राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भूमिका (Role of Women in National Movement) for Uttarakhand PSC Part 1 for Uttarakhand PSC

Download PDF of This Page (Size: 173K)

महिलाओं में जागृति के कारण

भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन, ईसाई मिशनरियों दव्ारा शिक्षा के प्रचार-प्रसार एवं ब्रिटिश सरकार की उदारवादी प्रशासनिक एवं शिक्षा नीति के कारण महिलाओं में एक नई तरह की जागरुकता आई। सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों ने नारी शिक्षा एवं महिला उत्थान के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। इनके प्रयास से नारी शिक्षा के लिए कई विद्यालय एवं महाविद्यालय स्थापित हुए। कलकता में बेथून विद्यालय की स्थापना इस दिशा में प्रथम सक्रिय प्रयास था। इसके बाद देश के विभिन्न भागों में महिला विद्यालयों की स्थापना हुई। महिलाओं में शिक्षा के प्रचार-प्रसार में मिशनरियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। ब्रिटिश सरकार ने अपने आरंभिक दिनों में नारी शिक्षा को बढ़ावा तो नहीं दिया पर उसे हतोत्साहित भी नहीं किया। अत: सरकार की नीति अप्रत्यक्ष रूप से नारी शिक्षा के प्रसार में सहायक रही। इन सबके कारण नारी अधिक सक्षम और जागरुक हुई। वे अब अपने अधिकारों के प्रति भी सचेत हुई।

राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भूमिका

भारत की सचेत नारी जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने लगी। राष्ट्रीय आंदोलन में उन्होंने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। ब्रिटिश राज दव्ारा जब झांसी का क्षेत्र ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया तो वहां की रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के संघर्ष में मोर्चा खोल दिया। वहीं लखनऊ में बेगम हजरत महल भी अंग्रेजों से तब तक संघर्ष करती रहीं, जब तक उनकी पूरी शक्ति चूक नहीं गई। उन्होंने अन्य विद्रोहियों के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संघर्ष किया। 1885 में कांग्रेस की स्थापना के समय से ही इसमें कई महिला नेत्री सक्रिय रहीं। 1890 में कांग्रेस का अधिवेशन कलकत्ता में हुआ इसे भारत की पहली महिला स्नामक कांदबिनी गांगुली ने संबोधित किया। (वास्तविकता में सनवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू 1882 कांदबिनी गांगुली के साथ चन्द्रमुखी बासु ने भी स्नातक की परीक्षा पास की थी।) इसमें स्वर्ण कुमारी घोषाल नामक महिला प्रतिनिधि ने भी भाग लिया था। एनी बेसेंट एवं सरोजिनी नायडू जैसी महिलाओं ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नेतृत्व भी किया। एनी बेसेंट के नेतृत्व में भारत में होमरूल आंदोलन भी चलाया गया। इस आंदोलन की मुख्य मांग थी-स्वशासन एनी बेसेंट सरोजनी नायडू एवं श्रीमती हीराबाई टाटा ने 1919 में संयुक्त प्रवर समिति के समक्ष भारतीय महिलाओं के लिए मताधिकार की मांग की, जिसके परिणामस्वरूप 1919 में उन्हें मताधिकार प्राप्त हुआ।

गांधी जी दव्ारा राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व संभालने के साथ ही राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी। इसका कारण यह था कि गांधी जी की सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह की नीति महिलाओं के स्वभाव के अनुकूल थी। असहयोग आंदोलन के दौरान सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्त्री संघ की स्थापना की गई थी। बंगाल में उर्मिला (सी.आर. दास की विधवा बहन) और बसंती देवी के नेतृत्व में महिलाओं के एक समूह ने खादी वस्त्रों की बिक्री कर सरकार की अवज्ञा की थी। 1929 ई. में उर्मिला देवी की अध्यक्षता में नारी सत्याग्रह समिति का गठन किया गया। मद्रास के पूर्वी गोदावरी जिले में दुबरी सुबासम नामक महिला ने देव सेविका नामक स्त्री संघ की स्थापना की थी। गांधी के आंदोलन में इसने सक्रिय भूमिका निभाई।

लतिका घोष नामक महिला ने साइमन कमीशन के विरोध में महिलाओं की एक रैली का आयोजन किया। उसने सुभाष चन्द्र बोस की सलाह पर महिला राष्ट्रीय संघ की स्थापना की। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। धरसना नामक स्थल पर जब अब्बास तैयबजी की गिरफ्तारी हो गई, तब आंदोलन का नेतृत्व सरोजिनी नायडू ने संभाला।

भारत के क्रांतिकारी आंदोलन में भी महिलाओं ने बड़ी भूमिका निभाई। मास्टर सूर्यसेन के नेतृत्व में कल्पना दास एवं प्रीती लता वाडेकर ने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया था। सुनीति चौधरी, शांतिघोष और बीनादास ने भी क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। लीलानाग नामक महिला ने दीपावली संघ की स्थापना की थी। इसमें युवतियों को शस्त्र चलाने और बम बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता था।

1942 के आंदोलन में उषा मेहता ने गुप्त रेडियो का संचालन कर आंदोलनकारियों का मार्गदर्शन किया। इस आंदोलन के दौरान गांधी की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी कस्तूरबा ने आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। इंदिरा गांधी ने इस आंदोलन के दौरान बानरी सेना का गठन किया था।

इस प्रकार राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। वे घर की चार दीवारी से बाहर निकली और अपनी अपूर्व राष्ट्रीय भावना का परिचय दिया। कई ने तो देश की आजादी के लिए हथियार भी उठा लिए। जब देश आजाद हुआ तो नए भारत के निर्माण में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुचेता कृपलानी पहली महिला मुख्यमंत्री बनी। विजया लक्ष्मी पंडित ने संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत का नेतृत्व किया। इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्हें आयरन लेडी के नाम से भी जाना जाता है।

Doorsteptutor material for CTET is prepared by worlds top subject experts- Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Developed by: