1947 − 1964 की प्रगति (Progress of 1947 − 1964) for Uttarakhand PSC Part 6 for Uttarakhand PSC

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भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965

देश के विभाजन के समय भारतीय नेताओं को यह आशा थी कि विभाजन के बाद शांति एवं आपसी मेलजोल को बढ़ावा मिलेगा। किन्तु पाकिस्तान के विभाजन के साथ ही कुछ ऐसी समस्याएं उत्पन्न हुई, जिसके कारण दोनों देशों के बीच संबंधों में कटुता आ गई, जैसे- हैदराबाद विवाद, जूनागढ़ विवाद, ऋण अदायगी का प्रश्न, नहरी पानी विवाद और कश्मीर समस्या।

1949 में युद्ध विराम रेखा निर्धारित हो जाने पर पाकिस्तान के हाथ कश्मीर का 32,000 वर्ग मील क्षेत्र चला गया। इधर संयुक्त राष्ट्र संघ ने जनमत संग्रह के प्रश्न पर यह शर्त लगा दी कि पाकिस्तान दव्ारा कश्मीर के अधिकृत क्षेत्र से पूर्ण वापसी की स्थिति में ही जनमत संग्रह होगा। परन्तु पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से अपनी सेनाएं हटाने को तैयार नहीं था। अत: जनमत संग्रह नहीं हो सका। 6 फरवरी, 1954 को कश्मीर की संविधान सभा ने एक प्रस्ताव पास कर जम्मू-कश्मीर राज्य के भारत में विलय की पुष्टि कर दी। भारत सरकार ने संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दे दिया। 26 जनवरी, 1957 को जम्मू-कश्मीर का संविधान लागू हुआ और इसी के साथ कश्मीर भारतीय संघ का एक अभिन्न हिस्सा बन गया, पर पाकिस्तान इस विलय को स्वीकार नहीं करता। इस कारण कश्मीर आज भी दोनों देशों के बीच विवाद का मुख्य विषय बना हुआ है।

अप्रैल, 1965 में पाकिस्तानी सेना की दो टुकड़िया भारतीय क्षेत्र में आ घुसी एवं कच्छ के कई भागों पर अधिकार कर लिया। कच्छ के रन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष आरंभ हो गया। इसी दौरान हजारों पाकिस्तान छापामार सैनिक कश्मीर में घुस आए। इसी बीच पाकिस्तान की नियमित सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा को पार करके भारतीय भू-भाग पर आक्रमण कर दिया और पूर्ण रूप से युद्ध आरंभ हो गया।

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