करप्शन (भ्रष्टाचार) परसेप्शन (उपलब्धि) इंडेक्स (सूची) (सीपीआई) 2015 (Corruption Perception Index 2015-Index)

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• बर्लिन आधारित ट्रांसपेरेंसी (स्वच्छता) इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) ने करप्शन परसेप्शन सूची (सीपीआई) 2015 जारी किया है।

• भारत का रैंक (श्रेणी) में सुधार हुआ है और यह वर्तमान रैंकिंग में 85 वें स्थान से 76 वें स्थान पर आ गया है।

• 2015 के लिए करप्शन परसेप्शन सूची (सीपीआई) में भारत का स्कोर (हिसाब) 38 रहा, जोकि पिछले वर्ष भी समान था।

• भारत छह अन्य देशों ब्राजील, बुर्किना फासो, थाइलैंड, टयूनीशिया और जाम्बिया के साथ यह रैंक साझा करता है।

• करप्शन परसेप्शन सूची में 2015 में 168 देशों की रैंकिंग की गयी जबकि 2014 में 174 देशों की रैंकिंग की गयी थी।

ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शी प्लास्टिक खंड जिस पर कुछ लिखांं हो, आरेख या चित्र बना हो) इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) का अवलोकन

• उच्च प्रदर्शन करने वालो देशों के प्रमुख लक्षण

• प्रेस की स्वतंत्रता का उच्च स्तर

• बजट सूचना तक पहुंच जिससे कि लोगों को पता चल सके की पैसा कहां से आ रहा और कहां खर्च किया जा रहा हैं।

• सत्ता में बैठे लोगों में ईमानदारी का उच्च स्तर;

• न्यायपालिका जोकि अमीर और गरीब के बीच अंतर नहीं करती हैं और ये सरकार के अन्य अंगों से सही मायने में स्वतंत्र है।

करप्शन परसेप्शन सूची (सीपीआई) क्या हैं?

• सीपीआई दुनिया भर में सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार का सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला सूचक है। यह एक समग्र सूचकांक है जो विश्व बैंक (अधिकोष) और विश्व आर्थिक मंच सहित सम्मानित संस्थानों दव्ारा किये गये सर्वेक्षण और मूल्यांकन से एकत्र परिणामों को जोड़ता है।

• यह कई कारकों को ध्यान में रखता है जैसे कि क्या सरकारी नेताओं को भ्रष्टाचार के लिए सजा दी जाती है या बिना दंड के छोड़ दिया जाता है, घूस का कथित प्रचलन और क्या सार्वजनिक संस्थान नागरिकों की आवश्यकताओं पर प्रतिक्रिया देते हैं।

• अपनाये गए स्कोरिंग (हिसाब) सिस्टम (प्रबंध) के अनुसार 0-100 पैमाने पर उच्च स्कोर देश में कम भ्रष्टाचार को दर्शाता है।

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