ऑस्ट्रेलिया का भूगोल (Geography of Australia) Part 5 for Uttarakhand PSC

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जलवायु विशेषता

ऑस्ट्रेलिया का उत्तरी भाग उष्ण है, मध्यवर्ती भाग उपोष्ण है तथा दक्षिणी भाग शीतोष्ण जलवायु के अंतर्गत आता है। इसकी दिशा उत्तर से दक्षिण की ओर होती है। अत: पूर्वी तट सदैव गर्म रहता है और पर्याप्त वर्षा होती है। ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर पश्चिमी ऑस्ट्रेलियन ठंडी जलधारा चलती है तथा इसकी दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है। इसके प्रभाव से पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में मरूस्थल है। ऑस्ट्रेलिया का उत्तरी भाग एलनिनों गर्म जलधारा का क्षेत्र है। एलनिनो के प्रभाव से उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में अक्सर सूखा और अकाल पड़ता है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से सालोभर समुद्र की तरफ वायुधारा चलती है जिसका कारण यहां उपोष्ण उच्च भार का होता है। उपोष्ण उच्च भार से दक्षिण-पूर्व तथा उत्तर-पश्चिम की ओर हवा चलती है। द.पू. की ओर चलने वाली वायु सन्मार्गी वायु है। यही वायु एलनिनो को खींचकर भारत तक ले आता है।

ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिमी भाग में चक्रवात आते है। इस चक्रवात का नाम विलीबियज है, जो ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ में (अक्टू-नव) आते हैं या फिर मार्च में आते है। यह एक शीतोष्ण चक्रवात है जो भारत से कम बर्बादी लाती है, क्योंकि यह निर्जन स्थान से गुजरती है।

वर्षा

ऑस्ट्रेलिया में पूर्वी तटीय भाग में व्यापारिक पवनों से तथा तस्मानिया में पछुवा हवाओं के चलने से वर्ष भर वर्षा हो जाती है। (150 से.मी. से अधिक)

  • उत्तरी ऑस्ट्रेलिया मानसून हवाओं से प्रभावित प्रदेश है। इसके अंतर्गत उत्तरी ऑस्ट्रेलिया,उ. पू. न्यू साउथ वेल्स तथा क्वींसलैंड आते है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु में (नव. दिस. से फरवरी तक) विषुवत रेखा की ओर से उत्तरी पश्चिमी मानसुन हवाएँ चलती है, जिससे वर्षा होती है। इस क्षेत्र में औसत वर्षा (75-150 से.मी) तक होती है।

  • ऑस्ट्रेलिया के सुदूर दक्षिणी -पश्चिमी एवं दक्षिणी -पूर्वी भागों में शीतकाल में शीतोष्ण चक्रवातों से वर्षा हो जाती है।

  • अस्ट्रेलिया का लगभग 50 प्रतिशत भाग मरुस्थल से घिरा है। यह शुष्क प्राय: प्रदेश है। यहां पर वर्षा 5-20 से.मी के मध्य होती है।

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