Science and Technology: Nuclear Policy of India and Large Hadron Collider

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भारत की नाभिकीय नीति (Nuclear Policy of India)

भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड ने सरकार को 1992 में नाभिकीय नीति का प्रारूप सौंपा था। सरकार ने नाभिकीय नीति में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया है। प्रस्तावित नीति के प्रमुख तथ्यों का उल्लेख नीचे किया गया है:

  • भारत का मुख्य लक्ष्य शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विधियों दव्ारा आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और तकनीक विकास करना है।
  • इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारत दव्ारा स्थिरता के संभावित जोखिम के विरुद्ध शांति और सुरक्षा के लिए प्रयास किए जाएंगे।
  • भारत दव्ारा वैश्विक स्तर पर निशस्त्रीकरण का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में नाभिकीय न्यूनतम निवारण क्षमता बनाये रखने के प्रयास किए जाएंगे।
  • भारतीय परमाणु कार्यक्रम का लक्ष्य अन्य देशों दव्ारा इस प्रकार के हथियारों के संभावित प्रयोग को रोकना होगा।
  • भारत अपनी शांति और स्थिरता के लिए किसी भी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए तैयार रहेगा।
  • भारत प्रभावपूर्ण निगरानी और पूर्व चेतावनी की क्षमताओं को बनाए रखेगा।
  • जब तक किसी अन्य देश दव्ारा भारत पर परमाणु हथियारों का प्रयोग न किया जाए तब तक भारत देश विशेष के विरुद्ध परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं करेगा।
  • परमाणु निवारण संबंधी भारतीय सिद्धांत विश्वसनीय, प्रभावशाली तथा दृढ़ बने रहेंगे।
  • नाभिकीय संरक्षा पर विशेष बल दिया जाएगा।
  • सूचना और संचार तंत्र को सुदृढ़ बनाकर पूर्व चेतावनी प्रणाली का विकास किया जाएगा।
  • भारत अपनी गुप्तचर प्रणालियों को सुदृढ़ बनाएगा।
  • भारत दोहरी सक्षम वितरण प्रणाली को सुनिश्चित करेगा।
  • तकनीकी उन्नतियों को बनाए रखने के लिए उन्नत अनुसंधानों पर बल दिया जाएगा।
  • हथियारों को नियंत्रत करने के उपायों को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का अंग बनाया जाएगा।

हाल ही में भारत ने अमेरिका के साथ हुए अपने समझौते में यह स्पष्ट किया है कि वह अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों को सैनिक और असैनिक श्रेणियों में चरणबद्ध रूप से विभक्त करेगा। इस संदर्भ में विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से भारत की नाभिकीय नीति के संबंध में कई पहलुओं का उल्लेख किया जा सकता है।

  • परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग नीति की सबसे बड़ी विशेषता कहीं जा सकती है। भारत ने वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए पारस्परिक सहयोग की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। साथ ही, ऊर्जा की निरंतर बढ़ती मांगों के अनुरूप ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के संदर्भ में प्रयास भी किए जा रहे हैं। दूसरी ओर, निगरानी और पूर्व सूचना प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर देने की बात कही गई हैं भारत ने नीति के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि गुप्तचर और कमान नियंत्रण प्रणालियों को सुदृढ़ बनाकर ही राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती हैं। हाल के वर्षों में इस दिशा मं कई नई तकनीके भी विकसित की गई हैं जिनमें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकसित कई तकनीकें भी शामिल हैं। भारत दव्ारा अंतरिक्ष-आधारित संचार प्रणाली को सुदृढ़ बनाया जाना इस दिशा में किया गया एक सराहनीय प्रयास है। विकासोन्मुखी तथा सामरिक पहलूओं के संदर्भ में नये परमाणु संयंत्रों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित है। इसे नीति का एक सकरात्मक पक्ष कहा जा सकता है। लेकिन इसके साथ-साथ भारत ने कहा है कि अपनी न्यूनतम निवारण क्षमता बनाए रखते हुए वह अन्य देशों के साथ मिलकर ऐसे हथियारों के प्रयोग को रोकने के लिए हर संभव प्रयास भी करेगा।
  • सबसे बड़ी बात यह है कि अपनी इस नीति में भारत ने ‘पहले पहले नहीं करने’ के सिद्धांत की व्याख्या की है। इससे स्पष्ट है कि भारत की नाभिकीय नीति एक ओर शांतिवादिता का प्रतीक है तथा दूसरी ओर यह भारत के सशक्त होने का प्रमाण भी है।

