उत्तराधिकारी के रूप में बेटी (Daughter As Heir – Social Issues)

Glide to success with Doorsteptutor material for CTET-Hindi/Paper-1 : get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-1.

Download PDF of This Page (Size: 136K)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक फैसले में घोषणा की है कि बड़ी बेटी हिंदू अविभाजित परिवार की संपत्ति की कर्ता हो सकती है।

पृष्ठभूमि

§ हिंदू उत्तराधिकर अधिनियम के तहत कर्ता हिंदू अविभाजित परिवार की संपत्ति के वारिसों में एक सहदायिक या उनमें सबसे बड़ा होता है।

§ कर्ता के पास परिवार के बाकी सदस्यों की सहमति के बिना संपत्ति और कारोबार के प्रबंधन का अधिकार होता है।

§ हिंदू अविभाजित परिवार ’संयुक्त परिवार’ से अलग है क्योंकि यह विशुद्ध रूप से पैतृक संपत्ति के राजस्व आकलन से संबंधित है।

§ इसमें संपत्ति को बेटों और बेटियों के बीच विभाजित नहीं किया जाता और इसमें ससुराल-पक्ष के लोगों को शामिल नहीं किया जाता।

§ हिंदू अविभाजित परिवार सभी हिंदुओं और उन सभी लोगों पर लागू होता है जो मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहुदी नहीं हैं। इसमें बौद्ध, सिख और जैन भी शामिल हैं।

§ 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन के बाद, बेटियों सहित परिवार में पैदा हुए सभी सदस्यों को संपत्ति में समान अधिकार प्रदान कर दिया गया।

§ दिल्ली उच्च न्यायालय दव्ारा हाल ही में दिए गए निर्णय के अनुसार परिवार की बड़ी बेटी कर्ता हो सकती है, जबकि दूसरे पक्ष का तर्क था कि बेटियों को केवल संपत्ति में हिस्सा मिल सकता है, संपत्ति प्रबंधन का अधिकार नहीं।

§ न्यायालय के अनुसार विवाहित बेटियाँ भी कर्ता की भूमिका निभा सकती हैं।

§ हिंदू अविभाजित परिवार विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच अंतर नहीं करता और हिंदू पुरुषों और महिलाओं को उत्तराधिकार का समान अधिकार देता है।

§ चुनौती यह है कि वास्तव में बहुत कम महिलायें व्यापार और संपत्ति के प्रबंधन मेें कार्य करती हैं।

Developed by: