श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन (नियोग) (Shayama Prasad Mukherjee Rurban Mission – Policies)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के कुरुभात नामक स्थान से राष्ट्रीय रुर्बन मिशन का शुभारंभ किया।

• रुर्बन मिशन पिछली सरकार के दव्ारा आरंभ पीयूआरए (ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं प्रदान करना) का स्थान लेगा।

उद्देश्य

• इन कलस्टरों में अधिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर तथा कौशल और स्थानीय उद्यमिता के विकास तथा बुनियादी ढांचा सुविधायें बढ़ाकर समूचे क्षेत्र का विकास किया जाएगा।

• यह योजना रुर्बन संबद्धि कलस्टरों के विकास के माध्यम से समूचे क्षेत्र का विकास का माध्यम बनेगी। इसके माध्यम से देश के ग्रामीण तथा शहरी दोनों ही क्षेत्रों को लाभ होगा।

• योजना के माध्यम से जहां एक ओर ग्रामीण विकास को सशक्त किया जाएगा वहीं दसरी ओर शहरी क्षेत्रों से अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सकेगा। इस प्रकार दोहरे उद्देश्यों की प्राप्ति के दव्ारा संतुलित क्षेत्रीय विकास किया जा सकेगा।

विशेषताएं

• रुर्बन मिशन (नियोग) से स्मार्ट (आकर्षक) गांवों के एक क्लस्टर का विकास होगा।

• ग्रामीण विकास मंत्रालय दव्ारा तैयार कार्यान्वयन ढांचे के अनुसार राज्य सरकार क्लस्टर की पहचान करेगी।

• इस मिशन के अंतर्गत तीन वर्षों में 5100 करोड़ रुपये के निवेश के दव्ारा 300 क्लस्टरों को विकसित किया जाएगा। इस साल 100 क्लस्टरों को परियोजना के अंतर्गत विकास के लिए चिन्हित किया जाएगा।

• इस योजना के तहत गांव के क्लस्टरों में 14 अनिवार्य घटकों से संबंधित विकास कार्यो को सुनिश्चित किया जाएगा। इनके अंतर्गत सभी क्लस्टरों में डिजिटल (अंकसंबंधी) साक्षरता, स्वच्छता, नल-जल आपूर्ति, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधाएं विकसित की जाएगी। यह योजना सामुदायिक परिसंपत्तियों के सृजन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, आश्रय स्थल, बिजली, पीने के पानी आदि के सुधार पर केन्द्रित होगी।

• ये क्लस्टर भौगोलिक दृष्टि से ग्राम पंचायत से संबद्ध होंगे जहां की जनसंख्या मैदानी क्षेत्रों एवं तटीय क्षेत्रों में 25000 से 50000 तथा रेगिस्तानी, पहाड़ी एवं आदिवासी क्षेत्रों में 5000 से 15000 तक होगी।

• रुर्बन क्लस्टर के विकास के लिए फंडिंग (कोष) इन क्षेत्रों में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से जुटाया जाएगा।

• मिशन के अंतर्गत केन्द्रीय अंश रूप में प्रति परियोजना लागत की 30 प्रतिशत की अतिरिक्त वित्तीय सहायता ’क्रिटिकल (विपत्कालीन) गैप (त्रुटि) फंडिंग’ के रूप में प्रदान की जाएगी, ताकि परियोजना के लिए आवश्यक धनराशि तथा उपलब्ध धनराशि के बीच के अंतराल को कम किया जा सके।

• मिशन के अंतर्गत समूचे कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सुचारु रूप से सुनिश्चित करने के लिए राज्य और केंद्र, दोनों ही स्तरों पर संस्थागत ढांचे के निर्माण की परिकल्पना निहित है।

• मिशन के अंतर्गत अनुसंधान, विकास और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया संपन्न करने के लिए एक अभिनव बजट की व्यवस्था की गयी है।

• जनजातीय और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में क्लस्टरों के चयन के संदर्भ में अलग-अलग दृष्टकोण अपनाया जाएगा।

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