व्यवसायगत स्वास्थ्य जोखिम (Occupational Health Risks– Social Issues)

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• हाल ही में व्यवसायगत स्वास्थ्य जोखिम के एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार को सिलिकोसिस की वजह से मारे गए 238 लोगों के परिजनों को प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

• साथ ही मध्य प्रदेश सरकार को इस बीमारी से पीड़ित और काम करने में असमर्थ 304 श्रमिकों को क्षतिपूर्ति प्रदान करने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

• इस मामले में मारे गए श्रमिक मध्यप्रदेश के गरीब आदिवासी थे जो क्काट्‌र्ज और पत्थर काटने के उद्योगों में काम करने के लिए गुजरात चले गए थे।

• मध्यप्रदेश वापस जाने के बाद, 238 श्रमिकों की सिलिकोसिस और टीबी से मृत्यु हो गई और 304 श्रमिक अभी भी इस बीमारी से पीड़ित हैं।

• खनन, निर्माण, पत्थर काटने, हीरा तराशने और इस तरह के अन्य उद्योगों की महीन सिलिका धूल से सिलिकोसिस रोग होता है जिससे फेफड़ों पर गंभीर असर होता है और लोगों को क्षय रोग (टीबी) जैसी बीमारियां हो जाती हैं।

• सिलिकोसिस के शुरुआती लक्षणों और टीबी के कारण मृत्यु के बीच संबंध स्थापित करना मुश्किल है।

• ये मजदूर पहले से ही गरीब और कुपोषित हैं और बिना किसी सुरक्षात्मक उपायों के काम कर रहे हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का महत्व

• सिलिकोसिस को भारत में एक व्यवसायगत रोग के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन श्रमिक यह बहुत कम साबित कर पाते हैं कि बीमारी या मृत्यु का कारण सिलिका धूल है।

• इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दव्ारा आदेश दिए जाने के बाद भी अधिकारियों दव्ारा कोई कदम न उठाना उनकी उदासीनता दर्शाता है।

• सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों ने व्यवसायगत खतरों के कारण गरीबों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को पहचानने के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश किया है।

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