Science and Technology: Education and Health, Educational Technology

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दैनिक जीवन में विज्ञान (Science in Daily Life)

जीवनशैली और परिवहन (Life Style and Transport)

ई बुक्स (E Books)

  • एक ई बुक सर्वमान्य मुद्रित पुस्तक का इलेक्ट्रॉनिक रूप होता है। इसे पर्सनल कम्प्यूटर या ई बुक रीडर का उपयोग कर पढ़ा जा सकता है। ई बुक कम्प्यूटर स्क्रीन पर डिजीटल फॉरमेट मेंं पढ़े जाते हैं। एक उपयोगकर्ता सीडी के रूप में या डाऊनलोडेड फाइल के रूप में ई बुक का उपयोग कर सकता है।
  • ई बुक में विभिन्न वैकल्पिक सुविधाएँ भी दी जाती हैं-पृष्ठों की बुकमार्किंग करना, नोट्‌स बनाना, गद्यांशों को रेखांकित करना, चयनित विषय वस्तु को सुरक्षित (Save) करना आदि।

ई बुक रीड 4000 पृष्ठों वाले टेवस्ट और ग्राफीक्स से लेकर 5 लाख पृष्ठों वाले टेवस्ट और ग्राफीक्स समाहित करते हैं। ई बुक्स के निम्नलिखित प्रमुख लाभ हैं-

  • सीमित स्थान में ही अत्यधिक सूचनाओं का संग्रहण
  • पुस्तकों को ई बुक वेबसाइट पर विभिन्न भाषाओं में अनुवादित किया जा जाना।
  • ई बुक को हल्की रोशनी या अंधेरे में भी पढ़ा जा सकता है।
  • ई बुक की सहायता से पाठक किसी विषय के बारे में और अधिक सूचना एकत्रित कर सकता है।

ओलेड (OLED)

  • सामान्य रूप में ओलेड टेलीविजन विकास में विकसित की गयी एक नवीन प्रौद्योगिकी है। OLED का पूर्ण नाम ऑर्गेनिक लाईट एमीटिंग डायोड है। इसमें कार्बनिक यौगिक से बना एक उत्सर्जी विद्युतप्रदीप्त परत फिल्म के रूप में कार्य करता है। यह फिल्म रूपी परत विद्युत धारा गुजरने की प्रतिक्रिया में प्रकाश उत्सर्जित करता है। कार्बनिक अर्द्धचालक से निर्मित यह परत दो इलेक्ट्रोडों के बीच स्थित होता है। सामान्यत: इनमें से एक इलेक्ट्रोड पारदर्शी होता है। टेलीविजन के पर्दों, कम्प्यूटर मॉनीटर, मोबाइल फोन और पीडीए जैसे उपकरणों में डिजीटल डिस्प्ले के लिए ओलेड का उपयोग किया जाता है। मुख्य रूप से सोलिड स्टेट लाइटिंग (Solid State Lighting) में श्वेत ओलेड का उपयोग प्रारंभ किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि सोलिड स्टेट लाइटिंग (SSL) प्रकाश उत्सर्जित करने वाले ऐसे उपकरण हैं जो विद्युत तंतु, प्लाज्मा या गैस की अपेक्षा प्रदीप्त स्रोत के लिए ओलेड का उपयोग करते हैं। सोलिड स्टेट लाइटिंग का इस्तेमाल प्राय: ‘ट्रैफिक लाइट्‌स’ आधुनिक वाहनो के लाईट, स्ट्रीट और पार्किंग लाईट, ट्रेन मार्कर लाईट आदि में किया जाता है।
  • ओलेड के मुख्यत: दो प्रकार होते है- एक वह जो छोटे-छोटे अणुओं से बनता है और दूसरा वह जो बहुलकों का उपयोग करता है। ओलेड में चलित आयन का इस्तेमाल किए जाने से प्रकाश उत्सर्जी विद्युत रासायनिक सेल निर्मित होता है। ओलेड डिसप्ले पैसिव मैट्रिक्स (PMOLED) या ऐक्टिव मैट्रिक्स का उपयोग करता है।
  • नोट: ऐक्टिव मैट्रिक्स एड्रेसिंग में सेल की अवस्था बनाए रखने के लिए कैपासिटर (Capacitor) का प्रयोग किया जाता है। जब सेल स्वयं ही दव्स्थायीत्व की प्रकृति अपना लेता है तो पैसिव मैट्रिक्स एड्रसिंग का उपयोग होता है अत: इसमें किसी बाह्य कैपासिटर की आवश्यकता नहीं होती है। एक ओलेड बिना बैक लाईट (Back Light) के ही कार्य करता है। अत: यह ब्लैक लेवल्स (Black Levels: चमक का वह स्तर जबकि पर्दे से प्रकाश उत्सर्जित न होता हो) को भी डिसप्ले कर सकता है। ओलेड एलसीडी से पतला और हल्का भी हो सकता है।

हाई डेफिनेशन टेलीविजन (HDTV)

  • डिजीटल टेलीविजन श्रेणी में उच्च स्तरीय रिजोल्यूशन प्रदान करने में हाई डेफिनेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। उल्लेखनीय है कि डिजीटल केबल तीन प्रारूपों में काम करते हैं- मानक, उन्नत और हाई डेफिनेशन। मानक प्रारूप में रिजोल्यूशन क्षमता 480i, उन्नत में 480P और हाई डेफिनेशन में 720p तथा 1080i होती है। अत: कहा जा सकता है कि हाई डेफिनेशन डिजिटल तो है लेकिन सभी डिजिटल हाई डेफिनेशन युक्त नहीं है।
  • नोट: 720p और 1080i का अर्थ-जब भी कभी हम टेलीविजन देखते हैं इसमें दिखने वाला तस्वीर स्कैन किए गए अनेक स्वतंत्र रेखाओं से बना होता है। एक साथ होने पर ये पर्दे पर प्रतिबिंब दर्शाते हैं। इन्टरलेस्ड (i: Interlaced) और प्रोग्रेसिव (P: progressive) दोनों स्कैनिंग तकनीक हैं जिनका उपयोग हाई डेफिनेशन टेलीविजन में किया जाता है। डिजीटल टेलीविजन में रिजोल्यूशन की रेखाएँ भिन्न-भिन्न (480,720 और 1080) होती हैं। अत: स्पष्ट है कि किसी टेलीविजन का रिजोल्यूशन रेखाओं और स्कैनिंग के प्रकार पर आधारित होता है। अर्थात 720p रिजोल्यूशन वाले टेलीविजन में 720 प्रोगेसिव स्कैंड रेखाएँ होती हैं। इसी प्रकार 1080i रिजोल्यूशन में 1080 इन्टरलेस्ड स्कैंड रेखाएँ होती हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य (Education and Health)

शिक्षा प्रौद्योगिकी (Educational Technology)

  • ई-लर्निंग के जरिए अध्ययन और नैतिक क्रियाकलापों की पद्धति को शिक्षा प्रौद्योगिकी के अंतर्गत रखा जाता है। इसके तहत उपयुक्त तकनीकी प्रकियाओं और संसाधनों का सृजनकर इनका उपयोग और प्रबंधन कर उन्नत शिक्षा व्यवस्था स्थापित की जाती है।
  • शिक्षा प्रौद्योगिकी के अंतर्गत सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, वीकीपीडिया, ब्लॉग जैसी प्रणालियों और क्रियाकलापों का उपयोग किया जाता है।
  • शिक्षा प्रौद्योगिकी के माध्यम से शिक्षार्थी को किसी विषय वस्तु के बारे में सीखने में सहायता मिलती है। शिक्षक की तकनीकों का विकास और इन तकनीकों का समावेश करने के लिए शिक्षा प्रौद्योगिकी का विस्तार किया जा सकता है। इस प्रौद्योगिकी के दव्ारा विविध माध्यमों के न्यायपूर्ण उपयोग तथा एकीकरण से शिक्षण और सीखने के उपागमों पर ध्यान दिया जाता है और संचार कौशल विकसित किया जाता है।

शिक्षा प्रोद्योगिकी को निम्नलिखित प्रकारों में विभाजित किया जाता है-

  • शिक्षण प्रोद्योगिकी (Teaching Technology)
  • निर्देशन प्रोद्योगिकी (Instructional Technology)
  • व्यावहारिक प्रौद्योगिकी (Behavioural Technology)
  • निर्देशन डिजाइन प्रोद्योगिकी (Instructional Design Technology)
  • शिक्षण प्रोद्योगिकी (Teaching Technology) : दार्शनिक, सामाजिक और वैज्ञानिक ज्ञाान के जरिए शिक्षण कार्य शिक्षण प्रोद्योगिकी के अन्तर्गत आता है। शिक्षण प्रोद्योगिकी निम्नलिखित अवधारणाओं पर आधारित है-
    • शिक्षण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और इसके दो मुख्य घटक हैं-सामग्री और संचार।
    • शिक्षण क्रियाकलापों को परिवर्द्धित और उन्नत किया जा सकता है।
    • फीडबैक के जरिए शिक्षण कौशल का विकास किया जा सकता है।
    • शिक्षण और सीखने की क्रिया के मध्य निकट संपर्क किया जा सकते हैं।
  • निर्देशन प्रोद्योगिकी (Instructional Technology) - सीखने की प्रक्रियाओं और संसाधनों के डिजाइन, विकास, उपयोगिता, प्रबंधन और मूल्यांकन के सिद्धांत और अभ्यास को इस प्रौद्योगिकी के अंतर्गत रखा जाता है। इस प्रौद्योगिकी का उपयोग शारीरिक शिक्षा में किया जाता है। शारीरकि प्रशिक्षक इस प्रौद्योगिकी के विभिन्न घटकों को उपयोग कर प्रशिक्षण देते हैं।
    • व्यावहारिक प्रौद्योगिकी (Behavioural Technology) - इस प्रौद्योगिकी में सीखने वाले शिक्षक के व्यवहार के विविध पहलुओं पर बल दिया जाता है। इसके अंतर्गत व्यक्ति के व्यवहार (उदाहरण के तौर पर शिक्षक) , उसका अध्ययन, फीडबैक और रूपांतरण सम्मिलित किया जाता है। शिक्षक दव्ारा दी जा रही शिक्षा में निहित माइक्रो टीचिंग, सिमुलेटेड टीचिंग, इन्टरैक्शन एनालिसिस तकनीकों को व्यावहारिक प्रौद्योगिकी में ही शामिल किया जाता है।
    • व्यावहारिक प्रौद्योगिकी निम्नलिखित अवधारणाओं पर आधारित है-
      • शिक्षक के व्यवहार का अवलोकन किया जाता है।
      • शिक्षक का व्यवहार सापंक्षिक होता है।
      • शिक्षक का व्यवहार सामाजिक और मनोवेज्ञानिक होता है। इससे तात्पर्य है कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परिस्थितियाँ शिक्षक के व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।
      • शिक्षक का व्यवहार रूपांतरणयोग्य (Modifiable) होता है।
  • निर्देशन डिजाइन प्रोद्योगिकी (Instructional Design Technology) - इस प्रोद्योगिकी के तहत ज्ञनान और कौशल की प्रापित को अधिक क्षमतपूर्ण, प्रभावी और आकर्षक बनाया जता है। इसके जरिए शिक्षण और व्यस्क शिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। इसमें मूलत: व्यवहारिक मनोविज्ञान की भूमिका होती है। हाल के समय में सृजनात्मकता को भी इस प्रोद्योगिकी के उपयुक्त टक के रूप में सम्िलित किया गया है।