा जाता है) के कारण स्रोत से आने वाली प्रकाश किरणों के मुड़ने से उत्पन्न होता है।

• जब दो आकाशगंगाएँ सटीक रूप से संरेखित होती हैं तो अधिक दूर स्थित आकाशगंगा की छवि लगभग पूर्ण वृत्त में परिवर्तित हो जाती है।

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