शहरी ऊष्मा दव्ीप के अध्ययन के लिए नया मॉडल (New Model for the Study of Urban Heat Island – Environment)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• शोधकर्ताओं दव्ारा अबू धाबी में ऊष्मा दव्ीप प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक नया जलवायु मॉडल विकसित किया गया है। मॉडल के एक बार तैयार हो जाने पर, पूरी दुनिया को इस प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी।

शहरी ऊष्मा दव्ीप (यूएचआई) के बारे में

• शहरीकरण मुख्य रूप से प्रदूषण के उत्पादन, वातावरण के भौतिक और रासायनिक गुणों में परिवर्तन, और मिट्‌टी की सतह के आच्छादन दव्ारा पर्यावरण पर नकरात्मक प्रभाव डालता है। इन सभी प्रभावों का संचयी प्रभाव शहरी ऊष्मा दव्ीप माना जाता है।

• यह किसी भी मानव निर्मित क्षेत्र के तापमान में वृद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है ″ इसे सुपरिभाषित रूप में आस-पास के क्षेत्रों के कम तापमान के प्राकृतिक परिदृश्य पर प्रतिनिधित्व करने वाले ″ ठंडे समंद्र ″ के बीच एक विशिष्ट ″ गर्म दव्ीप ″ के रूप में निरूपित किया जाता है।

• हालांकि ऊष्मा दव्ीप किसी भी ग्रामीण या शहरी क्षेत्र और किसी भी स्थानिक पैमाने पर निर्मित हो सकता है, परन्तु शहर इसके लिए इष्ट हैं क्योंकि उनकी सतह ऊष्मा की बड़ी मात्रा को मुक्त करने में प्रवण होती हैं।

• 1 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले एक शहर के ऊष्मा दव्ीप की हवा का औसत वार्षिक तापमान उसके आस-पास की अपेक्षा 1 - 3 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है, जो शाम को 12 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।

• ऊष्मा दव्ीप गर्मियों में ऊर्जा की मांग, वातानुकुल लागत, वायु प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन, गर्मी से संबंधित बीमारियों और मृत्यु दर में वृद्धि से समुदायों को प्रभावित कर सकते हैं।

• इसके प्रमुख कारण वाहन, गहरे रंग के फुटपाथ, बहुमंजिला इमारतें और एयर कंडीशनर (वातानुकूलित) हैं। इनमें से वातानुकूल यंत्र के उपयोग से एक दुष्चक्र पैदा होने के कारण यह सबसे प्रतिकूल है।

• ऊष्मा दव्ीप के प्रभाव को कुशल शीतलन प्रणाली विकसित करके, इमारतों के साथ पौधारोपण करके, परावर्तक रंगों के प्रयोग से फुटपाथ की सतह को ठंडा कर कम किया जा सकता है।