पश्चिमी यूरोप का भूगोल (Geography of Western Europe) Part 11 for Uttarakhand PSC

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कृषि संसाधन:-

  • पश्चिमी यूरोप- यहाँ साधारण गर्मी और जाड़े में साधारण ठंडा मौसम रहता हैं, वर्ष भर हल्की वर्षा होती है। अत: सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

  • गेहूँ प्रधान खाद्यान्न फसल है और जौ, जई, राई, चुकन्दर एवं आलू अन्य खाद्य तथा चरी फसलें है।

  • उपजाऊ भूमि और घनी जनसंख्या के कारण अधिकाधिक उत्पादन लेने के लिए दो विशेष विधियाेें का सहारा लिया जाता है-

  • सघन खेती

  • फसल चक्र

  • पश्चिमी उत्तरी यूरोप में मिश्रित कृषि की जाती है। डेनमार्क, नीदरलैंड, बेज्यियम, उ.प., फ्रांस, यूनाइटेड (संयुक्त) किंगडम (राज्य) आयरलैंड आदि प्रदेश दूध देने वाले पशुओं के पालन के लिए विश्वप्रसिद्ध है।

  • डेनमार्क ”विश्व का सबसे अधिक बड़ा गोशाला” माना जाता है।

  • मिश्रित खेती वाले पश्चिमी यूरोप में फार्म (खेत) छोटे होते हैं क्योंकि प्रति व्यक्ति भूमि की कमी है। गायों के अतिरिक्त यहाँ भेड़, सूअर और मूर्गियां भी पाली जाती है, मुख्यत: मांस के लिए।

  • भूमध्यसागरीय यूरोप-यहाँ की कृषि भूमध्यसागरीय कृषि के नाम से प्रसिद्ध है।

  • इस कृषि प्रदेश को ’विश्व की उद्यान भूमि’ कहा गया है।

  • यहाँ नींबू, नारंगी, अंगूर आदि रसदार फलों के उद्यान लगाए गए है। यहाँ रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियाँ मिलती है।

  • स्पेन उत्तम कोटि की नारंगी के निर्यात के लिए, दक्षिणी फ्रांस अंगूरी शराब के निर्यात के लिए और ग्रीस मुनक्का निर्यात के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र जैतून उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

  • जाड़े में वर्षा होने के कारण खाद्यान्नों में सर्वप्रधान गेहूँ है और जौ।

  • इटली, स्पेन में ग्रीष्म काल में सिंचाई की सहायता से धान की खेती की जाती है।

  • द. इटली, मध्य स्पेन, ग्रीस आदि में निर्वाहन कृषि की प्रधानता है।

  • उ. इटली द. फ्रांस और स्पेन के तटीय भाग में व्यापारिक कृषि की जाती है।

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