जापान का भूगोल (Geography of Japan) Part 3 for Uttarakhand PSC

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पर्वत श्रृंखलाएँ-

जापान की सभी पर्वत श्रृंखलाएं चापाकार हैं। ये हैं-

  • काराफूतो श्रेणी- वस्तुत: यह श्रेणी सखालिन दव्ीप श्रृंखला का ही विस्तृत भाग है जो जापान में उत्तर-पश्चिम दिशा से प्रवेश करती है।

  • चिशिमा या क्यूराडल रेणी- यह श्रेणी होकैडो दव्ीप में उत्तर-पूर्व से प्रवेश कर इस दव्ीप के पूर्वी उच्च प्रदेशों का निर्माण करती हुई द. प. दिशा में अग्रसर होती है होकैडो के दक्षिण भाग में क्यूराइल, काराफूलो और दक्षिण से आने वाली टोहोकू श्रेणियां एक स्थान पर मिलकर उच्च पर्वतीय गाँठ को जन्म देती है, जिसे ’होकैडो की छत’ कहते हैं।

  • टोहोकू श्रेणी- इस श्रेणी का विस्तार मध्य होन्शू से उत्तर की ओर होकैडो के दक्षिणी प्रायदव्ीपीय भाग तक है। होन्शू के मध्य उत्तरी भाग में यह पर्वत क्रम तीन सामान्तर श्रेणियों में विभक्त हैं।

  • सइनान श्रेणी-यह पर्वत श्रेणी होन्शू से द. प. की ओर फैली है। यह श्रेणी शिकोकू एवं क्यूशू दव्ीपों तक विस्तृत है। इसी के विस्तृत भाग दव्ारा चिगोकू प्रायदव्ीप का निर्माण हुआ है।

  • बोनिन श्रेणी- यह पवर्त श्रेणी दक्षिण की ओर से आकर मध्य होन्शू में सेडनान क्रम में मिलती है। इस श्रेणी का अधिकांश भाग समुद्र में जलमग्न है, इसलिए इसको ’थिचितो मैरियाना’ क्रम के नाम से पुकारते हैं। इसी पर्वत क्रम से संलग्न भ्रंश घाटी को ”फोसा मैग्ना” के नाम से जाना जाता है।

मध्य होन्शू में सेडनान तथा थिचितो मैरियाना श्रेणियों के मिलने से जापान के सर्वोच्च पर्वतीय गांठ ’जापानी आल्टस’ का निर्माण हुआ है। इसकी सर्वोच्च चोटी पारिगो को ’जापानी मैटरहाने’ के नाम से पुकारा जाता है।

रिउक्यू श्रेणी- यह पर्वत श्रृंखला क्यूश दव्ीप में दक्षिण-पूर्व दिशा से प्रविष्ट होती है। क्यूशू दव्ीप में सेडनान तथा रिउक्यू श्रेणियां परस्पर मिल जाती है, जिससे एक पर्वतीय गांठ बन गया है।

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