विश्व के प्रमुख प्राकृतिक प्रदेश (Major natural areas of the world) Part 1 for Uttarakhand PSC

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हर्बटसन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ’major (मुख्य) mahiral region (क्षेत्र) or (अथवा) the (वह) world’ (संसार) में विश्व को 13 प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में बांटा हैं।

विषुववृत्तीय प्रदेश:-

स्थिति एवं विस्तार:- यह प्राकृतिक प्रदेश विषुववृत्तीय रेखा के दोनो ओर 50 नार्थ (उत्तर)-50 साउथ (दक्षिण) अक्षांश के बीच स्थित हैं। प्रमुख क्षेत्र हैं-

  • आमेजन बेसिन

  • गिनी तट एवं कांगो बेसिन

  • दक्षिण पूर्वी दव्ीप समुह एवं मलय प्रायदव्ीप (बोनियों प्रदेश)

जलवायु विशेषताएँ-

  • तापमान सालो भर ऊँचा रहा है। औसत वार्षिक तापमान लगभग 270 c रहता है।

  • वार्षिक तापांतर काफी कम (लगभग 20 c होता है। दैनिक तापांतर भी कम (120 c तक) होता है।

  • आपेक्षिक आर्द्रता काफी अधिक (80 प्रतिशत से भी अधिक) होती है।

  • वर्षा सालोभर होती है। संवहनक वर्षा होती है। तीव्र वाष्पीकरण के कारण दोपहर के पश्चात तीसरे पहर बिजली की चमक एवं कड़क के साथ (तड़ित झंझा) मूसलाधार वर्षा होती है।

  • कुल वार्षिक वर्षा 200 से.मी. से भी अधिक होती है।

प्राकृतिक वनस्पति एवं जीव जन्तु-

  • सालभर उच्च आर्द्रता एवं उच्च तापमान के कारण सघन चिरहरित वन पाए जाते हैं।

  • वृक्षों की पत्तियां चौड़ी एवं सघन होती है। सूर्य की किरणें धरातल तक नहीं पहुँच पाती है एवं सदैव अंधेरा रहता है।

  • वृक्ष काफी लंबे (60 मीटर तक) होते हैं, एवं इनकी लकड़ियां कड़ी होती हैं। जंगली लताएँ वृक्षों पर चढ़ी होती है। इन जंगलों को सेल्वास कहा जाता है।

  • इस प्रदेश में मुख्यत: महोगवी, गटापाची, रबड़, एबोनी, रोजवुड, ताड़ आदि के वृक्ष पाए जाते हैं।

आर्थिक विकास-

  • इन प्रदेशों में विभिन्न प्रकार की जनजातियाँ निवास करती है। कांगो बेसिन में पिग्गी जैसी जनजातियां वृक्षों पर घर बनाकर रहती है। आमेजन

  • इस प्रदेश की उष्ण एवं आर्द्र जलवायु स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुपयुक्त है। यह प्रदेश सुस्ती के लिए जाना जाता है। इसे शक्ति हीनता का प्रदेश भी कहा जाता है।

  • निश्चित वन तथा वृक्षों की लकड़िया कड़ी होने के कारण ये वन आर्थिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हैं।

  • यह प्रदेश मृदा अपरदन की समस्या से बुरी तरह शामिल है।

  • विषुववृत्तीय प्रदेश के सर्वाधिक विकसित क्षेत्र मलेशिया, श्रीलंका एवं इंडोनेशिया है, जहां जंगलों की कटाई करके रबड़, नारियल, ताड़ गन्ना, कोको आदि की कृषि की जाती है। उसके अलावा इस प्रदेश में चाय, कहवा, मिर्च, सुपारी, साबुदाना, केला, केनैन आदि की कृषि बड़े पैमाने पर की जाती हैं।

  • यह प्रदेश खनिज संसाधन की दृष्टि से गरीब है। यहा मुख्यत: टिन, कोयला, पेट्रोलियम, गेफाइट, मैंगनीज पाया जाता हैं।

  • इन प्रदेशों के अविकसित होने का पमुख कारण अनुप्रयुक्त जलवायु तथा यातायात साधनों का अभाव हैं।

  • यह प्रदेश सर्वाधिक जैविक विविधता का क्षेत्र हैं।

  • यह जानलेवा मक्खियों तथा मच्छरों इत्यादि का क्षेत्र हैं।

  • विषुववृत्तीय प्रदेश को जॉन (क्षेत्र) ऑफ (का) क्लेम (नमी) भी कहा जाता हैं इसे नाविक दिशाविहीन प्रदेश भी कहते रहे हैं।

  • यह मौसम विहीन प्रदेश हैं।

  • इस को zone (क्षेत्र) of (का) interropical (अंत:उष्णकटिबंधीय) convergence (अभिसरण) कहा गया हैं यहाँ दो सन्मार्गी वायु आपस में आकर विषुवतीय ताप रेखा पर मिलते हैं।

  • इन क्षेत्रों में बगानी कृषि तथा खनन का विकास हुआ है।

  • सर्वाधिक कम तापांतर मार्शल दव्ीप में तथा स्थल भाग पर पारा (ब्राजील) नामक जगह पर होता हैं।

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