प्रतिपूरक वनीकरण निधि विधेयक 2015 में संशोधन (Amendment To The Compensatory Afforestation Fund Bill 2015 – law)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• संसद की एक स्थायी समिति की सिफारिश के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के दव्ारा प्रतिपूरक वनीकरण निधि विधेयक, 2015 में आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी प्रदान कर दी गयी।

प्रस्तावित संशोधन

• यह सरकार दव्ारा प्रदत्त पर्यावरण सेवाओं की सूची को अधिक समावेशी बनाएगा। इसके माध्यम से कुछ ऐसी पर्यावरणीय सेवाओं को समाप्त कर दिया जाएगा। जिनके मौद्रिक लाभों के आकलन के लिए कोई विश्वसनीय मॉडल (आर्दश) उपलब्ध नहीं है।

• नए कानून के तहत नियम बनाने के पूर्व राज्य सरकारों के साथ परामर्श किया जाएगा।

• जिन केंद्र शासित प्रदेशों में कोई विधायिका नहीं है, वहां यह केंद्र सरकार के दव्ारा ’संघ के लोक-लेखा’ के तहत कोष की स्थापना का प्रावधान करता है।

• इसमें वन भूमि के संरक्षित क्षेत्रों में रूपांतरण के बदले उपयोगकर्ता एजेंसियों (कार्यस्थानों) से धन के उपयोग के लिए प्रावधान भी शामिल हैं।

• यह सभी संबद्ध पक्षों को व्यापक प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए, राष्ट्रीय प्राधिकरण के शासी निकाय के सदस्यों के रूप में अंतरिक्ष और पृथ्वी विज्ञान से जुड़े मंत्रालयों के सचिवों को शामिल करने का प्रावधान करता है।

• इसमें राष्ट्रीय प्राधिकरण के शासी निकाय में विशेषज्ञ सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर पांच करने का प्रावधान है।

• पुन: इसमें राष्ट्रीय प्राधिकरण की कार्यकारी समिति में विशेषज्ञ सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने का प्रावधान है।

• अधिनियम में जनजातीय मामलों के एक विशेषज्ञ या जनजातीय समुदाय के किसी प्रतिनिधि को राज्य प्राधिकरण की संचालन समिति और कार्यकारी समिति दोनों में ही सदस्य के रूप में शामिल करना प्रस्तावित किया गया है।

• स्शााेंधन के माध्यम से राज्य प्राधिकरणों की वार्षिक योजना के संचालन को मंजूरी के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण की कार्यकारी समिति के लिए तीन महीने की समय सीमा तय कर दी गयी है।

प्रभाव

• यह कुशल और पारदर्शी तरीके से प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) के पास सूचित अब तक व्यय नहीं की गयी, संचित निधि (लगभग 40000 रुपये) त्वरित एवं सार्थक उपयोग को सुनिश्चित करेगा।

• यह अन्य कार्यों के उपयोग हेतु वन भूमि के रूपांतरण की स्थिति में पड़ने वाले प्रभावों का सामना करने में सहायक सिद्ध होगा।

• इन राशियों के सार्थक उपयोग के ग्रामीण क्षेत्रों, विशेष रूप से पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों, में उत्पादक परिसंपित्तयों का निर्माण होगा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

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