पश्चिमी घाट पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट (विवरण) (Kasturirangan Report on Western Ghats – Environment And Ecology)

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सरकार ने कहा है कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के अनुसार, चिन्हित किये गये पारिस्थितिक दृष्टि से संवदेनशील क्षेत्रों में वाणिज्यिक खन्न और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा।

अनुशंसाएँ

• कस्तूरीरंगन पैनल (तालिका) ने दो चिंताओं-विकास और पर्यावरण संरक्षण बनाये रखने पर जोर दिया है।

• कस्तूरीरंगन पैनल (तालिका) का गठन पश्चिमी घाट के लिए गठित गाडगिल समिति की रिपोर्ट (विवरण) का अध्ययन करने के लिए किया गया था।

• गाडगिल पैनल (तालिका) की रिपोर्ट (विवरण)) ने वृक्षारोपित भूमि, खेती योग्य भूमि और बड़ी बस्तियों को सम्मिलित करते हुए लगभग तीन-चौथाई पहाड़ियों को प्रतिबंधित क्षेत्र के अंतर्गत लाने की अनुशंसा की थी जिसका राज्य सरकारों ने एकमत से विरोध किया था।

• कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के केवल 37 प्रतिशत हिस्से को पारिस्थितिक रूप से संवदेनशील क्षेत्र (ईएसए) के अंतर्गत लाना चाहती है। यह गाडगिल रिपोर्ट दव्ारा सुझाए गए 64 प्रति की अपेक्षा काफी कम है।

• इसने पारिस्थितिक रूप से संवदेनशीन क्षेत्रों में विकास व वाणिज्यिक गतिविधियों जैसे खनन, ताप ऊर्जा संयंत्रों, प्रदूषणकारी उद्योगों और बड़ी आवास योजनाओं के निषेध की अनुशंसा की है।

• ईएसए के अंतर्गत आने वाले गांवों को भावी परियोजनाओं पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाएगा। सभी परियोजनाओं को गाँव की ग्राम सभा से पूर्ण सहमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता होगी।

• इन क्षेत्रों में खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और वर्तमान खनन गतिविधियों को चरणबद्ध रूप से पाँच वर्षो के भीतर बंद किया जाना चाहिए।

• पैनल (तालिका) ने इन क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा नहीं की है, लेकिन बांधों और अन्य परियोजनाओं की अनुमति के लिए अत्यंत कठोर प्रावधान करने की अनुशंसा की है।

• बांधों के लिए, नदियों के प्रवाह स्तर के कम से कम 30 प्रतिशत निर्बाध पारिस्थितिक प्रवाह की अनुशंसा की गयी है। इसके अतिरिक्त किसी भी समय नदी बेसिन का 50 प्रतिशत से अधिक भाग प्रभावित नहीं होना चाहिए।

• पैनल ने इस क्षेत्र के विकास व आर्थिक संवृद्धि को विनियमित करने हेतु नए प्राधिकरण की स्थापना पर जोर दिया।

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