पश्चिमी यूरोप का भूगोल (Geography of Western Europe) Part 3 for Uttarakhand PSC

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संरचना और प्राकृतिक स्वरुप की दृष्टि से यूरोप के तीन स्पष्ट विभाग है-

  • उत्तर पश्चिम का अति प्राचीन उच्च भूमि

  • मध्य का विशाल मैदान

  • दक्षिण के पर्वतीय भाग

उत्तर पश्चिम का अति प्राचीन उच्च भूमि

  • यह यूरोप का अति प्राचीन भूभाग है, जिसके अंतर्गत नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड, कोला प्रायदव्ीप, ब्रिटिश दव्ीपपुंज की पहाड़ियां और आइसलैंड आते हैं। ये सभी पहले आपस में मिले हुए थे और एक महादेश बनाते थे। नार्वें, स्वीडन, फिनलैंड और कोला प्रायदव्ीप को संयुक्त रूप में फेनोस्कैंडिनेविया कहते हैं। ब्रिटिश दव्ीप पुंज में स्कॉटलैंड की उच्चभूमि, इंगलैंड की पेनाइन पहाड़ी और उ.प. आयरलैंड की पहाड़ियाँ आती हैं।

  • नार्वे का सर्वोच्च प्रदेश फेल्ड कहलाता है, जिसमें गोल्डहोपिन और ग्लिठेरिंड की ऊँचाई लगभग 2700 मीटर है। ये फेल्ड वर्ष भर हिमाच्छादित रहते हैं और यहां हिमनद मिलते हैं। हिमनद की प्राचीन घाटियों के निम्न भाग जलमग्न होने से फियोर्ड तट मिलते हैं। सोगनी फियर्ड यहां का सबसे लंबा फियोर्ड हैं। यहाँ तटों के समीप कोई डेढ़ लाख छोटे दव्ीप मिलते हैं। छोटे-छोटे दव्ीपों की पंक्ति को स्केरीगार्ड कहा जाता है।

  • स्वीडन का अधिकतर भाग पठारी है। अधिकतम ऊँचाई उत्तर की ओर है।

  • फिनलैंड प्राचीन चट्टानों का निम्न पठार है। यहाँ पचासों हजार झीलें हैं, अत: इसे ’असंख्य झीलों का देश’ कहा गया है।

  • स्कॉटलैंड और आयरलैंड की चट्टानें एक सी पुरानी है। इसका सर्वोच्च भाग बेन नेव (1343 मी.) है। पेनाडन में आग्नेव और रूपान्तरित दोनों चट्टानें मिलती हैं।

  • आइसलैंड की उच्च भूमि हिमयुग में हिमाच्छादित था। आज भी इसका 1/8 भाग हिमाच्छादित है। यहाँ अनेक ज्वालामुखी मिलते है, जिनमें कुछ सक्रिय हैं जैसे-हेक्लों, डिंग्जूफॉल। यहाँ अनेक गर्म झरने और ग्रेसर है, जिसमें ’ग्रैड गेसर’ सर्वप्रमुख है। यहाँ भी फियोर्ड तट मिलते हैं।

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