आर सी ई पी में अहितकारी प्रावधान (Inaccurate Provision in RCEP – International Relations India and the World)

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स्ुार्ख़ियों में क्यों?

• मेडिसिन्स (दवाई) सैन्स (संवदेन) फ्रंटियर्स (एमएसएफ) का डॉक्टर्स (चिकित्सक) विदाउत बॉर्डर्स (दो देशों की विभाजक सीमा) , जो एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ (गैर सरकारी संस्था) है, ने भारत को चेतावनी दी है कि अगर वह क्षेत्रीय व्यापाक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते में प्रस्तावित प्रस्तावों को अपनाता है तो भारत ‘विकासशील देशों का औषधालय’ नहीं रह पाएगा।

अहितकारी प्रस्ताव

• आरसीईपी वार्ता के दौरान चर्चा की गयी बौद्धिक संपदा संबंधी प्रावधानों के तहत ‘डाटा विशिष्टता’ और ‘पेटेंट अवधि विस्तार’ संबंधी मांगों पर सर्वाधिक चिंता व्यक्त की गयी है।

• डेटा (आंकड़े) विशिष्टता वस्तुत: किसी दवा के लिए पेटेंट (एकस्व अधिकार) संरक्षण से ऊपर कानूनी एकाधिकार संबंधी सुरक्षा का एक रूप है। यह सुरक्षा स्पष्ट रूप से क्लीनिकल (बिना सजावट/रोगियों को देखने और इलाज करने संबंधी) परीक्षण के दौरान किए गए निवेश के लिए दी जाती है। इसका अर्थ यह निकलता है कि नियामक अगले पांच साल के लिए इसी तरह के डेटा के वाली समान दवा को मंजूरी नहीं दे सके।

• पेटेंट अवधि विस्तार पेटेंट आवेदनों के निस्तारण में होने वाली देरी के लिए कंपनी (जनसमूह) की भरपाई हेतु दिया जाता है। एक पेटेंट अवधि विस्तार के तहत पांच साल का एक और एकाधिकार प्रर्वतक कंपनी को प्रदान किया जाएगा।

प्रभाव

• इसके कारण नई एकाधिकार नीतियों के बनने से दवा की लागत में वृद्धि होगी और साथ ही बाजार में सस्ती जेनरिक दवाओं के प्रवेश में भी देरी होगी।

• यह विकासशील देशों, कम और मध्यम दोनों आय वाले देशों सहित कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, म्यांमार आदि में लोगों के जिए जेनेरिक दवाओं के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को कमजोर करेगा।

• इन देशों में एचआईवी, टीबी, वायरल हेपेटाइटिस और गैर संचारी रोगों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों को संबोधित करने के लिए सस्ती जेनेरिक दवाओं तक इनकी पहुँच महत्वपूर्ण हैं।