ग्रामीण और शहरी मुद्रास्फीति के बीच अंतराल (Interval between Rural and Urban Inflation – Economy)

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एचएसबीसी दव्ारा जारी मुद्रास्फीति रिपोर्ट (विवरण) के अनुसार, कुल मिलाकर भारत की अंतर्निहित मुद्रास्फीति गति 5.5 प्रतिशत है। वहीं ग्रामीण भारत के लिए यह 6.5 प्रतिशत से अधिक और शहरी क्षेत्र के लिए यह केवल 4.5 प्रतिशत है।

इस अंतराल के कारण

• गैर-पेट्रोलियम आधारित ईंधन के अधिकाधिक उपयोग अधिकांश ग्रामीण घरों में किया जाता है इन ईंधनों की मुद्रास्फीति उच्च बनी रहती है।

• तेल की कीमतों में नाटकीय गिरावट ने ‘ईंधन’ और ‘परिवहन’ की कीमतें नीचे लाने में योगदान दिया है। हालांकि, ग्रामीण भारत को तेल में गिरावट का लाभ कम मिला है। आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण भारत का ईंधन घरेलू उत्पादन जलाऊ लकड़ी, चिप्स और बायोगैस आदानों का मिश्रण है जो वैश्विक अपस्फीति चक्र का एक हिस्सा नहीं हैं।

• दूसरी ओर, शहरी भारत में ईंधन उत्पादों यानी एलपीजी और डीजल (डीजल इंजन) का और अधिक व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है, निम्न वैश्विक कीमतों का लाभ मिला है।

• खाद्य पदार्थ और अन्य-खाद्य पदार्थों के मामले में, सस्ते आयात का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।

ग्रामीण भारत में शहरों की तुलना में संरचनात्मक सुविधा की कमी है-शहरी भारत की तुलना में ग्रामीण भारत में संरचनात्मक सुविधा कम हैं इसका मुख्य कारण हैं: परिवहन का अपर्याप्त नेटवर्क (जाल पर काम) , सीमित प्रदाता और अपर्याप्त प्रतियोगिता और वितरण चैनल (मार्ग) , अपर्याप्त निवेश, बढ़ता गतिरोध और लगातार दो सूखे ने इन सभी संरचनात्मक सुविधाओं की कमी ने ग्रामीण भारत की संभावित (या प्रवृत्ति) वृद्धि कम करने में योगदान दिया है। सीमित उत्पादन अंतराल, ने कमजोर विकास के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में कोर मुद्रास्फीति को तेजी से गिरने से रोके हुए हैं।

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