ब्रिटिश सरकार की प्रशासनिक एवं सैन्य नीतियाँ (Administrative and Military Policies of British Government) Part 2for Uttarakhand PSC

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विधि का शासन

अंग्रेजों ने कानून के शासन या विधि-शासन की आधुनिक अवधारणा को लागू किया। इसका अर्थ था उनका प्रशासन कम से कम सैद्धांतिक रूप में कानूनों के अनुसार चलाया जाएगा, न कि शासक की सनक या व्यक्तिगत इच्छा के अनुसार। कानूनों ने प्रजा के अधिकारों, विशेषाधिकारों एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया था। किसी भी अधिकारी के खिलाफ न्यायालय में सरकारी जिम्मेदारी को नहीं निभाने या अपनी अधिकार सीमा के बाहर जाकर कार्यवाही करने के लिए मुकदमा चलाया जा सकता था। भारतीय प्रशासन मुख्य रूप से कानूनों के आधार पर न्यायालयों दव्ारा की गयी व्याख्या के अनुसार चलाया जाता था। लेकिन व्यवहार में कानून नौकरशाही एवं पुलिस के हाथों में काफी अधिकार दे देते थे। फलत: ये जनता की स्वतंत्रता एवं अधिकारों में हस्तक्षेप करते थे। कानून बहुधा त्रुटिपूर्ण होते थे। कानून जनता दव्ारा जनतांत्रिक प्रक्रियाओं के दव्ारा नहीं बनाये गए थे।

कानून के सम्मुख समानता

इसका मतलब था कि कानून की निगाहों में सारे मनुष्य बराबर हैं। उसने जाति, वर्ग या धर्म के आधार पर विभेद को त्याग दिया। अब दीनहीन लोग भी न्यायालयों में जा सकते थे। लेकिन इस सिद्धांत का एक अपवाद था कि यूरोपवासियों एवं उनके वंशजों के लिए अलग अदालत और यहा तक कि अलग कानून थे। फौजदारी मामलों में उनकी सुनवाई केवल यूरोपीय जज ही कर सकते थे। हांलाकि न्याय की विफलता प्राय: देखी जाती थी। इसके अलावा, इस प्रणाली में न्याय अत्यंत जटिल एवं महँगा हो गया और धनी लोग कानूनों एवं कचहरियों को अपने पक्ष में कर लेते थे।

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