Science and Technology: Robotics and Research and Development

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रोबोटिक्स (Robotics)

रोबोट के डिजाइन, निर्माण व उसके अनुप्रयोगों का अध्ययन रोबोटिक्स के अंतर्गत किया जाता है। इस विज्ञान में इलेक्ट्रॉनिक सॉफ्टवेयर व यांत्रिकी का कार्यकारी ज्ञान होना आवश्यक है। यद्यपि रोबोट की क्षमता व स्वरूप भिन्न होता है किन्तु सभी के अंदर यांत्रिकी व गतिशील संरचनाएँ अवश्य होती हैं। रोबोट की संरचना को काइनामोटिक सीरीज भी कहते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार रोबोट वह यंत्र है जो मनुष्य दव्ारा किए जाने वाले शारीरिक कार्यो को करता है। इसके निर्माण के लिए 3 बाते आवश्यक होती हैं-

  • ऐसी तकनीक का विकास जिससे रोबोट संकेतों को समझ सके, इसके लिए सेंसर का प्रयोग किया जाता है और सामान्यत: यह सेंसर ध्वनि या स्पर्श पर आधारित होते हैं।
  • आदेशों व संकेतों को विश्लेषित करने तथा उसके अनुरूप कार्य करने के लिए माइक्रोप्रोसेसर की आवश्यकता होती है।
  • शारीरिक क्रियाविधि के लिए (Armatures) का प्रयोग आवश्यक होता है।

रोबोट के सूक्ष्म कम्प्यूटर में कार्यप्रणाली का क्रम एवं उसकी गतिविधियों के प्रोग्राम संग्रहित होते हैं। इस प्रोग्राम के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य के निष्पादन की क्षमता रोबोट में नहीं होती है। वर्तमान में रोबोटिक्स 3 पीढ़ियों से होकर गुजरा है।

अनुसंधान एवं विकास (Research and Development)

  • ‘जो इंजेल बर्गर’ को रोबोट का जनक माना जाता है क्योंकि यूनीमेट्‌स नामक पहले यांत्रिक श्रमिक का निर्माण जो इंजेल बर्गर ने ही किया था।
  • रोबोट आवाज व प्रकाश दोनों के प्रति संवेदनशील होते हैं। यदि उनके रास्ते में कोई रुकावट अथवा बाधा आ जाये तो उससे बचकर निकल जाते हैं। अपने अंदर लगे कैमरों की मदद से वे देख सकते हैं और संवेदकों की सहायता से स्पर्श का अनुभव भी कर सकते हैं।
  • परन्तु क्या रोबोट मुनष्य की जगह ले पाएगा? इस प्रश्न के जवाब में प्रो. अलेक्जेंडर कहते हैं कि मनुष्य ऐसी मूर्खता कभी नहीं करेगा कि वह मनुष्य कर नियंत्रण स्थापित करने वाला रोबोट बनाए।
  • ऐसी भी संभावना व्यक्त की जा सकती है कि इस तरह का रोबोट तैयार किया जाएगा, जिसके मस्तिष्क में किसी मनुष्य विशेष पर आधुनिकतम हथियारों की मदद से जानलेवा हमला करने की कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग की गई हो। इस पर प्रो. वार्विक का कहना है कि रोबोट को तेज दिमाग जरूर दिया जाएगा परन्तु उसे मनुष्य की हत्या जैसे निर्देशों से दूर रखा जाएगा क्योंकि ऐसा रोबोट बनाना मानव सभ्यता के लिए घातक सिद्ध हो कसता है।

आईजैक असीमो नामक लेखक ने रोबोटों को लेकर तीन नियमों की रचना की है:-

  • यंत्र मानव दव्ारा मनुष्य को नुकसान नही पहुँचाया जाना चाहिए अथवा उसकी निष्क्रियता भी मनुष्य के लिए घातक नहीं होनी चाहिए।
  • रोबोट दव्ारा मनुष्य की आज्ञाओं का पालन किया जाना चाहिए, किन्तु आज्ञाओं के पालन से प्रथम नियम भंग नहीं होना चाहिए।
  • यंत्र मानव दव्ारा अपने अस्तित्व की रक्षा स्वयं की जानी चाहिए। यदि इससे प्रथम दो नियम भंग होते हैं तो उसे स्वयं का अस्तित्व समाप्त कर लेना चाहिए

इन तीनों नियमों का पालन रोबोट दव्ारा किया जा रहा है अथवा नहीं, यह देखने का कार्य रोबोट बनाने वाले का है। अनेक बार रोबोट का प्रयोग मात्र चीजें इस्तेमाल करने तक ही नहीं रहना चाहिए, बाहरी वातावरण से जानकारी ग्रहण कर उसका अर्थ समझने की क्षमता भी उसमें होनी आवश्यक है।

  • प्रो. . वार्विक मानते हैं कि यदि रोबोट मनुष्य से अधिक बुद्धिमान प्राणी है तो इस बुद्धिमान प्राणी की संरचना में सोचने समझने की क्षमता डालना कोई असंभव कार्य नहीं है और ऐसा होने पर रोबोट स्वामी और मानव उसका दास बन जाएगा।
  • भविष्य में रोबोट समुद्र की गहराइयों में जारी संशोधन, विषैली गैसों से युक्त कोयला खानों, रेडियो सक्रिय पदार्थों, निर्वात एवं आण्विक उर्जा केंद्र जैसी जानलेवा जगहों पर काम करते दिखाई देंगे। स्वचालित, तीव्र गति वाले वाहनों को नियंत्रित करने के लिए तो इनका उपयोग शुरू भी हो चुका है। आने वाले समय में ऊँची ऊँची गगनचुंबी इमारतों में मानव मजदूरों के स्थान पर रोबोट ही कार्य करते दिखाई देंगे। आज शल्य क्रिया में रोबोट या तो चिकित्सकों की मदद कर रहें हैं अथवा संपूर्ण शल्यक्रिया ही रोबोट की मदद से करना संभव हो गया है। खेत-खलिहानों में भी रोबोट पहुँचाने की तैयारी की जा रही है।
  • फिलहाल तैयार किए गए रोबोट का मस्तिष्क 500 न्यूरॉन क्षमता युक्त है, जबकि मानव मस्तिष्क की क्षमता एक सौ अरब न्यूरॉन्स है। इतनी अधिक क्षमता का मशीनी मस्तिष्क तैयार करना कठिन ज़रूर है लेकिन असंभव नही।
  • लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के प्रो. इंगार अलेक्जेंडर का मानना है कि कृत्रिम मस्तिष्क के इस्तेमाल की ललक बढ़ रही है। परिणामस्वरूप पालतू जानवरों की जगह भविष्य में रोबोट्‌स ले लेंगे।

रोबोट का निर्माण (Creation of Robot)

रोबोट का निर्माण करते समय हमें भौतिकशास्त्र, इलेकट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी, विभिन्न धातुओं, प्लास्टिक के टुकड़ों समेत कम्पयूटर प्रोग्रामिंग के ज्ञान की भी आवश्यकता होती है।

  • भौतिकशास्त्र (Physics) : रोबोट की हलचल पर नियंत्रण रखने के लिए भैतिकशास्त्र का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि रोबोट पर भी गुरुत्वाकर्षण के नियम लागू होते हैं। हलचल करते समय, दौड़ते या घूमते समय इस पर गति के नियम लागू होते हैं। इन नियमों के अध्ययम के बिना रोबोट्‌स के निर्माण को कल्पना करना असंभव है। चंद्रमा अथवा अन्य ग्रहों पर जाने वाले रोबोट्‌स का वहाँ के नियमों के अनुरूप तैयार किया जाता है तभी उनसे वांछित परिणाम प्राप्त किये जा सकेंगे।
  • अभियांत्रिकी (Engineering) : रोबोट्‌स की हलचल में अनेक प्रकार के मोटर्स, गियर व स्विच की सहभागिता होती है। इस हलचलों को सूक्ष्म नियंत्रकों दव्ारा नियंत्रित किया जाता है। अत: इलेक्ट्रोनिक्स अभियांत्रिकी के अध्ययन के बिना रोबोट का निर्माण संभव नही है। मशीनी हाथ को कितना उपर उठाने में कितना बल लगेगा, इस कार्य को कौन से रिले स्विच अथवा माइक्रोमोटर की सहायता से पूरा किया जाएगा, इस बात का निर्धारण इलेक्ट्रोनिक्स परिपथों दव्ारा किया जाता है।
  • धातु एवं प्लास्टिक (Metal & Plastic) : धातु एवं प्लास्टिक का उपयोग रोबोट के विभिन्न पुर्जों के निर्माण के लिए किया जाता है। इनके नियमित इस्तेमाल के बाद भी यह ठीक तरह से कार्य करते रहें, इसके लिए मेटलर्जी व प्लास्टिक का ज्ञान होना ज़रूरी है।
  • कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग (Computer Programming) : इस तकनीकी के बिना तो रोबोट का निर्माण पूरा होना संभव ही नहीं है। समय बीतने के साथ-साथ रोबोट को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग दव्ारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

रोबोट्‌स में देखने, सुनने व काम करने की क्षमता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ाना जरूरी होता है। जिस प्रकार कार्य में अड़चन आने पर मनुष्य अधिक बुद्धि का इस्तेमाल करता है, उसी प्रकार का कार्य करने वाले रोबोट्‌स का निर्माण अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।