नयी बौद्धिक संपदा अधिकार नीति (New Intellectual Property Rights Policy – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• सरकार ने नयी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा नीति की घोषणा की है।

• यह नीति ट्रिप्स (व्यापार-संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकार) के अनुरूप है।

• इस नीति का लक्ष्य-

• बिक्री योग्य वित्तीय अस्तियों के रूप में आईपीआर

• नवाचार को प्रोत्साहन

• जनहित में सस्ती कीमतों पर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

नयी बोद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) नीति के उद्देश्य

• आईपीआर कानून को कानूनी विधायी रूपरेखा देना जिससे बौद्धिक संपदा के मालिक के हित और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

• कानूनों के प्रवर्तन और बौद्धिक संपदा अधिकार विवाद के अधिनिर्णय को सुदृढ़ बनाना।

• आईपीआर के उत्पादन को प्रोत्साहित करना और व्यवसायीकरण के माध्यम से आईपीआर का मूल्य सृजित करना।

• आईपीआर प्रशासन को सेवा उन्मुख बनाना।

• आईपीआर प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए मानव संसाधन और संस्थाओं का निर्माण।

• आईपीआर और इसके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक लाभें के बारे में जागरूकता पैदा करना।

प्रमुख विशेषताएँ

• न्यून अधिकार प्राप्त समूह जैसे कारीगरों, बुनकरों आदि के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार के अनुकूल ऋण।

• विसंगतियों को दूर करना जैसे भारतीय सिनेमेटोग्रीफी (छायांकन) एक्ट (नियम) में संशोधन।

• आईपीआर के परीक्षण और स्वीकरण में तेजी लाना।

• उद्योगों को बौद्धिक संपदा के विकास का समर्थन करने के लिए सीएसआर फंड (संचय) का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना।

एक नयी आईपीआर नीति अब क्यों?

• यूएसटीआर और भारतीय जेनेरिक दवाओं पर कई प्रतिबंधों से लगातार दबाव।

• टीपीपी जैसे मेगा (विशाल) क्षेत्रीय व्यापार समझौते से उत्पन्न चुनौतियां।

• भारत को वृहत अनुसंधान एवं विकास के प्रोत्साहन के लिए तैयार करना।

• मेक (बनाना) इन (भीतर) इंडिया (भारत), डिजिटल इंडिया (अंकसंबंधी, भारत), स्टार्ट अप (उद्धाटन) इंडिया (भारत) जैसी योजनाओं को समर्थन देने के लिए।

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