ब्रिटिश सरकार की प्रशासनिक एवं सैन्य नीतियाँ (Administrative and Military Policies of British Government) Part 18 for Uttarakhand PSC

Download PDF of This Page (Size: 161K)

ब्रिटिश सरकार की विदेश नीति

लॉरेन्स की अफगान नीति

  • लॉरेन्स के अफगान नीति को कुशल अकर्मण्यता/कुशल निष्क्रियता के सिद्धांतों से जोड़ा जाता है।

  • लॉरेन्स के काल में आंग्ल-अफगान संबंधों को नई दिशा दी गई। अफगानों के साथ राजनीतिक मैत्री स्थापित कर शांतिपूर्ण संबंधों को बल दिया गया।

  • इस नीति के अंतर्गत हस्तक्षेप के सिद्धांत को बल प्रदान किया गया। साथ-साथ क्षेत्रीय अखंडता को सम्मान देने की बात की गई।

  • लॉरेन्स के उत्तरी-पश्चिम सीमा क्षेत्र के प्रति कुछ विशेष विचार थे। लॉरेन्स ने प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध के परिणामों को भी भली-भाँति समझा था। इस नीति के अंतर्गत उसने तटस्थता के सिद्धांतों को स्वीकार किया था।

  • लॉरेन्स की कुशल निष्क्रियता नीति अफगान मामलों के प्रति उदासीनता को नहीं दर्शाती अपितु, इसमें सतर्कता के तत्व निहित थे। साथ ही अफगान क्षेत्रों में निगरानी रखने का दृष्टिकोण निहित था। इन क्षेत्रों की घटनाओं के प्रति वह सजग था।

  • रूस, खतरे के प्रति भी लॉरेन्स ने सजगता दिखाई। इस क्षेत्र में रूसी महत्वाकांक्षाओं से वह परिचित था और इस क्षेत्र पर किसी विदेशी आक्रमण के प्रति भी सजग था।

लिटन की अफगान नीति

  • लिटन का अफगानिस्तान के प्रति आक्रमक दृष्टिकोण था, जिसकी परिणति दव्तीय आंग्ल-अफगान युद्ध में हुई।

  • अफगान मामलों के प्रति लिटन के विचार ब्रिटिश सरकारी विचार और ब्रिटिश जनमत से प्रभावित थे।

  • इस प्रभाव के अंतर्गत रूसी आक्रमण का खतरा महत्वपूर्ण था। इस काल में आंग्ल-रूसी महत्वाकांक्षाएं पश्चिमी एशिया तथा बाल्कंन क्षेत्र में परस्पर विरोधी थी।

  • लिटन का दृष्टिकोण अफगानिस्तान को प्रत्यक्ष नियंत्रण में लाकर मध्य एशिया में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार का आधार तैयार करना था।

  • लिटन के अफगान दृष्टिकोण के दो पहलू थे-

  • अफगानिस्तान पर नियंत्रण

  • अफगानिस्तान पर पतन की स्थिति को लाना ताकि यह एक मजबूत शक्ति के रूप में न उभर सके।

  • 1876 में लिटन ने कलात खान के साथ संधि की और क्वेटा को प्राप्त किया। क्वेटा का विशेष सामरिक महत्व था।

  • लिटन ने कश्मीर के शासक के साथ गुप्त समझौता कर गिलमिट में ब्रिटिश एजेंसी (शाखा) स्थापित की।

  • अफगानिस्तान में रूसी मिशन (लक्ष्य) के आगमन से अंग्रेज चिन्तित हुए। बाद के दिनों में लिटन ने जो प्रभावी प्रयास किए उससे अंतत: युद्ध का प्रारंभ हुआ। युद्ध में दक्षिणी अफगानिस्तान पर ब्रिटिश अधिकार की स्थापना हुई और लिटन की राजनीतिक इच्छा थी कि अफगानिस्तान को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाए लेकिन गृह सरकार से इस विचार को समर्थन नहीं मिला।

  • लिटन की अफगान नीति के अंतर्गत गंडमार्क की संधि जो लिटन की अफगान नीति को पराकाष्ठा का द्योतक था।

Glide to success with Doorsteptutor material for CTET - Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Developed by: