राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना (National Hydroelectric Project – Environment And Economy)

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इसका लक्ष्य पूरे भारत से जल-मौसम विज्ञान संबंधी आँकड़ों का संग्रह करना तथा इन्हें कुशल जल प्रबंधन के लिए उपयोग करना है।

विशेषताएँ

• इसके दव्ारा समयबद्ध और विश्वसनीय जल संसाधन आँकड़ों की प्राप्ति, भंडारण, उनके तुलनात्मक अध्ययन तथा प्रबंधन हेतु एक तंत्र स्थापित किया जाएगा।

• इसके माध्यम से रिमोट (दूरवर्ती) सेंसिंग (समझ) जैसी अत्याधुनिक तकनीकी अपनाकर तथा सूचना तंत्र के कुशल प्रयोग दव्ारा जल संसाधन प्रबंधन में राज्य तथा केंद्रीय संगठनों की क्षमता निर्माण में सहयोग किया जाएगा।

• यह परियोजना गांव के स्तर तक जल (विशेष रूप से भूमिगत जल) के ’कुशल और न्यायसंगत’ उपयोग को प्रोत्साहित करेगी और साथ ही जल की गुणवत्ता की भी सूचना प्रदान करेगी।

• इसके दव्ारा जल-मौसम विज्ञान संबंधी आंकड़ों को भी संग्रहित किया जाएगा जिनका भंडारण और विश्लेषण वास्तविक समय के आधार किया जाएगा और जिन्हें बिना किसी बाधा के राज्य, जिला या गांव के स्तर पर किसी भी उपयोगकर्ता दव्ारा प्राप्त किया जा सकता है।

• पूर्व की जलविज्ञान परियोजना, जिसमें केवल 13 राज्य समाहित थे, से अलग यह परियोजना संपूर्ण देश को समाहित करती है।

• फंडिंग (निधिकरण) पैटर्न (प्रतिमान) -50 प्रतिशत विश्व बैंक (अधिकोष) ऋण से, जबकि शेष बजटीय समर्थन दव्ारा दिया जाएगा।

महत्व

• देश में जल की उपलब्धता के बारे में जनता को बेहतर जानकारी उपलब्ध होगी। इससे फसल प्रतिरूप जैसी गतिविधियों में विवेकपूर्ण निर्णय लिये जा सकेंगे।

• बाढ़ के पूर्वानुमान में कम से कम एक से तीन दिन की वृद्धि होगी।

• आपदा प्रबंधन प्राधिकारियों के उपयोग के लिए बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का मानचित्रण।

• मौसमी उपज पूर्वानुमान और सूखा प्रबंधन के माध्यम से जलाशय संचालनों में सुधार।

• संसाधनों के नियोजन और आवंटन के लिए नदी बेसिन में सतही और भूमिगत जल संसाधनों का बेहतर मूल्यांकन।

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