लोढ़ा समिति की सिफारिशें (Recommendations of The Lodha Committee – Report And Committee)

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पृष्ठभूमि

• बीसीसीआई की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए गठित तीन सदस्यीय लोढ़ा समिति ने 4 जनवरी 2016 को सर्वोच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इसके दव्ारा आईपीएल 2013 स्पॉट (स्थान) फिक्सिंग (किसी काम के नतीजे को बेईमानी से तय करना) मामलों के उपरांत आरंभ हुए घटनाक्रमों को तार्किक निष्कर्ष प्रदान करने की कोशिश की गई है। क्रिकेट में सुधारों से संबधित इस कमेटी (समिति) की रिपोर्ट चार भागों में विभाजित है।

• प्रथम भाग में समिति के उद्देश्यों को स्पष्ट किया गया है।

• दव्तीय भाग बीसीसीआई से संबंधित समस्याओं से संबद्ध है। यह भाग ’हितो के टकराव’ भ्रष्टाचार, पारदर्शिता का अभाव जैसी समस्याओं के स्वरूप पर प्रकाश डालता है तथा इनके समाधान हेतु सुझाव प्रस्तुत करता है।

• तृतीय खंड क्रिकेट से सुधारों से संबंधित है। यह परिशिष्ट के रूप में है जिसमें प्रश्नावली सम्मिलित हैं, जिसे बीसीसीआई और अन्य हितधारकों को सौंपा गया है।

• चतुर्थ भाग 2013 के स्पॉट (स्थान) फिक्सिंग और सट्‌टेबाजी से संबंधित मामलों में आईपीएल के भूतपूर्व मुख्य संचालन अधिकारी सुन्दर रामन को दोषमुक्त किए जाने से संबंधित है।

प्रमुख सुझाव

संरचना: खेल संगठन में राज्यों के उचित प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों के निपटान के लिए समिति ने ’एक राज्य-एक सदस्य-एक मत’ की नीति को प्रस्तावित किया है।

शासन: बीसीसीआई की कार्यप्रणाली से संबंधित विभिन्न मुद्दे हैं जिन पर समिति के दव्ारा विचार किया गया है जैसे-शक्ति का केन्द्रीकरण, सामर्थ्य का अभाव तथा विभिन्न कार्यो एवं उत्तरदायित्वों का स्पष्ट विभाजन न होना। समिति ने क्षेत्रीय संदर्भों, खिलाड़ियों तथा विशेष रूप से महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व न होना, असीमित कार्यकाल तथा अयोग्यता संबंधी कोई प्रावधान न होने जैसे मुद्दों का गंभीरता से रिपोर्ट में उल्लेख किया है। समिति का मानना है कि ऐसे मुद्दो का समाधान बीसीसीआई में विकेद्रीकरण की प्रक्रिया के दव्ारा किया जा सकता है।

आईपीएल और बीसीसीआई को पृथक करना: समिति की एक महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि आईपीएल को बीसीसीआई की अन्य गतिविधियों से पृथक किया जाए। समिति ने बीसीसीआई की शासकीय परिषद की सदस्यता सहित संपूर्ण संरचना में व्यापक परिवर्तन करने का सुझाव दिया है।

• समिति ने एक लोकपाल, एक नैतिकता अधिकारी तथा एक निर्वाचन अधिकारी के रूप में तीन नए पद सृजित करने का सुझाव दिया गया है।

बीसीसीआइ को आरटीआई एक्ट (अनुकरण करना) की परिधि में लाना: समिति के अनुसार लोगों को बीसीसीआइ के कार्यो, सुविधाओं और अन्य गतिविधियों के बारे में जानने का अधिकार है। इसलिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (नियंत्रण, मंडल) को सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लाया जाए। सूचना के अधिकार संबंधी प्रावधान स्वयं बीसीसीआई की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सुनिश्चत करेगे।

सट्‌टेबाजी को वैधानिक बनाना: समिति ने सशक्त प्रावधानों के साथ क्रिकेट में सट्‌टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश की है, किन्तु यह खिलाड़ियों और टीम (समूह) प्रबंधन के लिए प्रतिबंधित होनी चाहिए।

खिलाड़ियों के लिए संगठन: समिति ने खेल संगठनों की भांति खिलाड़ियों के लिए भी संगठन स्थापित करने का सुझाव दिया है। इस संगठन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तथा प्रथम श्रेणी के क्रिकेट खेल चुके ऐेसे भी भारतीय क्रिकेटरों को सदस्यता दी जानी चाहिए जिन्हें खेल से सन्यास लिए हुए पांच वर्ष से अधिक समय न बीता हो।

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