लार्ज हैड्रन कोलाइडर (Large Hadron Collider)

  • परमाणु में उपस्थित कणों विशेषकर प्रोटोन तथा उसमें उपस्थित दो अप क्वार्क और एक डाउन क्वार्क से निर्मित हैड्रोन की टकराहट से उत्सर्जित होने वाली कणिकाओं और ऊर्जा के व्यवहार का अध्ययन करने वाली यह अंतरराष्ट्रीय परियोजना है जिसका प्रचालन ई. यू. की एजेंसी सर्न दव्ारा किया जा रहा है।
  • इस परियोजना में शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का प्रयोग करने वाले एक 29 किमी. सुरंग में परमाण्विक कणों की दो पुंजो को टकराया गया। यह टकराव उनकी अधिकतम गति पर चार स्थानों पर हुआ। इससे उत्पन्न होने वाली अन्य कणिकाओं से ऊर्जा व्यवहार का अध्ययन इस परियोजना का मूल उद्देश्य है। यह अध्ययन (Big Bang Theory) और ब्रह्यांडीय ऊर्जा की उपस्थिति के संदर्भ में किया जा रहा है। यह आशा की गई है कि इस परियोजना की सफलता के बाद कणिका भौतिकी के क्षेत्र में अनुसंधान की नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी।

सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology)

दूरसंचार क्षेत्र की वर्तमान स्थिति (Present State of Telecom Sector)

  • विगत दो दशकों में दूरसंचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। इस संवृदि दर को बनाए रखने के लिए सेवा प्रदान करने वाले दो विभागों को एकीकृत कर दिया गया है। ये विभाग हैं:- दूरसंचार सेवा विभाग (Department of Telecom Services, DTS) तथा दूरसंचार संचालन विभाग (Department of Telecom Operations, DTO) ।
  • दूरसंचार के क्षेत्र में सरकार ने अत्यावश्यक मुद्दों पर विशेष बल देने का निर्णय किया है। साथ ही, निजी क्षेत्र की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया है। इससे निश्चित रूप से निवेशकों को विश्वास में लिया जा सकेगा जो अन्तत: दूरसंचार के क्षेत्र में आवश्यक अवसंरचनाओं को भी सुदृढ़ बनाएगा।
  • त्वरित सामाजिक-आर्थिक विकास की कुँजी के रूप में दूरसंचार के विकास हेतु प्रयास किए जा रहे हैं। हांलाकि भारत में टेली घनत्व का विस्तार हुआ है लेकिन अब भी चीन और ब्राजील की तुलना में कमी बनी हुई है। चीन और ब्राजील में टेली घनत्व लगभग 40 है जबकि भारत में यह केवल 6.6 है। टेली घनत्व में वृद्धि के लिए भारी मात्रा में निवेश आवश्यक है। निवेश के प्रमुख स्त्रोत के रूप में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment, FDI) का उल्लेख समीचीन है। हाल ही में दूरसंचार के क्षेत्र में ऐसे निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई है।
  • इसके अतिरिक्त, दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority, TRAI) ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मद्देनजर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये हैं। सेल्युलर फोन के लिए विनियमाकों की स्थापना की गई है। साथ ही, प्राधिकरण ने विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन नेटवर्क के विस्तार के लिए सेवा उत्तरदायित्व के सार्वभौमिकीकरण का सुझाव दिया है।
  • अब तक का सबसे महत्वपूर्ण प्रयास ब्रॉडबैंड नीति की घोषणा कर किया गया है। इसके पूर्व इंटरनेट टेलीफोनी की सुविधा भी प्राधिकरण के निर्देशन में उपलब्ध कराई गई हैं।