महाबोधि मंदिर (Mahabodhi Temple – Culture)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• हाल ही में श्रीलंका में बेसक पोया त्योहार के दौरान, महाबोधि मंदिर के आर्दश के अनुरूप एक लालटेन का निर्माण किया गया था और कोलंबों में इसे गंगारमाया मंदिर के पास प्रदर्शन के लिए रखा गया था।

महाबोधि मंदिर के बारे में

• यह बिहार के बोधगया में अवस्थित है जहाँ बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई थी।

• यह पूर्वी भारत की सबसे पुरानी ईंट से निर्मित संरचनाओं में से एक है। यह सदियों से ईंट दव्ारा निर्मित वास्तुकला के विकास को प्रभावित करता आया है।

• पहला मंदिर तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक दव्ारा बनाया गया था। हालांकि, वर्तमान मंदिर 5 - 6 वीं शताब्दी का है जो उत्तर गुप्त काल से संबंधित है।

• 2002 में यह यूनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया।

बेसाक के बारे में

• बेसाक पोया, अर्थात बुद्ध पूर्णिमा एवं बुद्ध दिवस, एक अवकाश है जिसे दक्षिण एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अलग-अलग दिनों पर बौद्धों दव्ारा पारंपरिक रूप से मनाया जाता है।

• यह गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान (निर्वाण) और मृत्यु (परिनिर्वाण) की स्मृति में थेरवाद या दक्षिणी परंपरा में मनाया जाता है।

• इस उत्सव का नाम अप्रैल-मई में पड़ने वाले हिन्दू कैलेन्डर (तिथि-पत्र) के वैशाख महीने से प्रेरित प्रतीत होता है।

• इस दिन अनुयायी एकत्रित होकर पवित्र त्रिपिटक की स्तुति में भजन गाते है। ये हैं-बुद्ध, धर्म (उनकी शाखाएँ) , और संघ (उनके शिष्य)

निम्नलिखित स्थलों/स्मारकों पर विचार करें

• चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व पार्क

• छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन (केंद्र) , मुंबई

• मामाल्लपुरम

• सूर्य मंदिर (कोणार्क मंदिर)

उपरोक्त में से जो यूनेस्कों की विश्व विरासत सूची में शामिल किए गए हैं। (यूपीएससी 2005)

(क) 1,2, और 3

(ख) केवल 1,3 और 4

(ग) केवल 2 और 4

(घ) 1,2, 3 और 4

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